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ऐसे मिला “एशेज” को उसका नाम...

Gyan Ganga | 11-Nov-2017 | Posted by - Admin
   
Story behind Name of Ashes Series

दि राइजिंग न्यूज़

आउटपुट डेस्क।

ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच होने वाली क्रिकेट की सबसे पुरानी और सबसे फेमस “एशेज टेस्ट” सीरीज का 70वां सीजन 23 नंवबर से शुरू हो रहा है। लंबे समय बाद ऐसी कोई एशेज सीरीज होने वाली है, जिसमें साफ तौर पर किसी टीम को जीत का दावेदार नहीं माना जा रहा। इस सीरीज की पिछली विनर इंग्लैंड की टीम बेन स्टोक्स सहित कई प्रमुख खिलाड़ियों के बाहर होने से परेशान है। वहीं, मेजबान ऑस्ट्रेलियाई टीम का हालिया परफॉर्मेंस साधारण रही है।

इसलिए कहा गया "एशेज सीरीज"...

अगस्त 1882 में ऑस्ट्रेलिया ने पहली बार इंग्लैंड को इंग्लैंड की धरती पर हराया। इस पर लंदन से निकलने वाले अखबार स्पोर्टिंग टाइम्स के जर्नलिस्ट रेगिनाल्ड शिर्ले ब्रूक्स ने इंग्लिश क्रिकेट को श्रद्धांजलि दे डाली। शिर्ले ब्रूक्स ने लिखा, “ओवल पर 29 अगस्त, 1882 को इंग्लिश क्रिकेट मर गया। अब इसे दफनाया जाएगा और अवशेष (एशेज) को ऑस्ट्रेलिया ले जाया जाएगा।” तंज के तौर पर लिखी गई यह श्रद्धांजलि उस वक्त इंग्लैंड में काफी चर्चित हो गई थी।

दिसंबर 1882 में इंग्लैंड की टीम ऑस्ट्रेलिया दौरे पर गई और तब इंग्लैंड के कप्तान इवो ब्लिघ ने कहा कि वे एशेज वापस लाएंगे। उस दौरे पर इंग्लैंड को पहले टेस्ट में हार मिली, लेकिन अगले दो टेस्ट में जीत दर्ज कर उसने सीरीज पर कब्जा कर लिया।  मेलबर्न टेस्ट के बाद कुछ महिलाओं ने लकड़ी की एक गेंद जलाकर उसकी राख एक ट्रॉफी में रखकर ब्लिघ को थमाया और कहा, ले जाओ एशेज वापस। यहीं से एशेज सीरीज का आगाज हो गया।  बाद में दावा किया गया कि ट्रॉफी में बॉल की नहीं बल्कि बेल्स (गिल्लियों) की राख थी। कुछ ने कहा कि ये नकाब (कपड़ा) की राख थी। ट्रॉफी के अंदर किस चीज की राख है इस पर विवाद आज भी जारी है। बहरहाल इस राख के लिए 135 साल से मुकाबला जारी है।

दुनिया की सबसे छोटी ट्रॉफी

एशेज ट्रॉफी आज भी लॉर्ड्स के एमसीसी म्यूजियम में रखी हुई है। सीरीज जीतने वाली टीमों को उस ट्रॉफी की रेप्लिका थमाई जाती है। ट्रॉफी की ऊंचाई महज 15 सेंटीमीटर है और यह दुनिया की सबसे छोटी ट्रॉफी मानी जाती है।

 

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