Priyanka Chopra Shares Her Experience of Health Issues

दि राइजिंग न्यूज़

आउटपुट डेस्क।

 

रंगों का त्यौहार दो मार्च को बीत गया। होली और होलिका दहन को लेकर हमारे देश में अलग-अलग रिवाज रहे हैं। होलिका दहन पर देश भर में अलग-अलग रस्मों और मान्यताओं के बारे में आपने सुना होगा। आजमगढ़ के एक गांव में भी होलिका दहन पर अनोखी मान्यता है। यहां निर्वस्त्र होकर होलिका की आग में कुछ लोग लिट्टी सेकतें हैं। खास बात यह कि इस लिट्टी को खाने के लिए दूसरे गांव तो छोड़िए दूसरे प्रदेश से भी लोग आते हैं।

 

बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है होलिका दहन। यह बताती है कि आपकी मजबूत इच्छाशक्ति आपको सारी बुराईयों से बचा सकती है, जैसे प्रह्लाद की थी। इसी लिए आज भी होली के त्यौहार पर होलिका दहन किया जाता है। होलिका दहन पर कुछ जगहों की अपनी अपनी मान्यता भी होती है। एक ऐसी ही खास और अनोखी मान्यता आजमगढ़ के एक गांव में है।

यहां होलिका के आग में निर्वस्त्र होकर जौ की लिट्टी सेंकी जाती है। इस खास लिट्टी को प्रसाद के रूप में ग्रहण करने के लिए कई राज्यों के लोग इस गांव में आते हैं। कहा जाता है कि यह लिट्टी खाने से मिरगी और फरका जैसे रोग का नाश होता है।

 

इस पर लोगों को पूरा यकीन है। यही वजह है कि होलिका दहन पर दूर-दूर के लोग आते हैं और लिट्टी का सेवन करते हैं। इस दिन पूरे गांव में मेले जैसा माहौल रहता है। लोगों का मानना है कि लिट्टी खाने से तीन से पांच साल के अंदर मिरगी और फरका रोग जड़ से समाप्त हो जाता है।

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