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दि राइजिंग न्यूज़

आउटपुट डेस्क।

 

मोहनदास करम चंद गांधी यानी महात्मा गांधी की आज पुण्य तिथि है। बैरिस्टर परिवार के मोहनदास करम चंद गांधी ने भी बैरिस्टर की पढ़ाई की लेकिन देश प्रेम में देश के स्वाधीनता आंदोलन से जुड़ गए। अहिंसा के रास्ते जिस तरह से उन्होंने देश को अंग्रेजों से आजादी दिलाई कि वह देश के बापू बन गए। देश भी राष्ट्रपिता के रूप में उनका नमन करता है। 30 जनवरी 1948 को उनकी गोली मार कर हत्याकर दी गई थी। उसके बाद से ही तीस जनवरी को शहीद दिवस के रूप में मनाते हैं।

शहीद दिवस

शहीद दिवस पर विशेष श्रद्धांजलि सभा का भी आयोजन किया जाता है। राष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री और तीनों सेना के प्रमुख राजघाट स्थित महात्मा गांधी की समाधि पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हैं। साथ ही महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देते हुए उनके सम्मान में अपने हथियार को  नीचे की तरफ कर देते हैं। इस मौके पर पूरे देश में महात्मा गांधी समेत अन्य शहीदों की याद में दो मिनट का मौन रखा जाता है। इस दौरान विशेष तौर पर सभी धर्म के लोग प्राथना का भी आयोजन कराते हैं।

मोहनदास से महात्मा तक का सफ़र

आमतौर पर यह धारणा प्रचलित है कि महात्मा गांधी को पहली बार “महात्मा” से संबोधित किया रवींद्रनाथ ठाकुर ने लेकिन, धर्मपालजी अपनी पुस्तक में बताते हैं कि दक्षिण अफ्रीका से भारत वापस आने पर गांधी को पहली बार महात्मा के रूप में संबोधित किया गया 21 जनवरी 1915 को।  यह संबोधन गुजरात के जेतपुर में हुए नागरिक अभिनंदन समारोह में हुआ। इसमें प्रस्तुत अभिनंदन पत्र में “श्रीमान महात्मा मोहनदास करमचंद गांधी” जैसे आदरसूचक शब्दों में उनका उल्लेख किया गया। इसके बाद तो उन्हें महात्मा कहने का ऐसा सिलसिला चल पड़ा कि वे पूरे नाम के बदले सिर्फ “महात्मा गांधी” के रूप में पहचाने जाने लगे। वस्तुत: दक्षिण अफ्रीका में मोहनदास ने “कुली बैरिस्टर” के रूप में जातीय स्वाभिमान की रक्षा के निमित्त जो त्याग और संघर्ष किया उसने उन्हें दक्षिण अफ्रीका के भारतीयों के बीच “गांधी भाई” बना दिया तो भारत में “महात्मा”। नेलसन मंडेला ने सही कहा था कि भारत ने जिस मोहनदास को दक्षिण अफ्रीका भेजा था, उसे दक्षिण अफ्रीका ने “महात्मा” बना कर भेजा।

बापू की जिंदगी के कुछ राज

  • राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को दुनिया भर में एक महान शख्सियत के तौर पर याद किया जाता है। वे अपने आदर्शों और अहिंसा के पक्के थे। उन्हें न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी विशेष मान-सम्मान दिया जाता है। इस बात का अंदाजा आप इससे लगा सकते हैं कि दुनिया के महान वैज्ञानिकों में शुमार आइंस्टीन ने कहा था कि कुछ सालों बाद लोग इस बात पर यकीन नहीं करेंगे कि महात्मा गांधी जैसे शख्स दुनिया में थे।

  • गांधी जी ने अपना पूरा जीवन देश के लिए समर्पित कर दिया। देश के कई कोने ऐसे हैं, जहां से उनकी यादें जुड़ी हैं। ऐसी ही एक जगह हरियाणा में भी है। आपको जानकर हैरानी होगी कि महात्मा गांधी को पांच बार नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया था। गांधी जी को सम्मान देने के लिए एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब्स गोल चश्मा पहनते थे।

  • गांधी जी नकली दांत लगाते थे, जिसे वह अपने कपड़े में रखते थे। महात्मा गांधी हर रोज 18 किलोमीटर पैदल चलते थे। इस लिहाज से गांधी जी पुरी दुनिया के दो चक्कर लगा सकते हैं।

  • अपनी मौत से एक दिन पहले महात्मा गांधी कांग्रेस पार्टी को भंग करने पर विचार कर रहे थे। महात्मा गांधी की अंतिम यात्रा 8 किलोमीटर तक चली थी। गांधी जी के नाम से भारत में 53 मुख्य मार्ग हैं जबकि विदेशों में 48 सड़के हैं। गांधी जी के कपड़ों सहित उनकी कई वस्तुएं आज भी मदुरई के म्यूजियम सुरक्षित हैं। अपने पूरे जीवन में गांधी जी ने कभी कोई राजनीति पद नहीं लिया।

  • जिस अंग्रेजी सरकार के खिलाफ गांधीजी ने आंदोलन किया उसी अंग्रेजी सरकार ने महात्मा गांधी की मौत 21 साल बाद उनके सम्मान में स्टांप जारी किया था। गांधी जी ने बोएर युद्ध में बतौर सैनिक हिस्सा लिया था। दक्षिण अफ्रीका में महात्मा गांधी को 15 हजार डॉलर मिलते थे जो आजके तकरीबन 10 लाख रुपए के बराबर है।

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