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दि राइजिंग न्यूज़

आउटपुट डेस्क।

 

वैज्ञानिकों ने एक ऐसा सोलर पैनल विकसित किया है जो ऊर्जा के लिए गैस, कोयला आदि प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भरता को हमेशा के लिए खत्म कर देगा। यह सोलर पैनल सूर्य की रोशनी के साथ-साथ बरसात की बूंदों से भी बिजली बनाने में सक्षम होगा। अभी तक बारिश के दिनों में सोलर पैनल बिजली का उत्पादन नहीं कर सकते थे।

 

इससे खासकर उन देशों के लोगों को दिक्कत होती थी जहां ज्यादा दिनों तक बारिश का मौसम होता है, लेकिन नए सोलर पैनल से दुनिया को ऊर्जा की समस्या से हमेशा के लिए मुक्ति मिल सकती है। नई तकनीक से लैस इस सोलर पैनल का विकास चीन के शोधकर्ताओं ने किया है। यह वर्षा की बूंदों कदबाव के कारण होने वाले घर्षण से बिजली बनाने में समर्थ है।

भारत, अमेरिका, ब्रिटेन और चीन समेत विश्वभर के देशों में तेजी से कम होते गैस, तेल और कोयला संसाधनों के मद्देनजर इस तकनीक को वरदान माना जा रहा है। हालांकि यह तकनीक अभी अपने शुरुआती चरण में है। पूर्वी चीन में स्थित सूचाव यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं की ओर से बनाया गया यह पैनल एक सामान्य सिलिकन सेल की तरह काम करता है।

 

इस पैनल पर बिजली उत्पन्न करने वाली एक अतिरिक्त सतह (टेंग) बनी होती है। बरसात के दिनों में पैनल अपने आप ‘ट्राइबोइलेक्ट्रिक नैनोजेनरेटर’ मोड में चला जाता है जिसे टेंग कहते हैं। इसके बाद यह पैनल वर्षा की बूंदों के गिरने से पड़ने वाले दबाव को ऊर्जा में तब्दील कर देता है। टेंग को बनाने में पारदर्शी प्लास्टिक का इस्तेमाल किया जाता है इसलिए यह सोलर पैनल बारिश के साथ-साथ सूर्य के रोशनी से भी बिजली उत्पन्न करता रहता है।

ऐसे बनती है बिजली

हाइब्रिड तकनीक से बने इसे सोलर पैनल की कार्य प्रणाली इलेक्ट्रानों के प्रवाह पर निर्भर है। इलेक्ट्रानों का यह प्रवाह दो चालक पदार्थों के संपर्क में आने के बाद होता है। जब वर्षा की बूंदें सोलर पैनल या सेल पर गिरती हैं तो वे टेंग के ऊपरी सतह पर दबाव डालती हैं। इससे इलेक्ट्रानों का प्रवाह शुरू हो जाता है जो नीचे स्थित एक इलेक्ट्रोड तक पहुंचते हैं और बिजली बनने लगती है। नव विकसित सोलर के बनाने में अब केवल एक ही बाधा रह गई है कि यह वर्षा और सूर्य की किरणों से बनी बिजली का एक ही समय पर संचय नहीं कर सकता है। फिलहाल इस बाधा को दूर करने में वैज्ञानिक जुटे हुए हैं। 

 

रेनकोट भी बनाएंगे बिजली

चीनी शोधकर्ताओं ने उम्मीद जताई है कि वह एक दिन एक ऐसा रेनकोट भी बनाने में सफल हो जाएंगे जो बिजली बनाने में समर्थ होगा। इस रेनकोट से इतनी बिजली मिल सकेगी कि इसे पहनने वाला व्यक्ति अपने फोन को रिचार्ज कर सकेगा। वर्षा की बूंदे जब पालिमर से बनी फिल्म पर पड़ती हैं तो दबाव के कारण यह संकुचित होकर इलेक्ट्रान आवेश उत्पन्न करती है। ये इलेक्ट्रान नीचे के इलेक्ट्रोड की ओर प्रवाहित होते हैं।

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