Second Teaser of Movie Sanju  Released

दि राइजिंग न्यूज़

आउटपुट डेस्क।


लग्जरी लाइफस्टाइल और रहन-सहन के लिए हांगकांग पूरे विश्व में प्रसिद्ध है लेकिन यहां एक का एक हिस्सा ऐसा भी है, जहां लोग पिंजरों में रहने के लिए मजबूर हैं। गौरतलब है कि लोहे से बने ये पिंजरे भी इन गरीबों को आसानी से नहीं मिलते हैं। इसके लिए भी उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ती है। यहां के एक पिंजरे की किराया लगभग 32 हजार रुपए प्रतिमाह हैं। इन पिंजरों को खंडहर हो चुके मकानों में रख दिया जाता है। 






करीब दो लाख जिंदगियां जीने को मजबूर..






सोसायटी फॉर कम्यूनिटी ऑर्गेनाइजेशन (SOCO) की रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब दो लाख लोग ऐसी जिंदगी जीने को मजबूर हैं। आलम ये है कि 100-100 लोग मजबूरी में पिंजरों के अंदर एक-एक अपार्टमेंट में रहते हैं। एक अपार्टमेंट में महज दो ही टॉयलेट होते हैं, जिससे इनकी परेशानी और बढ़ जाती है। दरअसल, यह पिंजरे एक अपार्टमेंट में रख दिए जाते हैं और सभी को अपना एक अलग-अलग पिंजरा मिलता है। इन पिंजरों में सभी लोगों को अपनी गृहस्ती बसानी पढ़ती है।




जहां एक ओर इससे अपार्टमेंट में ढेरों परिवारों को रहने की जगह तो जरूर मिल जाती है लेकिन दूसरी ओर उन परिवारों का जीवन कनजेसटेड तरीके से बीतता है। 


बताया जाता है कि साल 2012 से यहां पर प्रॉपर्टी की कीमत डबल हो गई, जिसके कारण लोग ऐसे रहने को मजबूर हैं। बता दें कि इस तरह के कॉफिन अपार्टमेंट केवल हांगकांग में ही नहीं, बल्कि साउथ कोरिया, सियोल, लॉस एंजिलिस में भी हैं।


पिंजरों का साइज तय


दिक्कत सिर्फ इतनी ही नहीं बल्कि और भी है। यहां पर पिंजरों का साइज भी तय होता है। कुछ पिंजरे छोटे केबिन जितने तो कुछ ताबूत के आकार के होते हैं। ज्यादातर में तो इतनी भी जगह नहीं होती कि वह गद्दे बिछा सकें, इसलिए यह लोग बांस की चटाई का उपयोग करते हैं।




यह भी पढ़ें 

राष्ट्रपति चुनाव 17 जुलाई को

बेटी का शव लेकर भटकती रही पीड़िता

योगी के नेता की धमकी, इस्‍लाम अपना लूंगा

बीजेपी विधायक की ट्रैफिक पुलिस से दबंगई, देखें वीडियो

आरबीआइ की ब्‍याज दरें, रेपो रेट 6.25 बरकरार

जो मित्र दि राइजिंग न्यूज की खबर सीधे अपने फोन पर व्हाट्सएप के जरिए पाना चाहते हैं वो हमारे ऑफिशियल व्हाट्सएप नंबर से जुडें  7080355555

दि राइजिंग न्यूज़

Suggested News

Advertisement

Loading...

Public Poll