Neha Kakkar First Time Respond On Question Of Ex Boyfriend Himansh Kohli

दि राइजिंग न्यूज़

लखनऊ।

“हम बच्चों को विदेश जीतने के काबिल बनाते हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ बच्चों को ही नहीं बल्कि माता-पिता को भी शिक्षित करना है। यही तो है जय जगत...यानि विश्व की जीत। ऐसा कहना है सिटी मांटेसरी स्कूल (सीएमएस) की संस्थापक निदेशिका डॉ. भारती गांधी का। दि राइजिंग न्‍यूज के संवाददाता से वह रूबरू हुईं और अपने मिशन को लेकर खुलकर बात की।

83 वर्षीय भारती गांधी का जज्‍बा देखने लायक है। उम्र के इस पड़ाव में भी गजब का उत्‍साह। हाल ही में उन्‍हें केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह द्वारा देवी अवार्ड से सम्मानित भी किया जा चुका है। बच्चों के भविष्य व महिला सशक्तिकरण के लिए वह तत्‍पर हैं।

देवी अवॉर्ड के बारे में

मेरा मानना है कि लड़कियों को लड़कों से कम नहीं आंका जाना चाहिए। इसीलिए शुरुआत से ही महिला सशक्तिकरण पर काम करती आई हूं। समाज में उन्‍नति चाहिए तो बेटियों को शिक्षित करना बेहद जरूरी है। मेरा मानना है कि लड़कियां जितनी ज्यादा शिक्षित होंगी समाज उतना ही ज्यादा उन्नति करेगा। लड़कियों को लायक बनाना और महिलाओं को अवगत कराना ही मेरा लक्ष्य है। सरकार ने मेरे इस प्रयास को सराहा और इसीलिए मुझे देवी अवॉर्ड से सम्‍मानित किया है।

पढ़ाने का दायित्‍व और समाजसेवा में तालमेल

डॉ. गांधी बड़े सलीके से पढ़ाने और समाजसेवा में संतु‍लन बना लेती हैं। उनका मानन है कि, कर्म ही धर्म है। उन्‍हें काम करने से संतुष्टि मिलती है। संतुलन अपने आप हो जाता है। इसके लिए माथा-पच्ची नहीं करनी पड़ती। “मेरी दिनचर्या शुरू से ही ऐसी है। मैं सुबह पांच बजे उठ कर योग करती हूं। स्कूल में विद्यार्थियों विशेष प्रोग्राम आयोजित होता है, उसमे मैं बच्चों को प्रशिक्षित करती हूं। इसके साथ-साथ महिलाओं से संबंधित मुद्दों पर विचारविमर्श कर हर संभव मदद देने का प्रयास करती हूं।“

पौध रूपी बच्‍चों को सींच रहा है सीएमएस

बच्चों की जिंदगी को मां-बाप महत्वपूर्ण बनाते हैं। पौधे के जैसे बच्चों को माता-पिता प्यार और लाड़ से बड़ा करते हैं। सीएमएस भी यही कर रहा है। सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, सीएमएस बच्चों के ओवरआल डेवलपमेंट पर भी बहुत काम करता है। हमारे यहां से बच्चा समाज में अपनी जगह बनाने का लक्ष्य और इरादा लेकर ही निकलता है। हम हर एक स्टूडेंट में इतना आत्मविश्वास भर देते हैं जिससे वो समाज के हर पड़ाव को बेखौफ तरीके से पार करे। स्‍टेज पर आने के भय को मिटाने के लिए हम अपने हर छात्र को महीने में एक बार स्‍टेज पर लाते हैं। इससे उसके अन्दर का कॉन्फिडेंस बाहर आता है। हिंदी भाषा के साथ-साथ हम एक इंटरनेशनल लैंग्वेज भी सिखाते हैं। इससे बच्चा अपने आप को हर एक मंच पर प्रेजेंट करने के लायक हो जाता है। सीएमएस की इस प्रणाली को अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी सराहा गया है।"

शिक्षा के क्षेत्र पर भी ध्‍यान दे सरकार

"सरकार से हमें बस इतना कहना है कि देश की सैन्य शक्ति बढ़ाने के साथ शिक्षा के क्षेत्र में भी ध्यान दे। हथियार से ज्यादा जरूरी कलम है।"  

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