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आउटपुट डेस्‍क।

किसी भी महिला के लिए गर्भधारण करना और बच्चे को जन्म देना किसी सपने से कम नहीं होता। नौ महीने तक शिशु को गर्भ में रखना कोई आम बात नहीं है। ऐसे में इन 9 महीनों के दौरान शिशु बहुत सी चीजों को सीखता है।

शिशु के जीवन की कुछ बातें ऐसी हैं, जो मां के गर्भ में ही निश्चित हो जाती हैं। जी हां, तमाम हरकतों को तो वह मां के गर्भ में सीखता ही है, लेकिन उसके जीवन की कुछ अहम चीजें मां के गर्भ में ही तय हो जाती है। चाणक्य नीति के मुताबिक बच्चे के बारे में चार बातें उसके मां के गर्भ में रहने पर ही निश्चित हो जाती हैं।

आयु

चाणक्य ने बताया है कि गर्भ में ही शिशु की आयु निश्चित हो जाती है कि वह कितने वर्षों तक जीवित रहेगा।

काम

आयु के अलावा चाणक्य ने बताया कि शिशु आगे चलकर क्या करेगा या बड़ा होकर क्या बनेगा। यह भी मां के गर्भ में ही निर्धारित हो जाता है।

संपत्ति

मां के गर्भ में ही यह तो तय हो जाता है कि वह क्या काम करेगा उसके साथ ही यह भी तय हो जाता है कि शिशु की कितनी संपत्ति होगी।

मृत्यु

इतनी सब बातों के बाद अंतिम बात यह है जो मां के गर्भ में निश्चित होती है कि शिशु की मृत्यु कब होगी। जी हां, आयु के साथ-साथ शिशु के मृत्यु का समय भी गर्भ में ही तय हो जाता है।

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