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दि राइजिंग न्‍यूज

लखनऊ।


एक छात्र डॉक्‍टर बनने के सपनें लेकर गांव से शहर आया। वह अमेरिका और रूस जैसे देशों से एमबीबीएस डिग्री हासिल करना चाहता था लेकिन मार्गदर्शन ना मिलने के कारण उनके सपने बिखर गए। हालांकि उसने इस कमी को खुद पर हावी नहीं होने दिया और उन लोगों के लिए नई राहें बनाने का प्रयास करने लगा जो उसी की जैसी स्थितियों से गुजरने वाले थे। इन छात्रों के सपनों को हकीकत में बदलने के लिए उसने एक संस्‍था खोली जो उन्‍हें विदेश से एमबीबीएस की डिग्री हासिल करने में मददगार साबित हो। अब यहां से सैकड़ों छात्र अपनी मंजिल तक पहुंच रहे हैं। यह कोई फिल्‍मी कहानी नहीं बल्कि एक हकीकत है। प्रतापगढ़ के रहने वाले अजय कुमार गुप्‍ता ने संघर्षों के साथ इस हकीकत को जिया और दूसरे छात्रों के मार्गदर्शन के लिए हजरतगंज में ईडू कैरियर लाइफ सर्विस नाम से एक संस्‍था खोली। यहां से वह केवल छात्रों को विदेश ही नहीं भेज रहे बल्कि देश से ही एमबीए, बीबीए, एमसीए जैसे प्रोफेशनल कोर्स भी कराने में मदद कर रहे हैं।


कम बजट में एमबीबीएस की विदेशी डि‍ग्री

एमडी अजय कुमार गुप्‍त के अनुसार विदेशों से बेहद कम बजट में एमबीबीएस किया जा सकता है। रूस में जहां 13 लाख रूपये और चीन में 10 लाख रुपये, कजाखस्‍तान, फिलीपींस, मलेशिया जैसे देशों में भी इसी बजट के आधार पर डिग्री ली जा सकती है। सर्विस एब्राड के जरिए अधिकतर छात्र रूस, फिलीपींस जाना अधिक पसंद करते हैं। क्‍योंकि यहां पर भारतीय लोगों और छात्रों की संख्‍या अधिक है। इसलिए उन्‍हें अपने देश जैसा ही माहौल मिल जाता है।


प्रवेश के लिए शैक्षिक योग्‍यता

विदेश के विश्‍वविद्यालय में प्रवेश लेने के लिए कम से कम 17 वर्ष की आयु होनी चाहिए। कोई भी छात्र जो 12वीं में 50 प्रतिशत अंकों से उत्‍तीर्ण हुआ है वह विदेशी विश्‍वविद्यालय से शिक्षा ग्रहण कर सकता है। हालांकि आरक्षण प्राप्‍त छात्रों के लिए छूट का प्रावधान भी है। उन्‍हें 40 प्रतिशत अंकों से पास होना अनिवार्य है। किसी भी छात्र की आयु कम से कम 17 वर्ष होनी चाहिए।


इन देशों से एमबीबीएस की डिग्री

लाइफ सर्विस के माध्‍यम से रुस, बेलारूस, फिलीपींस, चीन, बांग्‍लादेश, किर्गिस्‍तान, कजाखस्‍तान, मॉरीशस जैसे देशों के विश्‍वविद्यालय से छात्रों को एमबीबीएस की डिग्री दिलाई जा रही है। अब तक 200 से अधिक छात्र कई देशों में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इनमें रूस के 37 विवि, चीन के 40 विवि, फिलीपींस के 06, किर्गिस्‍तान के 05 और कजाखस्‍तान के 02 विवि व अन्‍य विवि-कॉलेजों शामिल हैं।


एक ही छत के नीचे सारी सुविधा

कैरियर लाइफ सर्विस छात्रों को बजट के अनुसार विदेशों में बहुत सारी सुविधा देता है। जैसे विदेशी विवि में प्रवेश लेने के लिए ना तो डोनेशन देना होता है और ना ही एंट्रेंस। भारतीय खाने से लेकर अभिभावकों के आने-जाने तक पूरा ध्‍यान दिया जाता है। वीजा पासपोर्ट और समय समय पर छात्रों की मॉनिटरिंग भी की जाती है। इसके लिए एमडी खुद विदेशों में जाकर छात्रों से मिलते हैं और उनकी समस्‍या का समाधान करते हैं। इतना ही नहीं छात्र जब पढ़ाई पूरी करके लौटता है तो यहां पर उसे इंट्रेनशिप भी मुहैया कराई जाती है।


एमसीआई स्‍क्रीनिंग परीक्षा

विदेश से एमबीबीएस की डिग्री लेने के बाद छात्र की एमसीआई स्‍क्रीनिंग परीक्षा होती है। यहां पर पूछे गए सभी प्रश्‍न वैकल्पिक होते हैं। इसमें छात्र को 50 प्रतिशत अंक लाने अनिवार्य होते हैं। इसके बाद कोई भी छात्र सरकारी डॉक्‍टर बन सकता है। इसके साथ ही साथ एम्‍स, अपोलो जैसे अस्‍पताल में भी नियुक्ति मिल जाती है।


सामान्‍य परिवार से हैं अजय कुमार गुप्‍ता

प्रतापगढ़ के छोटे से गांव पट्टी में रहने वाले अजय कुमार गुप्‍ता बेहद सामान्‍य परिवार से हैं। उन्‍होंने गांव से ही अपनी प्राथमिक पढ़ाई पूरी की। इसके बाद वह दीवानगंज से इंटर की परीक्षा किया और फिर फैजाबाद विश्‍वविद्यालय से स्‍नातक की डिग्री ली।


सपना टूटा तो दूसरों को दिखाई राह

2011 में इंटर की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह डॉक्‍टरी की पढ़ाई के लिए अमेरिका, मॉरीशस, रूस जाना चाहते थे। अपने बजट के अनुसार वह कैरियर काउंसलरों के चक्‍कर लगाते रहे लेकिन कहीं से भी उन्‍हें सफलता हाथ ना लगी। इतना ही नहीं उचित मार्ग दर्शन तक कोई देने को तैयार नहीं था। इस स्थिति में जब उनका सपना टूटा तो अजय कुमार ने दूसरे छात्रों के साथ ऐसा ना होने देने का बीड़ा उठाया। 2015 में उन्‍होंने ईडू कैरियर लाइफ सर्विस नाम से कार्यालय खोला और एमबीबीएस करने वाले छात्रों के लिए बेहतर माहौल दिया।

 


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