Thugs of Hindostan Katrina Kaif Look Motion Poster Released

दि राइजिंग न्‍यूज

आउटपुट डेस्‍क।

 

वह सबकी बातों पर गौर फरमाती हैं...एक-एक लफ्ज को ध्‍यान से सुनती हैं...और जब खुद बोलती हैं तो उनकी बातों में एक चुंबकीय आकर्षण झलकता है। एक शानदार वक्‍ता हैं आयशा अयूब। सबसे अंत में सबसे दमबार बोलने वालों में से हैं आयशा। ब्‍यूटी विद ब्रेन का जीताजागता उदाहरण। जिंदादिल, चहकती और अपनी शर्तों पर जीने वाली खास शख्सियत हैं यह। बीते एक साल में जिस तरह से उन्‍होंने सोशल मीडिया के माध्‍यम से अपनी पहचान स्‍थापित की है वह काबिलेतारीफ है। केवल ऑनलाइन ही नहीं ऑफलाइन यानि रियल वर्ल्‍ड में भी आयशा अब एक जाना-माना नाम हैं। वह दो ग्रुप की संचालिका हैं- लखनऊ सुपर मॉम्‍स और मुखातिब-उर्दू प्रेमियों के लिए। अपने नाम से इन ग्रुप के बारे में स्‍वत: ही समझा जा सकता है।

 

लखनऊ सुपर मॉम्‍स में लखनऊ से जुड़ी महिलाएं आमंत्रित हैं। इसके माध्‍यम से एक दूसरे से जुड़कर आपस में मदद करते हैं। वहीं मुखातिब उनके लिए एक बेहतरीन जगह है जो उर्दू और शा‍यरियों के शौकीन हैं। 3500 से ज्‍यादा सदस्‍यों वाला मुखातिब अब एक रजिस्‍टर्ड एनजीओ है। एक समय में कई चीजों पर ध्‍यान देने और काम करने का हुनर ही आयशा को अलग बनाता है।

वह उन तमाम महिलाओं के लिए एक प्रेरणा हैं जिन्‍होंने अपने अंदर की प्रतिभाओं को ही खत्‍म कर लिया है। घर-परिवार बहुत जरूरी है लेकिन खुद की जिंदगी जीना भी उतना ही जरूरी है। अपने परिवार का जिक्र करते हुए आयशा बताती हैं कि उनके दो बच्‍चे हैं, पति डॉ अहमद अयाज़ ऑरथोपैडिक सर्जन हैं। वह यह कहना नहीं भूलीं कि ऐसा परिवार मिलना मेरी खुशकिस्‍मती थी। सबसे प्‍यारी बात यह कि आयशा के माता पिता भी नजदीक ही रहते हैं। इसलिए वह ज्‍यादा फिक्र नहीं करती।

चलिए आयशा को और करीब से जानते हैं-

 

आयशा अब तक कहां थीं? लिखना और सोशलाइजिंग की शुरुआत कब से की?

जब मैं छोटी थी, तो ज्‍यादा बातचीत करना पसंद नहीं करती थी। चुपचाप मिजाज था। आप कह सकते हैं कि आत्‍मविश्‍वास की कमी थी। कॉलेज में जाकर मेरी शख्सियत का ये पहलू मुझे पता चला, कि मैं लोगों के साथ हिल-मिल भी सकती हूं। अब मैं खुद को इम्तियाज़ अली की फिल्‍म तमाशा से रिलेट कर सकती हूं जहां लीड एक्‍टर के पर्सनैलिटी के दो चेहरे थे। इतने साल तक मैं लोगों को जो उम्‍मीद थी वैसे बिहेव करती आई हूं। मुस्लिम परिवार की सबसे बड़ी बेटी होने के नाते मुझसे उम्‍मीद की जाती कि मैं दायरों में रहूं। चुप रहूं। सीखूं और अपने दायित्‍वों को निभाऊं। मुझमें दरअसल क्‍या-क्‍या छिपा है ये तो मैं जान ही नहीं पाई। अब जो गुण मुझमें आ गए वह इसलिए आए क्‍योंकि मैंने आने दिए। जैसे जैसे समय बीता मैं उन चीजों पर ध्‍यान देने लगी जिनसे मैं प्‍यार करती हूं। नतीजा आपके सामने है-मुखातिब, मेरी एनजीओ जो लखनऊ में उर्दू और शायरी को बढ़ावा देने का काम कर रही है। मुझे कुछ ऐसा करना था जो मेरे अंदर हमेशा से था, और वह है कविताएं-शेर ओ शायरी, मैं हमेशा से एक कवि ही थी, एक लेखक और एक स्‍टोरी टैलर।

 

अपने बचपन और स्‍कूल के दिनों के बारे में बताइए?

