Rajashree Production Declared New Project After Three Years of Prem Ratan Dhan Payo

दि राइजिंग न्‍यूज

लखनऊ।

जोश और जज्‍बे से लबरेज सुभाष यदुवंश किसी परिचय के मोहताज नहीं। भाजपा युवा मोर्चा उत्‍तर प्रदेश के प्रदेश अध्‍यक्ष सुभाष ने एक नई लौ जलाई है। युवाओं के बीच उम्‍मीद की ऐसी जगमगाती किरण कि जिसे देखकर नौजवानों में कुछ कर गुजरने का हौसला उफान भरे। यूं ही नहीं प्रदेश के युवा इनके पद चिह्नों पर चलने को बेताब हैं।

 

दायित्‍वों से पूर्ण इतना महत्‍वपूर्ण पद और बेहद सज्‍जन व्‍यक्तित्‍व। बेबाक बोली और गजब के वक्‍ता। सुभाष यदुवंश भाजपा की ऐसी खोज हैं जिससे न केवल नौजवान बल्कि बड़े-बूढ़े भी प्रभावित हैं। कभी न थकने और कभी न थमने वाली विचारधारा के साथ यह युवा नेता भाजपा के द्वारा संपूर्ण विकास के न केवल सपने देखता है बल्कि इस ख्‍वाब को पूरा करने के लिए दिन-रात लगन से मेहनत करने में भी गुरेज नहीं करता।

दि राइजिंग न्‍यूज ने सुभाष यदुवंश से कुछ बातें कीं और जानी उनके पूरे जीवन व अग्रिम लक्ष्‍य की बातें... पेश है उनसे बातचीत के कुछ अंश...

 

सबसे पहले अपने बचपन के बारे में बताइए

मैं गांव से ताल्‍लुक रखता हूं। कक्षा पांच तक की पढ़ाई गांव में ही की। मेरा बचपन ऐसा है कि मैं लकड़ी के पटरे से काटकर काठ (स्‍लेट के आकार का) बनाता था जिस पर खड़िया (चॉक) से लिखा करता था। हम प्राइमरी स्‍कूल में बोरा लेकर जाते थे और उसी पर बैठकर पढ़ते थे। बस्‍ती में मेरे चाचा रहते थे और उन्‍हीं के साथ रहकर मैंने हाईस्‍कूल तक पढ़ाई की। इसके बाद मैं इलाहा‍बाद चला गया। यहां रहकर इंटरमीडिएट किया और इंजीनियरिंग की तैयारी की।

 

पठन-पाठन में आगे

उन दिनों यूपी सीट होती थी, सात इंजीनियरिंग कॉलेज थे। उस समय मेरी ऑल इंडिया रैंक 231 थी, चयन हो गया। मेरे पास आईआईटी लखनऊ, एमएनआरईसी का ऑप्‍शन था लेकिन गोरखपुर मेरे घर के करीब था तो मैंने ट्रिपल एम कॉलेज में दाखिला लिया। इलेक्‍टॉनिक्‍स एंड कम्‍युनिकेशन स्‍ट्रीम से साल 2000 में अपना बी.टेक पूरा किया। ट्रिपल एम अब मदनमोहन मालवीय यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्‍नोलॉजी से जाना जाता है।   

अध्‍यापन से जुड़ा हूं...

मैंने कॉलेज के समय ट्यूशन पढ़ाकर अपना गुजारा किया है। पारिवारिक पृष्‍ठभूमि बहुत मजबूत नहीं थी। रोजमर्रा के खर्चों के लिए अध्‍यापन कार्य करता था। हम दो दोस्‍तों ने मिलकर गार्जियन नामक कोचिंग खोली। यह आईआईटी के लिए बच्‍चों की तैयारी के लिए प्रतिबद्ध थी। दरअसल, उस समय चर्चा थी कि प्राइवेट कॉलेजों में क्‍वॉलिटी एजुकेशन नहीं है, जिसके लिए हमने आईईएस एकेडमी की स्‍थापना की। इंजीनियरिंग के स्‍टूडेंट्स को गुणवत्‍तापरक शिक्षा मिले यही हमारा उद्देश्‍य था।

 

आपका राजनीति में आना कैसे हुआ? परिवार में कोई था या कोई दोस्‍त?

