Actress Jhanvi kapoor  Shares The Image of Dhadak Sets on Social Media

दि राइजिंग न्यूज़

आउटपुट डेस्क।

 

भारत में किन्नरों का काम शुभ मौकों पर लोगों के घरों पर जाकर बधाई देने से लेकर ट्रेनों, बसों, दुकानों में लोगों से पैसे मांगकर गुजारा करने तक का ही माना जाता है। लेकिन मायानगरी मुंबई का एक रेस्टोरेंट किन्नरों की जिंदगी में अलग तरह से बदलाव ला रहा है। इसके पीछे सोच है कि उन्हें भी समाज की मेनस्ट्रीम में शामिल किया जा सके। “थर्ड आई” नाम के इस कैफे में फिलहाल छह किन्नरों को नौकरी दी गई है। इस कैफे में किन्नर ही कस्टमर्स को खाना परोसते हैं। किचन संभालने की जिम्मेदारी भी इन पर है। इस कैफे में कुल 20 इम्पलॉई है।

कस्टमर्स से केवल हिंदी भाषा का इस्तेमाल

कैफै के मालिक निमेश के मुताबिक, "हमने तय किया है कि हमारे कैफे में इम्पलॉई केवल हिंदी बोली जाएगी। विश करने के लिए गुडमार्निंग या गुड ईवनिंग की बजाय सिर्फ नमस्कार का इस्तेमाल करेंगे। हालांकि, जिन कस्टमर्स को हिंदी समझने में दिक्कत होती हैं, उनसे हम अंग्रेजी में बात करते हैं। कैफे में रखे गए किन्नरों को काम के साथ इस बात की भी ट्रेनिंग दी गई है।”

लोगों ने की सराहना

शेट्‌टी बताते हैं कि जिन किन्नरों को हमने जॉब पर रखा है, वे ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं है। उन्होंने कहा कि हमने किन्नरों को जॉब देकर एक पॉजिटिव पहल की है। ताकि उन्हें समाज से जोड़ा जा सके। आज की यंग जेनेरेशन काफी मैच्यार है। वह यह नहीं देखती है कि किसे काम पर रखा गया है। अब तक कैफे में आनेवाले लोगों से हमें अच्छा रिस्पांस मिला है। शेट्‌टी इस बात से खुश हैं कि कैफे में आनेवाले लोगों ने उनकी इस पहल को सराहा है।

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