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परिवार के सपोर्ट से आज यहां तक पहुंची हूं: रोशनी

Personality | 09-Mar-2017 | Posted by - Admin
  • लुक, लक और लिंक ये तीन चीजों के काफी मायने हैं


   
i got success with the support of my parents says actress roshni

दि राइजिंग न्‍यूज

प्रशंसा आर्या

पिता को मेरा डांस करना और थिएटर करना बिल्‍कुल पसंद नहीं था पर मम्‍मी ने साथ दिया तो हौसला और बुलंद हो गया। ये शब्‍द महज 21 साल की लड़की के हैं जिसने अपनी शुरुआत एक डांस ट्रूप में डांसर से की लेकिन आज वो स्‍टार प्‍लस के सबसे बड़े सीरियल मेरे अंगने में बतौर एक्‍टर की भूमिका में है। हम बात कर रहे हैं लखनऊ में जन्‍मी रोशनी की, जिन्‍होंने कई सीरियल्‍स में अभिनए कर अपनी पहचान बनाई।

दि राइजिंग न्‍यूज को दिए एक एक्‍सक्‍लूसिव इं‍टरव्‍यू में रोशनी ने बताया कि कैसे पापा से डर-डर कर उन्‍होंने ये मुकाम हासिल किया और हां साथ ही ये भी बताया की अगर आपको सीरियल में एक्‍टिंग करनी है तो क्‍या जरूरी बातें हैं जो ध्‍यान में रहनी चाहिएं-

 

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क्‍या परिवार ने आप को सपोर्ट किया

नहीं.. हमारी मम्‍मी ने हमें सपोर्ट किया पर पिता ने कभी नहीं किया। हम उनसे हमेशा डरते रहे। पर अपनी उम्‍मीद नहीं छोड़ी और आज मैं एक सफल मुकाम पर हूं।

 



मुंबई में लखनऊवासियों की क्‍या स्थिति है

लखनऊ के लोगों की मुंबई में अलग ही पहचान है। वहां पर हम लखनऊवासियों को नवाबों की तरह समझा जाता है। तहजीब के लिए लखनऊ वैसे ही मशहूर है। यही धारणा मुंबई में हमारे लिए प्रचलित है। मैं जब पहली बार मुंबई गई तो लोगों ने मुझसे लखनऊ के मुजरे, नवाबों की कोठियों के बारे में पूछना शुरू कर दिया।

अब समय बदल रहा है हां पहले यूपी के लोगों को मुंबई वासी पसंद नहीं करते थे पर अब ऐसा नहीं है वे काफी सपोर्टिव हैं। मुझे भी यहां काफी सपोर्ट मिला।

 

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पूरा-पूरा दिन ऑडिशन में बीतता था

मैंने हर दिन दो से तीन जगह सीरियल्‍स के ऑडिशन दिए। कोई दिन ऐसा नहीं जाता था जब मैं खाली बैठूं। कभी एक दिन में दो बार तो कभी चार बार पूरा दिन मेरा ऑडिशन देते ही बीतता था। फिर एक मुक्षे मेरा पहला ब्रेक मिला।


आपको पहला सीरियल कब मिला था

मेरा पहला सीरियल इस प्‍यार को क्‍या नाम दूं था जो 2011 में ऑन एयर हुआ। उसमें मैंने लीड एक्‍ट्रेस कुशी कुमारी गुप्‍ता की दोस्‍त का किरदार निभाया था।

 

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सीरियल में कास्टिंग काउच की सर्च्‍चा

मुंबई में कास्टिंग काउच एक आम बात हो गई है, लेकिन हां ये सारी हरकतें वही लोग करते हैं जो फेक हों। कोई भी अच्‍छा डाइरेक्‍टर ऐसा बिल्‍कुल नहीं करता। ये आपके ऊपर डिपेंड करता है कि अगर आपके सामने ऐसी सिचुएशन आए तो आप उसका सामना कैसे करेंगे।

 

एक एक्‍टर बनने के लिए क्‍या होना जरूरी है

कॉफिडेंस लेवल अच्‍छा होना चाहिए। अपने ऊपर और अपने काम पर विश्‍वास होना बहुत जरूरी है। वहां आपको कई बार निराशा हाथ लगेगी पर हिम्‍मत न तोड़ें। एक्‍टिंग तो करते-करते आ ही जाती है। अगर अगर एक एक्‍टर बनना चाहते हैं तो थिएटर आपका प्‍लस प्‍वाइंट होगा। आप एक्टिंग तो सीख सकते हैं पर कैमरे में पोज देना आपको थिएटर ही सिखाएगा। आज के समय में कोई नहीं चाहता की वो किसी फ्रेशर को रोल दे, सब की मांग है की एक्‍टर को कैमरे का ज्ञान हो जो आपको सिर्फ थिएटर ही सिखा सकता है।

 

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शूट में होने के बावजूद भी आप अपनी फीगर और डाइट का कैसे ध्‍यान रखतीं है

सच बताऊं तो शूट और फिगर को मैनेज करना काफी मुश्‍किल हो जाता है। मैं सुबह पांच बजे उठती हूं इसके बाद जॉगिंग करती हूं फिर थोड़ी देर एक्‍सरसाइज। इसके बाद तुरंत शूट के लिए तैयार होकर निकल जाती हूं। शूट खत्‍म होते-होते 9:30 हो जाता है और घर पहुंचते हुए 10:30 बज जाते हैं। बेहद हेक्टिक होती है हमारी दिनचर्या।

मैं खाने-पीने का बिल्‍कुल ध्‍यान नहीं रख पाती हूं। प्रॉपर खाना तो जैसे मैं भूल चुकीं हूं। खाने में कार्ब्‍स तो बिल्‍कुल बंद है। इस लिए हम फ्रूट्स और सैलेड जरूर खाते हैं। समय की कमी की वजह से प्रॉपर डाइट नहीं ले पाती हूं। लेकिन बॉडी को मेनटेन रखने के लिए प्रोटीन और न्‍यूट्रिएंट्स सप्‍लीमेंट जरूर लेती हूं, जिससे मेरी बॉडी पर कोई एफेक्‍ट न पड़े।

 

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शूट में उलझे रहने के बाद क्‍या आप मुंबई की नाइट लाइफ इंज्‍वाए कर पाती हैं

बिलकुल इंज्‍वाए करते हैं। दिन भर शूट में हम काफी थक जाते हैं और दिमागी थकान को दूर करने के लिए थोड़ा घूमना बहुत जरूरी है। इसके अलावा कभी-कभी हम मुंबई की सड़कों पर भी किनारे बैठते हैं। रोड साइड पर घूमते हैं, फ्रेंड्स के साथ फुटबॉल खेलते हैं।

मुंबई की नाइट लाइफ लड़कियों के लिए सेफ है अगर आपको भी रात में घूमने का मन हो तो बीच का किनारा काफी अच्‍छा रहेगा। बीच में रात को काफी शोर-गुल रहता है तो ये कहीं से भी लड़कियों के लिए अनसेफ नहीं है।

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