Actress katrina Kaif and Mouni Roy Visited Durga Puja Pandal

दि राइजिंग न्यूज़

आउटपुट डेस्क।

मंगल ग्रह को लोग लाल ग्रह के नाम से जानते हैं। आपको बता दें कि इस ग्रह पर फेरिक आक्साइड की उपस्थिति है, जिसकी वजह से ये लाल रंग का दिखाई देता है। हमारे सौर मंडल में मंगल ग्रह का स्थान सूर्य से चौथा है। आपको ये पता होगा कि ये सौरमंडल का दूसरा सबसे छोटा ग्रह है। मंगल ग्रह पर केवल 5% ही ऑक्सीजन पाई जाती है, बाकी 95% कार्बन-डाई-ऑक्साइड है। एक शोध में वैज्ञानिकों को पता चला है कि धरती के कुछ बैक्टीरिया मंगल ग्रह पर जिंदा रह सकते हैं।

मंगल ग्रह के बारे में कुछ रोचक बातें

  • यूनान के लोग मंगल को युद्ध का देवता मानते हैं।
  • मंगल ग्रह की सतह का लाल-नारंगी रंग लौह आक्साइड के कारण होता है, जिसे सामान्य रूप से हैमेटाईट या जंग माना जाता है।
  • सिलिकॉन और ऑक्सीजन के अलावा मंगल की पर्पटी में बहुत बड़ी मात्रा में पाए जाने वाले तत्व हैं, लोहा, मैग्निशियम, एल्युमिनियम, कैल्शियम और पोटेशियम।
  • इस ग्रह की सतह मुख्य रूप से थोलेईटिक बेसाल्ट से बनी है।
  • इस ग्रह पर महासागर नहीं है, इसलिए कोई समुद्र स्तर नहीं है।
  • इस ग्रह के वायुमंडल में 95% कार्बन-डाई-आक्साइड, 3% नाइट्रोजन, 1.6% आर्गन से बना है, इसके अलावा ऑक्सीजन और पानी के निशान शामिल भी मिले हैं।
  • वैज्ञानिकों की माने तो इस ग्रह का औसत तापमान -55 डिग्री सेल्सियस है, इसके अलावा सर्दियों मे यहां का तापमान -87 डिग्री सेल्सियस और गर्मियों में -5 डिग्री सेल्सियस पर आ जाता है।
  • यहां पर वातावरण का दबाव धरती के मुकाबले काफी कम है, जिसकी वजह से यहां जिंदा रहना बहुत मुश्किल है।
  • यहां की सतह पर धूल भरे तूफान उठते रहते हैं, कभी-कभी ये तूफान पूरे ग्रह को ढक लेते हैं।
  • मंगल ग्रह को आप धरती से नंगी आंखों से ही देख सकते हैं।
  • यह पृथ्वी की तुलना में सूर्य से 1.52 गुना ज्यादा दूर है, जिसकी वजह से सूर्य की 43% किरणें ही यहां तक पहुंच पाती हैं।
  • इस ग्रह का अक्षीय झुकाव 25.19 डिग्री है, जोकि पृथ्वी के अक्षीय झुकाव से थोड़ा ज्यादा है।

  • आपको बता दें कि यहां पर एक दिन 24 घंटें से कुछ ज्यादा समय का होता है।
  • इस ग्रह की ऋतुएं भी पृथ्वी जैसी ही हैं, हालांकि ये पृथ्वी की ऋतुओं के मुकाबले दोगुनी लंबी होती हैं।
  • मंगल के दो चंद्रमा है, जिनका नाम फोबोस और डेबोस है। फोबोस डेबोस से थोड़ा बड़ा है। ये दोनों छोटे और अनियमित आकार के हैं।
  • वैज्ञानिकों का मानना है कि फोबोस धीरे-धीरे मंगल की ओर झुक रहा है, हर 100 साल में ये इस ग्रह की ओर 1.8 मीटर झुक जाता है। ये अनुमान लगाया गया है कि अगले 5 करोड़ साल में या तो ये मंगल से टकरा जाएगा या फिर खुद ही टूट जाएगा और ग्रह के चारों ओर एक घेरा बना लेगा।

  • इसका व्यास पृथ्वी के व्यास का लगभग आधा है, लेकिन ये पृथ्वी से कम घना है।
  • फोबोस पर गुरुत्वाकर्षण धरती के गुरुत्वाकर्षण का 1000वां हिस्सा है। इसे आप ऐसे समझ सकते हैं कि अगर धरती पर आपका वजन 68 किलो है तो फोबोस पर आपका वजन केवल 68 ग्राम ही रह जाएगा।
  • वहीं मंगल का गुरुत्वाकर्षण धरती की तुलना में एक तिहाई है। इसका मतलब ये है कि अगर किसी व्यक्ति का वजन धरती पर 100 किलो है तो मंगल पर उसका वजन केवल 37 किलोग्राम ही रह जाएगा।
  • यहां का गुरुत्वाकर्षण धरती से एक तिहाई है, तो इसका मतलब ये है कि मंगल पर अगर कोई चट्टान ऊंचाई से गिरती है तो वो धरती के मुकाबले काफी कम रफ्तार से गिरेगी।

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