नहीं नहीं, मेरे परिवार का दूर-दूर तक राजनीति से किसी का लेना-देना नहीं था। हालांकि मैं बचपन से ही उस ओर अग्रसित था। संघ कार्यालय मेरे घर से थोड़ी दूर पर ही था तो उत्‍सुकतावश मैं वहां जाता रहता था। दोस्‍तों के साथ खेल में प्रतिभाग करने या खेलते-खेलते वहां चले जाना, फिर कार्यालय में बैठना और वहां सभी से बात करना। जाने क्‍यों, पर मुझे वहां जाकर समय व्‍यतीत करना बेहद अच्‍छा लगने लगा। जैसे कि कुछ पुराना नाता हो। इसके बाद मैं विद्यार्थी परिषद से जुड़ा। जब राम मंदिर आंदोलन हुआ उस वक्‍त हम काफी छोटे थे लेकिन बस्‍ती के बहुत सारे स्‍कूलों को जेल बना दिया गया था। हम तब भी साधु-साध्‍वियों का भाषण चुपचाप सुनते थे। करीब 9-10 साल की उम्र में हमारे अंदर अजीब सा जज्‍बा आ गया था।

 

एबीवीपी से परिचय...

कॉलेज के दौरान मेरा एबीवीपी से परिचय हुआ। हम गंभीर रूप से एबीवीपी की वर्किंग में रहे हैं। कॉलेज की पहली एबीवीपी यूनिट भी हम ही ने गठित की। कुसुमलता जी, विधायक राधामोहन दास अग्रवाल और मुरली मनोहर जोशी जी जैसे दिग्‍गज नेताओं को बुला कर हमने प्रेजेंटेशन कार्यक्रम किया। 

पहली बार राष्‍ट्रीय कार्य समिति में शामिल हुआ

2005 के बाद हम राष्‍ट्रीय कार्य समिति से जुड़े। उस समय माननीय धर्मेंद्र प्रधान जी राष्‍ट्रीय उपाध्‍यक्ष थे। मेरा जुड़ाव संगठन से तो था ही। किसी न किसी अभियान से जिला-क्षेत्र-प्रदेश स्‍तर पर हम जुड़े ही रहते थे। ऐसे हमने चार साल तक कार्य किया। धर्मेंद्र प्रधान जी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष बनने के बाद उन्‍होंने मेरा नाम रार्ष्‍टीय कार्य समिति के लिए प्रस्‍तावित किया और तब मैं यहां का हिस्‍सा बना। उस समय हम तीन लोग कार्य समिति में साथ गए थे। हरीश द्वेदी जो बस्‍ती से एमपी हैं, राहुल लखन पाल जो सहारनपुर से एमपी हैं और मैं सुभाष यदुवंश। सुभाष यदुवंश की उपलब्धियों में राष्‍ट्रीय पदाधिकारी, मुख्‍यालय प्रभारी व उत्‍तराखंड प्रदेश के प्रभारी भी गिना जाता है। जब अनुराग ठाकुर राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष बने तो भी वह उनके साथ राष्‍ट्रीय कार्यसमिति में रहे।

 

विभिन्‍न अभियानों से जुड़े रहे...

