Director Kalpana Lajmi Passed Away

दि राइजिंग न्यूज़

आउटपुट डेस्क।

मॉन्यूमेंट्स यानी स्मारक हमेशा ही बड़ी संख्या में टूरिस्ट्स को अपनी ओर आकर्षित करते रहे हैं फिर चाहे उन लोगों की इतिहास में दिलचस्पी रही हो या नहीं। अगर बात दिल्ली की करें तो यहां पर लंबे वक्त तक मुगल शासकों का राज रहा इसलिए दिल्ली के आर्किटेक्चर में भी आपको मुगलों की छाप साफ नजर आएगी। यही वजह कि बाहर से दिल्ली आने वाले पर्यटक दिल्ली में मौजूद मुगलकालीन स्मारकों को देखने जरूर जाते हैं।

हुमांयू का मकबरा

इसे हाजी बेगम ने अपने शौहर हुमांयू की याद में हुमांयू की मृत्यु के 8 साल बाद बनवाया था। हुमांयू का मकबरा यूनेस्को के वर्ल्ड हेरिटेज साइट की लिस्ट में शामिल है और यह भारतीय उपमहाद्वीप में बनने वाला पहला बगीचे वाला मकबरा था। लाल बलूआ पत्थर से बनी इस इमारत को आगरा में बने ताज महल के इंस्पिरेशन के तौर पर जाना जाता है। यह स्मारक फारसी और मुगल वास्तुकला का बेहतरीन उदारण है।

लाल किला

अगर आपको इतिहास पसंद है तब भी और अगर नहीं पसंद है तब भी आपको लाल किला जाने का मौका बिलकुल मिस नहीं करना चाहिए। शाहजहां ने लाल किले का निर्माण करवाया था और यहां मुगलकालीन दरबार की भव्यता साफ दिखती है। लाल किले के अंदर मौजूद दीवान-ए-आम, दीवान-ए-खास, रंग महल, खास महल, हमाम, नौबतखाना, हीरा महल और शाही बुर्ज यादगार इमारतें हैं। इस इमारत का नाम लाल किला इसलिए पड़ा क्योंकि यह लाल रंग के बलूआ पत्थर से बना है।

पुराना किला

पुराना किला जैसा की नाम से पता चल रहा है यह दिल्ली के सबसे पुराने किलों में से एक है और इसका निर्माण मुगल शासक हुमांयू के शासनकाल में हुआ था। सर्दियों के मौसम में दिन के वक्त अगर आप परिवार या दोस्तों के साथ धूप को इंजॉय करते हुए पिकनिक मनाना चाहते हैं तो पुराना किला आपके लिए परफेक्ट प्लेस हो सकता है। इसके अलावा आप चाहें तो यहां बोटिंग का भी मजा ले सकते हैं।

जामा मस्जिद

इस मस्जिद का निर्माण भी मुगल शासक शाहजहां ने करवाया था। 6 हजार मजदूरों ने मिलकर 6 साल में इस मस्जिद को बनाया और यह इतनी बड़ी है कि इसमें एक बार में 25 हजार श्रद्धालु नमाज पढ़ सकते हैं। साथ ही यह जगह अनगिनत कबूतरों का घर भी है। यह प्राचीन मस्जिद आपको दिव्यता के और नजदीक ले जाती है।

सफदरजंग मकबरा

हुमांयू के मकबरे की ही तरह सफदरजंग का मकबरा भी बगीचे वाला मकबरा है जिसमें मुगलों का आर्किटेक्चर साफ दिखता है। मुगल साम्राज्य के प्रधानमंत्री थे सफदरजंग जिनकी याद में 1754 में सफदरजंग का मकबरा बना था। देखने में यह बहुत हद तक हुमांयू के मकबरे जैसा ही लगता है।

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