Crowd Rucuks At Sapna Chaudhary Program in Begusaray of Bihar

दि राइजिंग न्यूज़

आउटपुट डेस्क।

 

रविवार यानि छुट्टी का दिन। पूरे सप्ताह काम करने के बाद इस दिन लोग आराम फरमाते हैं। अपने परिवार वालों और दोस्तों के साथ समय बिताते हैं। इसके साथ ही आने वाले सप्ताह के लिए खुद को रिचार्ज भी करते हैं। पूरे सप्ताह लोगों को इस एक दिन का बड़ी ही बेसब्री से इंतजार रहता है लेकिन क्या आपको पता है कि भारत में रविवार को छुट्टी की शुरुआत कब से हुई और किसने की? आज हम आपको बताते हैं आखिर क्या है इसके पीछे का इतिहास?

 

इस दिन का श्रेय जाता है...

आपको बता दें कि इस घटना का इतिहास बहुत ही दुखद है। इसके पीछे कई लोगों की कठिन लड़ाई और संघर्ष छिपा हुआ है। इस दिन हम अपने घरों में बैठकर चैन की नींद लेते हैं उसका श्रेय नारायण मेघाजी लोखंडे को जाता है। भारत पर ब्रिटिश शासकों का शासन था। उस दौर में लोगों पर बहुत जुल्म किया जाता है। अंग्रेजों के शासनकाल में मजदूरों को सप्ताह के सातों दिन बिना छुट्टी के काम करना पड़ता था।

ब्रिटिश सरकार ने खारिज की थी लोखंडे की मांग

नारायण मेघाजी लोखंडे उस समय श्रमिकों के नेता थे। श्रमिकों की हालत को देखते हुए उन्होंने इसका जिक्र ब्रिटिश सरकार से किया। इसके साथ ही सप्ताह में एक दिन छुट्टी प्रदान करने की अनुमति भी मांगी लेकिन तत्कालीन ब्रिटिश सरकार द्वारा उनके इस निवेदन को खारिज कर दिया गया था।

 

जब रंग लाइ लोखंडे की मेहनत

लोखंडे को यह बात बिल्कुल पसंद नहीं आई थी। उन्होंने श्रमिकों के साथ मिलकर इसका जमकर विरोध किया था। उन्होंने सरकार की इस सख्ती के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की थी। उन्होंने विरोध प्रदर्शन भी किया। यह सब इतना आसान नहीं था। उन्होंने मजदूरों के हक के लिए काफी कुछ किया था। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई।

रविवार का दिन चुना गया

करीब 7 साल बाद अंग्रेज सरकार ने 10 जून साल 1890 को आदेश जारी किया कि सप्ताह में किसी एक दिन सबकी छुट्टी होगी। इस आदेश के जारी होने के बाद रविवार को छुट्टी होने का निर्णय लिया गया था। इसके साथ ही हर रोज दोपहर के वक्त आधे घंटे का अवकाश रखा गया जिसे हम आज लंच ब्रेक कहते हैं।

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