Home gyan ganga Never Offer Water To Lord Shiva With Conch Shell

दिल्ली: आईजीआई एयरपोर्ट पर एक यात्री 13 सोने की बिस्किटों के साथ पकड़ा गया

रोहिंग्या के मसले पर सरकार का रुख साफ, यह एक नीतिगत मुद्दा: अरुण जेटली

जम्मू कश्मीर: बनिहाल-जम्मू रूट पर सड़क हादसा, 4 लोगों की मौत

दिल्ली: ब्रेन हेमरेज की वजह से कांग्रेस नेता एनडी तिवारी अस्पताल में भर्ती

अनंतनाग: हिज्बुल आतंकी आदिल अहमद बिजबेहरा रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार

Trending :   #Hot_Photoshot   #Sports   #Politics   #Hollywood   #Bollywood

भूल कर भी न चढ़ाएं भगवान शिव को शंख से जल

     
  
  rising news official whatsapp number

Never Offer Water to Lord Shiva with Conch shell

दि राइजिंग न्यूज़

आउटपुट डेस्क

हिंदू धर्म वैसे तो शंख को एक पवित्र वस्‍तु के रूप में पूजा जाता है और सभी देवी देवताओं के ऊपर शंख से जल चढ़ाने की परंपरा है। भगवान विष्‍णु को यह बहुत पसंद है लेकिन भगवान शिव को शंख से जल नहीं चढ़ाया जाता है।

ऐसा क्‍यों है इसके पीछे शिवपुराण में एक कथा का वर्णन है। जिसके अनुसार शंखचूड नाम का महापराक्रमी दैत्य हुआ करता था जो शंखचूड दैत्यराम दंभ का पुत्र था। दैत्यराज दंभ को लंबे समय तक संतान सुख की प्राप्ति नहीं हुई थी तो उसने भगवान विष्णु की घोर तपस्‍या की जिससे वह प्रसन्‍न हो गए और दंभ ने उनसे तीनों लोकों के लिए अजेय एक महापराक्रमी पुत्र का वर प्राप्‍त कर लिया।

इसके बाद दंभ के यहां एक पुत्र का जन्म हुआ जिसका नाम शंखचूड़ रखा गया। शंखचुड ने भी ब्रह्माजी के घोर तपस्या की और उन्हें प्रसन्न कर वर मांगा कि वो देवताओं के लिए अजेय हो जाए। ब्रह्माजी ने इसके लिए उसे श्रीकृष्णकवच दिया और कहां कि तुम धर्मध्वज की कन्या तुलसी से विवाह कर लो इसके बाद तुम्‍हें कोई परास्‍त नहीं कर पाएगा।

ब्रह्मा की आज्ञा से तुलसी और शंखचूड के बीच विवाह संपन्‍न हो गया। ब्रह्मा के वरदान के बाद शंखचूड ने तीनों लोकों पर अधिकार प्राप्‍त कर लिया है। देवताओं ने परेशान होकर विष्णु भगवान से मदद की गुहार लगाई परंतु उन्होंने खुद दंभ को ऐसे पुत्र का वरदान दिया था। अत: उन्होंने देवताओं से शिव भगवान की शरण में जाने के लिए कहा तब भगवान शिव ने देवताओं के दुख दूर करने का निर्णय लिया। लेकिन यह इतना आसान नहीं था क्‍योंकि श्रीकृष्ण कवच और तुलसी के पातिव्रत धर्म की वजह से शिवजी भी उसका वध करने में सफल नहीं हो पा रहे थे। इन परिस्थितियों में विष्णु भगवान ने ब्राह्मण रूप धारण कर दैत्यराज से उसका श्रीकृष्णकवच दान में ले लिया। इसके बाद शंखचूड़ का रूप धारण कर तुलसी के शील का हरण कर लिया।

इसके बाद शिव ने शंखचूड़ को अपने त्रिशुल से भस्म कर दिया था और उसकी हड्डियों राख से ही शंख का निर्माण हुआ।

चूंकि शंखचूड़ विष्णु भक्त था अत: लक्ष्मी-विष्णु को शंख का जल अर्पित करने पर वह बहुत प्रसन्‍न होते हैं। परंतु शिव ने चूंकि उसका वध किया था अत: शंख का जल शिव को चढ़ाने के लिए मना किया गया है। इसी वजह से भगवान शिव को शंख से जल नहीं चढ़ाया जाता है।


यह भी पढ़ें

इस विशालकाय जीव को बीच पर देखकर पर्यटक रह गया हैरान !

ख़त्म हुई “बाजीराव-मस्तानी” की प्रेम कहानी

आपके पेट्स तो ऐसे नहीं हैं.....

नागपंचमी के दिन इन नागों की जाती है पूजा

सपने में दुल्हन देखने का असल जीवन में असर ...



जो मित्र दि राइजिंग न्यूज की खबर सीधे अपने फोन पर व्हाट्सएप के जरिए पाना चाहते हैं वो हमारे ऑफिशियल व्हाट्सएप नंबर से जुडें  7080355555

संबंधित खबरें

HTML Comment Box is loading comments...

 


Content is loading...



What-Should-our-Attitude-be-Towards-China


Rising Stroke caricature
The Rising News Public Poll



Photo Gallery
गणपति बप्पा मोरया मंगल मूर्ति मोरया । फोटो - कुलदीप सिंह

Flicker News


Most read news

 



Most read news


Most read news


खबर आपके शहर की