Crowd Rucuks At Sapna Chaudhary Program in Begusaray of Bihar

दि राइजिंग न्यूज़

आउटपुट डेस्क।   

भारत के लौह-पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात में एक छोटे गांव नादिद में हुआ था। हालांकि सरदार पटेल के जन्म की वास्तविक तिथि का कोई रिकॉर्ड नहीं है। 31 अक्टूबर को जो उनका जन्म-दिवस मनाया जाता है, इसका रिकॉर्ड भी असल में उनके मेट्रिक की परीक्षा पेपर से लिया गया था। उनके पिता झवेरभाई पटेल एक साधारण किसान और माता लाड बाई एक साधारण महिला थी। भारतीय के पहले गृहमंत्री और उप-प्रधानमंत्री के पद पर रहते हुए उन्होंने पंजाब और दिल्ली से आये शरणार्थियों के लिये देश में शांति का माहोल विकसित किया था।

तो आइए आपको बताते हैं भारत के लौह पुरुष सरदार पटेल के बारे में कुछ अनजाने तथ्य

  • सरदार पटेल मन और प्रकृति से ही एक किसान थे। लेकिन इसके बाद भी अपनी मेहनत और लगन से उच्च शिक्षा प्राप्त की और एक सफल वकील के तौर पर जाने गए।
  • साल 1930 में गुजरात में प्लेग महामारी की तरह फैल रहा था तब भी सरदार पटेल लोगों के मना करने के बावजूद अपने पीड़ित मित्र की देखभाल करने के लिए पहुंच गए। इसीलिए उनको भी प्लेग हो गया। इसे बाद जब तक वो ठीक नहीं हुए वो एक पुराने मंदिर में अकेले रहे।
  • पटेल ही वो व्यक्ति थे, जिन्होंने संविधान सभा में प्रिवी पर्स के भुगतान की गारंटी का मुद्दा उठाया था, लेकिन उस समय कांग्रेस ने उनके इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया।
  • उन्होंने नवंबर 1950 में तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू को पत्र लिखकर भारत के उत्तर में चीन द्वारा पैदा हो सकने वाले खतरे के बारे में आगाह किया था, लेकिन पंडित नेहरू ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया और फिर साल 1962 से चीन की लड़ाई तो आपको याद ही होगी।
  • असल में सरदार पटेल को आधुनिक भारत का जनक कहा जा सकता है। इसका कारण ये है कि आज जो भारत हमारे सामने है, वो 565 स्थानीय रियासतों का एक समूह है। उन्होंने ही इन रियासतों का एकीकरण कर आधुनिक भारत का निर्माण किया था।
  • साल 1909 में सरदार पटेल की पत्नी का हॉस्पिटल में एक ऑपरेशन करते हुए देहांत हो गया। जब उनको ये खबर मिली तो वो अदालत में जिरह कर रहे थे। उन्होंने खबर सुनकर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और काम करते रहे। जब अदालत की कार्यवाही खत्म हो गई, तब उन्होंने अन्य लोगों को इस बात की जानकारी दी।

 

क्यों नहीं बन सके प्रधानमंत्री

दलअसल, महात्मा गांधी का पंडित जवाहर लाल नेहरू के लिए बहुत ज्यादा लगाव था। साल 1946 में भारत के पहले प्रधानमंत्री के रूप में कांग्रेस कमिटी में किसी ने भी जवाहर लाल नेहरू का नाम प्रस्तावित नहीं किया। वहीं दूसरी ओर पटेल का नाम पूरे बहुमत से सामने आया।

इस पर जवाहर लाल नेहरू ने ये साफ कर दिया कि वह किसी के मातहत में काम नहीं करेंगे। गांधी जी को इस बात का डर था कि कहीं नेहरू कांग्रेस पार्टी को तोड़ न दें। इसका परिणाम ये होगा कि अंग्रेजों को भारत को आजाद न करने का बहाना मिल सकता है। गांधी जी ने जब इस बारे में पटेल से बात की तो उन्होंने प्रधानमंत्री पद के लिए किए गए नामांकन से अपना नाम वापस ले लिया।

 

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