मुंबई और साउदी में मेरा बचपन बीता। मेरा परिवार थोड़ा कंसरवेटिव था और अरब के नियमों के मुताबिक मुझे क्‍लास आठ और नौ में बुर्का पहनना होता था। इसके बाद हम भारत आ गए और पोस्‍ट ग्रैजुएशन के बाद ही मेरे शादी करवा दी गई। खुदा का शुक्र है कि मेरे पति हमेशा ही मेरे लिए सर्पोटिव रहे। मैं थोड़ी मस्‍तमौला हूं और मुझे इस बात का फख्र है कि अपने हक के लिए मैं लड़ना भी सीख गई।

अपने परिवार के बारे में कुछ बताईए?

मैं और मेरे पति डॉ. अयाज़ एक दूसरे से बहुत जुदा हैं। मैं चहकती हुई, मौजी टाइप की हूं। पर अयाज़ चुपचाप रहने वाले गंभीर किस्‍म के व्‍यक्ति हैं। वह अपने काम के प्रति बहुत समर्पित हैं और उनकी ये बात मुझे बहुत अच्‍छी लगती है। ऑरथोपैडिक्‍स उनका पहला प्‍यार है। हालांकि शादी के कुछ शुरुआती सालों में उनकी व्‍यस्‍तता को लेकर मैं खुद को थोड़ा लेफ्ट आउट महसूस करती थी पर दिलचस्‍प बात ये है कि आठ साल बाद हम दोनों को एक कॉमन चीज़ मिल गई है, वो है पोएट्री। मैं हैरान हुई ये जानकर कि वे भी कविताओं का शौक रखते हैं। उन्‍होंने उर्दू मीडियम से तालीम ली है तो जाहिर है कि वे मुझसे बहुत‍ बेहतर हैं। मैं उनकी गज़लें पढ़कर हमेशा चौंक जाती हूं। बच्‍चों की बात करें तो मेरे दो बेटे हैं, आसिम और अली। दोनों एक दूसरे से बहुत अलग। आसिम जेंटलमैन है तो अली बेहद शैतान। ये तीनों मेरी लाइफलाइन हैं।

 

ब्‍लॉगिंग और पोएट्री के अलावा आप क्‍या करती हैं?

ट्रैवलिंग का शौक है। जैसा मैंने बताया कि अयाज़ अपने काम में बिजी रहते हैं। तो मैं अकसर लड़कियों के साथ घूमने निकल जाती हूं। यकीन मानिए, हम इतनी मस्‍ती करते हैं कि इससे अच्‍छा कुछ हो ही नहीं सकता। पिछले साल हम गोवा गए थे और इस साल भी। घूमना तो मुझे इतना पसंद है कि मैंने ट्रैवल इंडस्‍ट्री में फ्रीलांस जॉब भी शुरू की है। मैं ट्रैवलिंग की पूरी गणित सीखना चाहती हूं। कभी मौका मिले तो दुनिया घूमूंगी। इसके अलावा थिएटर भी पसंद है मुझे। कॉलेज के दिनों में करती थी। और ये बात बहुत ही कम लोगों को पता है कि नेटफ्ल्क्सि सीरीज़ में मैं कैमियो रोल के लिए चुन भी ली गई थी। अगस्‍त के पहले हफ्ते हमें शूट के लिए जाना था पर कुछ वजहों से मुंबई के एक दूसरे एक्‍टर ने मुझे रिप्‍लेस कर लिया पर मुझे इसका दुख नहीं है। खुशी है कि कम से कम मेरी प्रतिभा पहचानी गई।

महिलाओं के लिए कोई संदेश?

हां, मैं महिलाओं से कहूंगी कि खुद के लिए जीना सीखो। थोड़ा मुश्किल है लेकिन कोशिश करो। अपनी खूबियों और हुनर को पहचानों और जुट जाओ उनके पीछे। दुनिया बहुत खूबसूरत है और यहां बहुत कुछ है करने के लिए।

 

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