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डिजिटल ट्रांजेक्शन: जानिए दस खास बातेें

            

  • भीम ऐप इस्‍तेमाल करने से पहले ये बातें जान लें
  • पीओएस मशीन के इस्तेमालचार्जेससेटलमेंटजानिए

Bhim app know how to send and receive money through bharat interface for money

दि राइजिंग न्‍यूज

अरुण त्रिपाठी

09 जनवरी, लखनऊ।

डिजीटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भीम (BHIM) ऐप लॉन्च किया। जिसके जरिए भारत में डिजीटल ट्रांजेक्शन को बढ़ाया जा सके। भीम (Bharat Interface for Money) एक पेमेंट प्लेटफॉर्म है जिसकी सहायता से यूपीआइ (Unified Payment Interface) के जरिए तेजी से ट्रांजेक्शन किया जा सकता है।

इस ऐप के लॉन्च होने के 48 घंटे के साथ ही यह भारत में सबसे ज्यादा डाउनलोड किए जाने वाला ऐप बन गया था। इसका नाम डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के नाम पर रखा गया था। गूगल प्ले स्टोर पर यह ऐप फ्री कैटेगरी में लिस्टेड है। भीम ऐप यूपीई और यूएसएसडी (Unstructured Supplementary Service Data) सेवा का रिब्रांडेड वर्जन है।

 

1)- वर्तमान में भीम ऐप सिर्फ एंड्रॉयड यूजर्स के लिए है। आगे इसे एप्पल डिवासेस (iOS प्लेटफॉर्म) के लिए भी लॉन्च किया जाएगा। भीम ऐप को नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने बनाया है।

 

2)- भीम यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेड (UPI) पर काम करने वाला इंस्टेंट पेमेंट सिस्टम है। यूपीआइ IMPS इंफ्रास्ट्रक्चर की तर्ज पर बना है और इससे बैंक अकाउंट्स के बीच पेमेंट तुरंत किया जा सकता है।

 

3)- भीम ऐप से भुगतान करने के लिए आपको कोई चार्ज नहीं भरना पड़ता। हालांकि बैंक अपने यूपीआइ या आइएमपीएस ट्रांस्फर फीस के चार्जेस ले सकता है।

 

4)- भीम ऐप इस्तेमाल करने के लिए आपके बैंक अकाउंट पर मोबाइल बैंकिंग एक्टिवेडेट होना जरूरी नहीं है। हालांकि आपका मोबाइल नंबर बैंक अकाउंट के साथ रजिस्टर होना चाहिए।

 

5)- भीम ऐप को डाउनलोड करने के बाद आपको अपना मोबाइल नंबर वेरिफाइ करना होता है। इसके बाद ऐप आपसे भीम पिन मांगेगा। इसके बाद आपको उस बैंक का विकल्प चुनना होगा, जिसमें आपका अकाउंट है और ऐप अपने आप बैंक अकाउंट की डिटेल्स ले लेगा।

 

6)- पैसे भेजने के लिए आपको उस शख्स का मोबाइल नंबर डालना होगा, जिसको आप पैसे भेजना चाहते हैं। अगर रिसीव करने वाले शख्स का नंबर भीम या यूपीए पेमेंट पर है तो आप सीधे पैसे भेज सकते हैं। अगर उसका नंबर भीम या यूपीआइ पर नहीं है तो आप बैंक अकाउंट नबर और IFSC कोड के जरिए पैसे भेज सकते हैं।

 

7)- ऐप के जरिए एक बार में अधिकतम 10 हजार रुपये की ही ट्रांजेक्शन की जा सकती है। वहीं, 24 घंटे में यह लिमिट 20 हजार रुपये है।

 

8)- भीम ऐप के जरिए पैसे भेजने और प्राप्त करने के अलावा आप बैंक बैलेंस और ट्रांजेक्शन डिटेल्स भी चेक कर सकते हैं।

 

9)-ग्राहक अपने भुगतान का पता करने के लिए QR कोड भी डाउनलोड कर सकते हैं। व्यापारी दिखाने के लिए इसे प्रिंट भी कर सकते हैं।

