Home Rising At 8am Bawariya Gang Change Style Of Robbery

प्रिंस विलियम और केट मिडलटन बने माता पिता, बेटे का जन्म

हमें उम्मीद है आने वाले समय में कुछ नक्सली सरेंडर करेंगे: महाराष्ट्र DGP

दिल्ली: मानसरोवर पार्क के झुग्गी-बस्ती इलाके में लगी आग

कांग्रेस का लक्ष्य है "हम तो डूबेंगे सनम तुम्हें भी साथ ले डूबेंगे": मीनाक्षी लेखी

कावेरी जल विवाद: विपक्षी पार्टियों का मानव श्रृंखला बनाकर विरोध प्रदर्शन

समय के साथ बदला बावरिया गिरोह का ढ़ंग

Rising At 8am | 14-Feb-2018 | Posted by - Admin
  • राड और लकड़ी के जरिए वारदात करने वाले घुमंतू गिरोह कर रहे तमंचे-पिस्‍टल का इस्तेमाल

  • वारदात के बाद मौके पर साक्ष्य हासिल करना भी हो जाता है मुश्किल

   
Bawariya Gang Change Style of Robbery

​​दि राइजिंग न्‍यूज

आशीष सिंह

लखनऊ।

 

राजस्‍थान का कुख्‍यात बावरिया गिरोह एक जनजाति श्रेणी में आता है। पुलिस इन्हें आपराधिक प्रवृत्ति की जनजाति मानती है। इनके अपराध करने का ढंग उन्हें सामान्य अपराधियों से अलग कर देता था, लेकिन अब इनके बदले हुए अपराध करने की ढंग ने पुलिस को परेशान कर दिया है। दरअसल, पहले बावरिया गिरोह अमूमन लकड़ी के मोटे तने, लोहे की राड आदि का इस्तेमाल करते थे। यही नहीं, वारदात–लूट के दौरान यह जमकर खूनखराबा करते थे। मगर अब इन लोगों के अपराध करने का तरीका भी बदल गया है।

 

घुमंतू अपराधियों के इस गिरोह में बच्‍चे, महिलाएं भी शामिल होते हैं, जिनका काम शिकार को तलाशना व सटीक रेकी करना होता है। इसके लिए वह कभी भिखारी का भेष बनाते हैं तो कभी फेरी वाले बनकर क्षेत्र घूमते हैं।  इसके बाद शुरू होता है रेकी का काम और फिर डकैती-हत्‍या जैसे जघन्‍य अपराध को अंजाम देने के बाद भाग निकलते हैं। यह गैंग पश्चिमी यूपी, हरियाणा और राजस्थान सहित पूरे उत्‍तर प्रदेश में सक्रिय है। बीते दिनों राजधानी में इस गिरोह ने एक के बाद कई घरों में डकैती और दो लोगों की हत्‍या की थी।

स्वभाव से ही क्रूर और खतरनाक बावरिया गिरोह डकैती-लूट की वारदात को जहां भी अंजाम देता है हत्या या मारपीट जरूर करता है। यह तबतक जारी रहता है जब तक खून ना निकल आए। अनुभवी पुलिस कर्मियों के मुताबिक अमूमन दीपावली के दिन गैंग के सदस्‍य पूजा-पाठ करके अपना मूल निवास स्‍थान छोड़ देते हैं। इसके बाद शुरू होता है अपराधों का सिलसिला। वारदात करने वाली जगह से कुछ ही दूरी पर गैंग अपना मुख्‍यालय बनाता है। यहां से निकलते समय पूजा पाठ भी की जाती है। इस दौरान महिलाएं खास पूजा का आयोजन भी करती हैं, इसके लिए वह अखंड ज्योति तक जलाती हैं। गिरोह के डकैत वारदात से पहले शरीर पर तेल मलते थे। ताकि पकड़े जाने पर वह आसानी से छूट कर भाग सकें।

शिकार के घर धावा बोलते ही लूटपाट से पहले यह गिरोह हत्या और मारपीट शुरू कर देता है ताकि दहशत और आतंक के बीच वह अपने काम को आसानी से कर सके। वारदात के बाद घटना स्थल या आस-पास शौच क्रिया भी करते थे। हालांकि अब यह देखने को नहीं मिल रहा है। डकैती के बाद यदि कोई सदस्‍य बिछड़ जाए तो यह एक-दूसरे को बुलाने के लिए विशेष आवाजें भी निकालते हैं। घटना के दौरान उनकी भाषा कोई समझ ना पाए इसके लिए वह कोड वर्ड में बातचीत भी करते हैं।

