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ब से बस्ता, ब से बंदूक

     
  
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  • जीएसटी में दोनों पर टैक्स की दर 28 फीसद
  • शिक्षा मुफ्त लेकिन स्कूल बैग से लेकर किताब पर टैक्स

according to gst tax of books and guns is twenty eight percent

दि राइजिंग न्यूज़

संजय शुक्ल

लखनऊ।


बस्ता और बंदूक। दोनों में कोई समानता है तो सिर्फ इतनी कि दोनों ब वर्ण से शुरू हो रहे हैं लेकिन लोकप्रिय भाजपा सरकार ने अब इन दोनों में एक और समानता कर दी है। वह है कि दोनों पर अब टैक्स 28 फीसद ही लगेगा। जी हां, जीएसटी (गुड्स एंड सर्विस टैक्स) में दोनों वस्तुओं को 28 फीसद टैक्स के दायरे में रखा गया है। केवल इतना ही नहीं, एक तरफ सरकार मुफ्त, सुलभ और बेहतर शिक्षा के लिए प्रति अपनी प्रतिबद्धता जता रही है लेकिन स्कूल बैग से लेकर कापी –किताब सब टैक्स के दायरे में आ रहा है।




दरअसल, जुलाई से प्रस्तावित जीएसटी में टैक्स की दरों के लेकर कई स्थानों पर कुछ इसी तरह से बहुत अव्यावहारिक सी दरें दिखाई दे रहीं है। यहां की अंतिम संस्कार में इस्तेमाल होने वाली लकड़ी तक पांच फीसद टैक्स के दायरे में आ गई है यानी जीएसटी लगने के बाद घाट पर अंतिम संस्कार के लिए खरीदी जाने वाली लकड़ी पर भी टैक्स अदा करना पड़ेगा। मगर सरकार कह रही है कि जीएसटी के बाद लोगों को फायदा मिलेगा। मगर कैसे।




उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के संसदीय महामंत्री अमरनाथ मिश्र के मुताबिक यह सही है कई स्थानों पर टैक्स की दरें बिलकुल अव्यवहारिक हैं। ऐसे में सरकार किस आधार पर लोगों को सहूलियत देने की बात कर रही है, ये गले नहीं उतरता है। खाद्यान्न पर मंडी शुल्क लग रहा है। जीएसटी के दरें भले ही पूरे देश में एक हो जाएं लेकिन मंडी शुल्क की दरें ही कई राज्यों में अलग अलग हैं। ऐसे में दाम दाम की समरुपता किस तरह से बनाई जाएगी, ये भी अपने आप में पहेली सरीखा है।


बच्चों के बस्ते पर भारी जीएसटी

जीएसटी के दरें स्टेशनरी के सामान पर सबसे ज्यादा ज्यादा हैं। तमाम सामान पांच फीसद से लेकर 28 फीसद तक टैक्स के दायरे में है। स्टेशनरी निर्माता –विक्रेता एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह चौहान के मुताबिक वैट लागू हुआ तो भी कुछ ऐसी ही स्थिति थी। केवल वर्गीकरण न होने के कारण बाल पिन, स्ट्रेपलर, इंक पैड तक किसी वर्ग में नहीं रखे गए, नतीजतन उन पर 12.5 फीसद टैक्स लग गया था। इसी तरह से साइकिल भले ही टैक्स की दर कम थी लेकिन स्पेयर पार्टस पर साढ़े 12 फीसद टैक्स लग रहा था।


 

व्यापारियों ने दिया ज्ञापन

जीएसटी में वस्तुओं पर लगाए जाने वाले टैक्स की अव्यवहारिक दरों, जीएसटी के प्रावधानों की जानकारी के लिए व्यापारियों को शिक्षित करने आदि मांगों को लेकर गुरुवार को व्यापारियों के प्रतिनिधि मंडल ने गुरुवार को केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन देने वालों में लखनऊ व्यापार मंडल के अध्यक्ष राजेंद्र अग्रवाल, वरिष्ठ महामंत्री अमरनाथ मिश्रा, महामंत्री विनोद अग्रवाल, पवन मनोचा, विनोद माहेश्वरी सहित दर्जनों व्यापारी शामिल थे।


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