 

10)- वर्तमान में भीम ऐप सिर्फ एक ही अकाउंट से लिंक होता है। जब आप अपना अकाउंट बना लेते हैं तो आप अपनी पसंद के बैंक अकाउंट को डिफॉल्ट अकाउंट के रूप में सेट कर सकते हैं। अगर आप दूसरे बैंक अकाउंट को लिंक करना चाहते हैं तो इसके लिए आपको मेन मैन्यू में जाना होगा और अपने बैंक अकाउंट को डिफॉल्ट अकाउंट के रूप में चुन सकते हैं। जो भी पैसे मोबाइल नंबर या पेमेंट एड्रेस से भेजे जा रहे हैं वो सीधे आपके डिफॉल्ट अकाउंट में आ जाएंगे।

 

जानिए पीओएस मशीन के इस्तेमाल

केंद्र सरकार ने नोटबंदी के बाद डिजिटल लेनदेन और कैशलेस सोसाइटी की वकालत की है। इसी बीच नोटबंदी के बाद पीओएस मशीनों के इस्तेमाल में भी काफी इजाफा हुआ है। इन पॉइंट ऑफ सेल मशीनों का इस्तेमाल कैसे होता है? क्या चार्जेस होते हैं? कैसे इस्तेमाल किया जाता है? , अगर आपको भी ऐसी कन्फ्यूजन हैं! तो जानिए उनके बारे में

 

क्या होता है पीओएस टर्मिनल?

दरअसल यह सिर्फ एक मशीन होती है जिसके जरिए ग्राहक और कारोबारी के बीच लेनदेन बिना कैश के पूरा हो जाता है। मशीन में कार्ड स्वैप कर पेमेंट की प्रक्रिया पूरी की जाती है।

 

कैसे लगवाएं पीओएस मशीन?

कोई भी कारोबारी पीओएस मशीन का इस्तेमाल कर सकता है। पीओएस टर्मिनल आप अपने बैंक से ले सकते हैं। बैंक में आपका खाता होना जरूरी है।

 

क्या-क्या होते चार्जेस ?

पीओएस मशीने के लिए आखिरी ग्राहक को अपना कार्ड स्वैप कराने के लिए सामान की तय रकम से ज्यादा भुगतान अमूमन नहीं करना पड़ता। वहीं कारोबारी को इसके चार्जेस भरने पड़ते हैं। यह एक तरह से किराया होता है जो कारोबारी मशीन रखने के एवज में बैंक को देता है।

 

अलग-अलग होते हैं डेबिट और क्रेडट कार्ड के इस्तेमाल के चार्जेस?

जब आप पीओएस के जरिए क्रेडिट या डेबिट कार्ड के जरिए भुगतान करते हैं तो उसके चार्जेस भी अलग-अलग होते हैं। एमडीआर यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट लीमिट के हिसाब से चार्जेस तय किए जाते हैं।

आरबीआइ ने डेबिट कार्ड के लिए एमडीआर लिमिट 2000 रुपये की लेनदेन पर 0.75% और 2 हजार से ज्यादा की लेनदेन पर इसे 1% तय की हैं। क्रेडिट कार्ड पर यह लिमिट 1.5 से 2.5 फीसद तक हो सकती है। हाल ही में नोटबंदी के चलते इन लिमिट्स को कम किया गया था। नई दरों के मुताबिक डेबिट कार्ड पर एमडीआर लिमिट 0.25 फीसद, 1000 रुपये की खरीद पर और 0.5 फीसद हजार और 2 हजार से ज्यादा की लेनदेन पर रखी गई है। यह सीमा 1 जनवरी से 31 मार्च 2017 तक रहेगी।

 

सेटलमेंट क्या होता है?

दरअसल पीओएस से पैसे सीधा कारोबारी के बैंक खाते में नहीं जाते। सेटलमेंट के जरिए बैंक कारोबारी के खाते अपने तय किए गए चार्जेस काट कर रकम को खाते में डाल देता है। यह प्रक्रिया अमूमन रोज दोहराई जाती है।


 

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