राड-डंडे की जगह तमंचा, ट्रेन की जगह निजी वाहन का प्रयोग

बावरिया गैंग के डकैत अपने शिकार के पास आसानी से पहुंच सके और पुलिस को भी शक ना हो इसके लिए वह निहत्‍थे ही अपने शिकार तक पहुंचता था। इसके बाद वह मौके पर ही किसी राड या लकड़ी की व्‍यवस्‍था करता और दरवाजा खुलवाने के बाद हमला होता था। हालांकि अब गैंग के सदस्‍य इससे दूर होकर तमंचे और बंदूक का प्रयोग करने लगे। साथ ही ट्रेन और बस को छोड़ कर खुद की गाड़ी भी रख ली, जिससे उन्‍हें आने-जाने में कोई दिक्‍कत ना हो। वारदात को अंजाम देने के बाद यह गिरोह जल्‍द से जल्‍द घटना स्‍थल को छोड़ देता है। ताकि पुलिस उसे पकड़ ना पाए।

नौकरी की तरह बदलते हैं गैंग

जिस तहर निजी क्षेत्र में काम करने वाले लोग अपनी सुविधा के अनुसार नौकरी बदलते रहते हैं वैसे ही इस गिरोह के सदस्‍य भी गैंग बदलते रहते हैं। डकैतों को जहां से ज्‍यादा माल मिलता है, वह वहीं पर जम जाते हैं। जैसे ही उन्‍हें पता चलता है कि दूसरे गैंग में यहां से ज्‍यादा माल और सुविधा है तो वह गैंग बदलने में एक पल भी नहीं लगाते। इस तरह पांच से 10 लोगों के साथ शुरू गैंग देखते ही देखते 15 से 20 डकैतों का बन जाता है। इसके बाद यह घटना को अंजाम देना शुरू करते हैं।

गोपनीयता नहीं होती भंग

डकैत भले ही एक गैंग से दूसरे गैंग में पहुंच जाते हों, लेकिन किसी भी बात को इधर से उधर नहीं करते। यह इनकी विशेषता मानी गई है। इस मामले में तो डकैत कई बार पुलिस के पकड़े जाने के बाद भी अपने सदस्यों के बारे में मुंह तक नहीं खोलते भले ही इसमें उन्‍हें किसी भी स्थिति से क्‍यों ना गुजरना पड़े? यही कारण है कि इस गिरोह को आज तक नेस्‍ताबूत करने में राजस्‍थान पुलिस और यूपी पुलिस को नाकों चने चबाने पड़ रहे हैं और यह गैंग वारदात को अंजाम देने के बाद फरार हो जाता है।

सोशल साइट्स पर रहते हैं सक्रिय

डकैत जब अपराध के सिलसिले में बाहर होते हैं तो वह सोशल साइट्स पर बेहद सक्रिय रहते हैं। हालां‍कि इस दौरान वह फेक आइडी से लेकर फर्जी सिम तक का प्रयोग करते हैं। मामला चाहे फेसबुक का हो या फिर व्‍हॉट्सएप का। हर जगह बाकायदा ग्रुप बनाकर ये डकैत पल-पल की खबर एक दूसरे को लेते-देते हैं। इतना ही नहीं किसी गुप्‍त बातचीत को लेकर वह कोड वर्ड में भी संदेश भेजते हैं। बीते दिनों काकोरी में हुए कांड के बाद ऐसे ही एक व्‍हॉट्सएप ग्रुप का पता भी चला था।

“बावरिया गिरोह के डकैतों को गिरफ्तार करने के बाद कई तरह की जानकारी सामने आईं हैं। इस गैंग के बारे में जो भी सामान्‍य धारणाएं थी अब वह उनसे काफी अलग हैं। गिरोह के डकैत नए तरह से अपराधों को अंजाम दे रहे हैं। इसमें तमंचे, चाकू और पिस्‍टल तक शामिल हैं। यही नहीं, वारदात के बाद इनके शामिल होने का भी आसानी से पता नहीं चल पाता है। ”

प्रवीण कुमार

डीआइजी, लॉ-ऑर्डर

"जो मित्र दि राइजिंग न्यूज की खबर सीधे अपने फोन पर व्हाट्सएप के जरिए पाना चाहते हैं वो हमारे ऑफिशियल व्हाट्सएप नंबर से जुडें  7080355555







TraffBoost.NET

Rising Stroke caricature
The Rising News Public Poll

Merchants-Views-on-Yogi-Government-One-Year-Completion

Loading...




Flicker News

Most read news

 


Most read news


Most read news