ज़मीन से भाजपा में कार्य करने वाले सुभाष शुरुआत में किसी पद पर नहीं रहे लेकिन, कई अभियानों का नेतृत्‍व किया है। वह फख्र से कहते हैं, कि राजनीति मेरे लिए कोई करियर नहीं है। यह सेवा है और सेवा में पद का क्‍या काम? उनका मानना है कि आज भी ऐसे कई लोग हैं जो वर्षों से पार्टी के लिए काम कर रहे हैं, लेकिन उनकी कोई पोस्‍ट नहीं। यही लोग पार्टी की बैकबोन होते हैं।

 

पूरे प्रदेश से सदस्‍यों की जिम्‍मेदारी थी, भरपूर निभाई

सुभाष के जुझारूपन से प्रभावित पार्टी की ओर से उन्‍हें नई जिम्‍मेदारी दी गई। वह 2011-12 से प्रदेश स्‍तर पर आए। शिक्षण संस्‍थाओं में पूरे प्रदेश में सदस्‍यता उनके जिम्‍मे थी। यह एक बहुत बड़ा दायित्‍व था। 2014 के बाद बीजेपी का एक मेंबर ड्राइव हुआ था, जिसमें यह दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। इसमें मिस्‍ड कॉल करके पार्टी का मेंबर बनना था। यूपी से सबसे ज्‍यादा सदस्‍य बने थे। यह एक बहुत बड़ी सफलता थी। इसके लिए हमने भरपूर कार्य किया। 2015 में मैंने पिछड़ा वर्ग सम्‍मेलन, परिवर्तन रथ यात्रा जैसे अभियानों में हिस्‍सा लिया।

कार्य और भी हैं...

हमने दीनदयाल उपाध्‍याय जन्‍म‍सती सामान्‍य ज्ञान प्रतियोगिता कराई जिसमें 16 लाख बच्‍चों ने भाग लिया। यह दुनिया में किसी गैर राजनीतिक संस्‍था द्वारा कराई जाने वाली पहली प्रतियोगिता थी। इसके अलावा विधानसभा चुनाव से पहले 2 जनवरी 2017 को हमने मोदी जी की रैली आयोजित की थी। क्‍या खूब जनसैलाब उमड़ा था। अभी भी याद कर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। ऐसे ही पार्टी ने मुझे कई अभियानों का नेतृत्‍व करने का मौका दिया। उसके बाद अभी पार्टी ने मुझे नए गठन में युवा मोर्चा का अध्‍यक्ष बनाया।            

 

युवा मोर्चा का लक्ष्‍य क्‍या है? कहां तक पहुंचाएंगे इसे?

  • जोश से लबरेज सुभाष कहते हैं कि एक लाख 60 हजार बूथों पर हमारी विचार धारा से प्रशिक्षित एक ऐसा युवा विंग बनाकर हम पार्टी को देना चाहते हैं, जो किसी भी राजनैतिक कार्यक्रम या सरकार की नीतियों को प्रभावी व तीव्र गति से जन-जन तक पहुंचा सके। ये हमारा सपना है और इस पर हम लगातार काम कर रहे हैं।

 

  • फरवरी के पहले हफ्ते मैं मोर्चा अध्‍यक्ष बना और तबसे हर महीने प्रदेश स्‍तर पर दो प्रोग्राम का एवरेज लेकर कर रहे हैं। डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती के मौके पर हमने पूरे प्रदेश में अंबेडकर शोभा यात्रा निकाली, जिसमें 92 रथों का प्रयोग किया गया। हालांकि पांच जिलों में यह यात्रा पुलिस के कुछ कारणों की वजह से नहीं निकल पाई।

युवा मोर्चा द्वारा किए गए कार्य

  • हमने पोखरण परमाणु परीक्षण की वर्षगांठ पर प्रदर्शनी लगाई, जिसका नाम रखा- “परमाणु शक्ति से महाशक्ति भारत और अटल से मोदी युग”। इसमें अटल जी की और मोदी जी की योजनाओं की प्रदर्शन लगाई और इसके ठीक पीछे हॉल में युवा शक्ति सम्‍मेलन किया, ऐसा हमने यूपी 92 जिलों में किया। सभी जगह बीजेपी के अलग-अलग लीडर्स इस सम्‍मेलन को नेतृत्‍व दे रहे थे, लेकिन कार्यक्रम पूरा युवा मोर्चा का था। हमने युवा रोजगार शिविरों का आयोजन किया। जिसमें स्किल इंडिया के अधिकारियों को बुलाया गया और उनके साथ कंबाइन करके हमने दो लाख युवाओं को सिविल तक पहुंचाया, जिसमें 55 हजार लोगों को या तो मुद्रा लोन से लोन दिया गया या तो उन्‍हें जॉब का सर्टिफिकेट दिया गया। रक्षाबंधन के मौके पर हमने प्रदेश के 92 जिलों महिलाओं के लिए एक घंटे का मार्सलआर्ट ट्रेनिंग कैंप का आयोजन किया।

