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दि राइजिंग न्‍यूज

आउटपुट डेस्‍क।

 

यज्ञ या हवन हिंदू धर्म में शुद्धीकरण का कर्मकांड है। हवन कुंड में अग्नि प्रज्वलित करने के बाद इस पवित्र अग्नि में फल, शहद, घी, काष्ठ इत्यादि पदार्थों की आहुति प्रमुख होती है। शुभकामना, स्वास्थ्य एवं समृद्धि इत्यादि के लिए हवन किया जाता है।

 

 

आमतौर पर जब हवन या यज्ञ किया जाता है तो हवन में सामग्री या आहुति डालते समय कुछ सामग्री नीचे गिर जाती है। कुछ लोग हवन पूरा होने के बाद इसे उठाकर हवन कुंड में ही डाल देते हैं, जो कि शास्त्रों में वर्जित माना गया है।

 

 

हवन कुंड की ऊपर की सीढ़ी पर अगर हवन सामग्री गिर गई है तो उसे आप हवन कुंड में दोबारा डाल सकते हैं। इसके अलावा दोनों सीढ़ियों पर गिरी हुई हवन सामग्री वरुण देवता का हिस्सा होती है। इसलिए इस सामग्री को उन्हें ही अर्पित कर देना चाहिए।

 

 

हवन के नियम-

  • हवन कुंड में सामग्री डालने के लिए हमेशा शास्त्रों की आज्ञा, गुरु की आज्ञा तथा आचार्यों की आज्ञा का पालन करना चाहिए।

  • हवन करते समय आपके मन में यह विश्वास होना चाहिए कि आपके करने से कुछ भी नहीं होगा। जो होगा वह गुरु के करने से होगा।

  • कुंड को बनाने के लिए अड़गभूत वात, कंठ, मेखला तथा नाभि को आहुति एवं कुंड के आकार के अनुसार निश्चित किया जाना चाहिए।

  • अगर इस कार्य में कुछ ज्यादा या कम हो जाते हैं तो इससे रोग शोक आदि विघ्न भी आ सकते हैं।

  • इसलिए हवन को तैयार करवाते समय केवल सुन्दरता का ही ध्यान न रखें, बल्कि कुंड बनाने वाले से कुंड शास्त्रों के अनुसार तैयार करवाना चाहिए।

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