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  • पान मसाला –तम्बाकू को जांच के दायरे से बाहर बताता है एफएसडीए
  • नारकोटिक्स विभाग भी झाड़ लेता है पल्ला

Adulteration in the packets of Pan Masala

दि राइजिंग न्यूज

संजय शुक्ल

लखनऊ।

 

देश में हर साल तम्बाकू सेवन से करीब 20 लाख मौतें हो रही है। मौत के ये आंकड़े उत्तर प्रदेश और बिहार में बाकी दूसरे राज्यों के मुकाबले कहीं ज्यादा हैं लेकिन अचरज की बात यह है कि गुणवत्ता पूर्ण खाद्य सामग्री व उत्पादों की बिक्री सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी संभालने वाला खाद्य सुरक्षा विभाग तम्बाकू की जांच से इंकार कर देता है। अधिकारी इसे दायित्व क्षेत्र के बाहर की बात करार देते हैं। जबकि नारकोटिक्स विभाग के मुताबिक तम्बाकू प्राकृतिक उत्पाद से निर्मित हैं। काऱण है कि इसमें कैनाबिनाड नाम तत्व होता है लेकिन यह नारकोटिक्स के दायरे में नहीं है।

 

अब इसे भ्रष्टाचार कहें या फिर अधिकारियों की कमाऊ आदत कि पान मसाला व तम्बाकू की जांच पूरी तरह से बंद कर दी गई है। खास बात यह है कि तीन साल पहले तक होने वाली नियमित जांच अब इस कारण से बंद कर दी गई है कि ये जांच के दायरे में आती नहीं है। एक तरफ खाद्य सुरक्षा विभाग हल्दी से लेकर मिर्च-धनिया की जांच कर लेता है। बड़ी दुकानों पर मिठाईयों की जांच हर त्योहार के पहले हो जाती है लेकिन पान मसाला जांच उनके दायरे से बाहर हो गई। जबकि नियमानुसार ऐसा कुछ नहीं है। कारण है कि पान मसाला सुपारी, कत्था, चूना आदि से तैयार किया जाता है। उत्तर प्रदेश में इसका इस्तेमाल भी बहुत ज्यादा है। लिहाजा इसे तैयार करने में घटिया सुपारी, लकड़ी का बुरादा, कत्थे की जगह गैम्बियर का इस्तेमाल हो रहा है।

राजधानी में मिल चुका है गैम्बियर

 

राजधानी में करीब दो दर्जन कंपनियों द्वारा पान मसाला बनाकर बेचा जा रहा है। दो रुपये में बिकने वाले पाउच में सुपारी बेहद घटिया किस्म की इस्तेमाल की जा रही है। यही नहीं, कत्था में भी गैम्बियर और पेटिंग में इस्तेमाल होने वाली लाल खडिया का इस्तेमाल हो रहा है। जबकि खाद्य सुरक्षा विभाग केवल वसूली में ही व्यस्त है। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी संजय प्रताप सिंह तो इसे अधिकार क्षेत्र के बाहर की बात कह कर टाल जाते हैं। जबकि तीन साल पहले तक ऐशबाग से लेकर पान दरीबा तक छापेमारी उनकी अगुवाई में हुई थी। ऐशबाग में नकली पान मसाला मिलने के बावजूद पूरी रिपोर्ट को दबाने में ही उनकी अहम भूमिका रही थी। उसकी बाद से उनके सुर तक बदल गए। उसके बाद से वह पान मसाला – तम्बाकू तक को जांच के दायरे से बाहर करार देने लगें।  

नकली पान मसाला बनाने का सिंडीकेट

 

राजधानी में पान मसाला बनाने वाली कई फर्मे अलग अलग स्थानों से उत्पादन करा रहीं है। इसमें उत्पाद कर विभाग और खाद्य सुरक्षा विभाग दोनों की मजबूत सेटिंग है। हरदोई रोड पर बालागंज, सीतापुर रोड पर मड़ियांव, चारबाग, राजाजीपुरम आदि इलाकों में कई स्थानों पर नकली अथवा कंपनियों की सांठगांठ से पान मसाले का उत्पादन किया जा रहा है। यह मसाला खुलेआम जिलाधिकारी दफ्तर के गेट से लेकर विधानसभा के गेट तक बिक रहा है। मगर की इसकी जांच करने के बजाए अधिकारी इसमें वसूली ही करने में जुटे हैं। नतीजा यह है कि खुलेआम घटिया पान मसाला बन भी रहा है और खुले आम बिक भी रहा है।

जांच ही संदिग्ध

 

पान मसाला प्रकरणों की जांच हमेशा ही संदिग्ध रही हैं। कारण है कि खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारी हमेशा कंपनी में ही जांच करने जाते हैं जबकि उनके दफ्तर के बाहर ही बिक रहा है। इसकी वजह है कि कंपनी में सूचना के बाद की जाने वाली जांच के कारण मामूली कमियां मिलती है। विभागीय आकड़ों के मुताबिक जब कभी कंपनी से बाहर से नमूने लिए गए, वे जांच में फेल हो गए। नतीजतन अधिकारी खुले बाजार या दुकानों से पाउच की सैंपलिंग करते ही नहीं है।

"पान मसाला की जांच को लेकर किसी तरह की कोई रोक या व्यवधान नहीं है। जो अधिकारी इसे जांच के बाहर बता रहे हैं, वे गलत कह रहे हैं। जल्द ही इसके खिलाफ सघन जांच अभियान शुरू किया जाएगा।"

विवेक कुमार श्रीवास्तव

सिटी मजिस्ट्रेट



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