Ayushman Khurrana Wants To Work in Kishore Kumar Biopic

दि राइजिंग न्‍यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

अपना मतलब बनता भाड़ में जाएं . . ।

 

जी हां, गुड्स एंड सर्विस टैक्स सर्विस टैक्स से भले ही आम जनता को कोई लाभ नहीं पहुंचा हो लेकिन सरकार और व्यापारी इसे लेकर बड़े उत्साहित हैं। यह अलग बात है कि व्यापारियों में अधिसंख्य जीएसटी को लेकर परेशान हैं लेकिन उनके नेता इसके बड़े पक्षधर दिख रहे हैं। उसकी वजह है कि जैसे तैसे सत्ता की नजदीकी पाने की हसरत। शायद उसी सहारे कोई बड़ा अहम ओहदा मिल जाएं। व्यापारी संगठनों की यह होड़ निकाय चुनाव में भी दिख रही है। भले ही लखनऊ व्यापार मंडल के वर्तमान अध्यक्ष राजेंद्र अग्रवाल तथा पूर्व अध्य़क्ष एंव उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के अध्यक्ष बनवारी लाल कंछल एक पुराने मामले में जेल तक चले गए लेकिन व्यापार मंडल फिलहाल अपने हित ही साधने में लगा है। व्यापारी जीएसटी की दुश्वारियों की दुहाई दे रहे हैं। आम जनता महंगाई से कराह रही है लेकिन व्यापारी नेता अपनी दुकानें बड़ी करने की जुगत में। निकाय चुनाव में भी यह देखने को मिल रहा है।

बानगी देखिए कि एक व्यापार ने पिछले दिनों में एक व्यापारिक संगठन ने  निराला नगर में उप मुख्यमंत्री डा. दिनेश शर्मा को अगुवा बनाकर भाजपा मेयर प्रत्याशी व अन्य प्रत्याशियों को समर्थन की घोषणा कर दी। यह अलग बात है कि संगठन को पूरी तरह से गैर राजनैतिक होने का दम भरते नहीं थकता। संगठन के अध्यक्ष भी जीएसटी को लेकर असमंजस में दिखते हैं। कभी मुद्रा बैंक को व्यापारियों के बेहतर बताते हैं तो कभी जीएसटी की खामियां गिना देते हैं। व्यापारी नेता है और हजारों व्यापारियों के पीछे होने का दम भरते हैं लेकिन उनके सहयोगी ही बताते हैं कि नेता जी के पास जीएसटीएन नंबर ही नहीं हैं। यह बात उनके आका के कानों तक पहुंच चुकी है। मगर नेता ही पूरी शिद्दत के साथ पार्टी के प्रति अपना समर्पण जताने से पीछे नहीं है।

इसी तरह से लखनऊ व्यापार मंडल के अध्यक्ष राजेंद्र अग्रवाल करीब तीन दशक पुराने अधिकारियों से मारपीट के मामले में जेल पहुंच गए। दो दिन पहले निकले हैं। अब शुक्रवार को व्यापारी सम्मेलन व संवाद कार्यक्रम आयोजित हो रहा है। संवाद में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्य अतिथि होंगे और मेयर प्रत्याशी संयुक्ता भाटिया विशिष्ट अतिथि। लाजिमी है संवाद में व्यापारियों की समस्याओं को सुना जाएगा। मगर नंबर गेम में व्यापार मंडल अपने प्रतिद्वंदी से आगे दिख रहा है। यानी सीधे मुख्यमंत्री की खिदमत का मौका।

 

वैसे अपनी अहमियत जताने में समाजवादी पार्टी के साथ रहने वाले संगठन भी पीछे नहीं है। अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल भले ही अभी सुस्त दिख रही हों लेकिन पार्टी से जुड़ी रही मोमिन अंसार सभा ने आम आदमी पार्टी को अपना समर्थन देने की घोषणा की है। सभा के अध्यक्ष अकरम अंसारी ने बताया कि राजधानी में मेयर पद प्रत्याशियों में केवल आम आदमी पार्टी उम्मीदवार से ही कुछ उम्मीद की जा सकती है क्योंकि सपा-बसपा की कार्यप्रणाली से अवगत हैं। भाजपा की आठ महीने सरकार में जो स्थितियां दिख रही है, उससे ज्यादा उम्मीद नहीं की जा सकती है।

बहुत पुराना है फंडा

 

वैसे सरकार के हाथों में व्यापार मंडलों व व्यापारियों के खेलने का फंडा बहुत पुराना है। लखनऊ व्यापार मंडल के पूर्व अध्यक्ष एवं उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के प्रांतीय अध्यक्ष बनवारी लाल कंछल इसी तरह से समाजवादी पार्टी की खिदमत करके राज्यसभा तक पहुंचे। पूर्व मुख्यमंत्री राम प्रकाश गुप्ता के संरक्षण में राजनीति की सबक सीखने वाले संदीप बंसल ने भी अपनी महत्वाकांक्षाओं के लिए भाजपा से नाता तोड़ समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया। समाजवादी पार्टी की सरकार गई तो दोनों ही नेता बहुजन समाज पार्टी के साथ खड़े दिखाई दिए। यह अलग बात है कि बहुजन समाज पार्टी ने दोनों नेताओं को बहुत बेरुखी के बाहर का रास्ता दिखाया था। उसके बाद दोनों वापस समाजवादी पार्टी में पहुंच गए। इसमें संदीप बंसल मंत्री पद पाने में भी सफल रहे लेकिन बनवारी लाल कंछल पैदल ही रहें।

 

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