 

  • वहीं, स्‍वच्‍छता अभियान के तहत हमने कै‍टेगारइज्‍ड करके पहले 1200 प्राथमिक विद्यालयों की सफाई की, प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र, रेलवे व बस स्‍टेशन, शहीदों की मूर्तियों और ऐतिहासिक जगहों की सफाई की। हमने स्‍वच्‍छता का भव्‍य मार्च निकाला जिसमें प्रदेश के करीब तीन लाख से ज्‍यादा लोगों ने भाग लिया। उन्‍होंने बताया कि हर जिले में हमने स्‍वच्‍छता अभियान का एक अंबेसडर बनाया था।

 

 

रोजगार के बारे में जानकारी

रोजगार के बारे में बताते हुए उन्‍होंने कहा कि हमारी सरकार ने बुंदेलखंड में डिफेंस कॉरिडोर दिया, जो किसी ने सोचा भी नहीं। उत्‍तर प्रदेश में भारत का सबसे बड़ा इंवेस्‍टर्स सम्मिट किया गया और सिर्फ चार महीने में 60 फीसदी चीजों को जमीन पर उतार कर दिखाया, जिसमें पैसा भी आ रहा है और उनका काम भी शुरू हो गया। पुलिस और शिक्षा विभाग में भर्तियां आई हुई हैं। स्किल इंडिया, प्रधानमंत्री कौशल रोजगार योजना और उत्‍तर प्रदेश कौशल रोजगार योजना के माध्‍यम से लाखों लोगों को प्रशिक्षित करके उनको जॉब सर्टिफिकेट दिए गए। वहीं, मुद्रा लोन योजना के अंतर्गत पूरे भारत में 10 लाख करोड़ से ज्‍यादा का लोन दिया गया, जिसमें सबसे ज्‍यादा लोन यूपी से है। वहीं, स्‍टार्टअप इंडिया, स्किल इंडिया, डिजिटल इंडिया, मुद्रा लोन जैसी योजनाओं से मोदी सरकार लगातार रोजगार पैदा करने के प्रयास के साथ-साथ रोजगार भी दे रही है।

 

युवाओं के विकास के मुद्दे पर बात             

युवाओं के विकास की प्राथमिकताओं के बारे में बताते हुए उन्‍होंने कहा कि पहली- उन्‍हें क्‍वालिटी एजुकेशन मिले। दूसरी- उनको ऐसी शिक्षा मिले, जिससे आगे उनकी आर्थिक स्‍वतंत्रता लाने में मदद करें। तीसरी प्राथमिकता के बारे में उन्‍होंने कहा कि हम भारत में युवाओं के लिए अवसर के अनंत आयामों को विकसित करना चाहते हैं।

 

एक अद्भुत सफलता

सुभाष यदुवंश यूं तो भाजपा के सेवक हैं। प्रदेश की चंद राजनीतिक पार्टियां जो कि स्‍वयं को यादवों का हितैषी बताती हैं से भी यादव कुन्‍बा अब टूट कर भाजपा में मशाल लेकर पहुंच रहा है। यह वर्ग सुभाष को अपने नए नेता के तौर पर देख रहा है।

 

(कई नए कीर्तिमान गढ़ने के लिए सुभाष यदुवंश तैयार हैं और उनके साथ है युवाओं का भयंकर जनसैलाब...)

 

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