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दि राइजिंग न्यूज़

आउटपुट डेस्क।

शादी हम सभी के जीवन का एक बेहद खास हिस्सा है, कभी ना कभी विवाह रूपी पड़ाव पर आना ही पड़ता है। सफलतापूर्वक इसे पार भी करना जीवन का एक हिस्सा होता है। शादी-ब्याह का नाम सुनते ही आज भी लोगों के चेहरे पर शर्म दस्तख दे देती है। आजकल के युवाओं से जब शादी की बात की जाती है वे टेंशन में आ जाते हैं। चिंता तो पहले भी लोगों को होती थी लेकिन आज के युवाओं की चिंता शादी के बाद कॅरियर को लेकर ज्यादा रहती है।

उनका बेटर हाफ जॉब की डिमांड समझेगा की नहीं, पर्सनल लाइफ को किस तरह बाधित करेगा, उन दोनों के बीच केमिस्ट्री बन पाएगी कि नहीं वगैरह-वगैरह।हम जानते हैं कि शादी का नाम सुनते ही युवाओं और अविवाहितों के पसीने छूट जाते हैं और इसीलिए हम आपको शादी से रिलेटेड कुछ बाते (परंपरा और सभ्यता) बताने जा रहे हैं। आज हम आपको विभिन्न धर्मों और समाजों की विवाह से जुड़ी कुछ ऐसी अजीबोगरीब मान्यताओं से परिचय करवाएंगे जिन्हें जानकर विवाह के प्रति आपका दृष्टिकोण थोड़ा अलग जरूर होगा।

शादी से पहले कुछ ऐसी परम्पराओं से पड़ता है आपका पाला

बर्तन बजाने की परंपरा

इसके पीछे उनकी मान्यता यह थी कि शोर-शराबे और जीवन के उठा-पटक के बीच किस तरह एक-दूसरे का साथ निभाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

बिछुआ पहनने की परंपरा

पश्चिमी और बहुत से एशियाई देशों में हिन्दू धर्म में मौजूद यह परंपरा भी बेहद हैरान करने वाली है कि शादी के बाद महिलाएं हाथों के अलावा पैरों की अंगुलियों में भी अंगूठी पहनती हैं।

पैर की अंगूठी जिसे बिछुआ या बिछिया कहा जाता है, मुख्यत: उत्तर भारत की महिलाओं को विवाह की एक रस्म के तौर पर उनके पति पहनाते हैं।

निषेध है शौच

ये बहुत दर्दनाक और कुछ हद तक हास्यास्पद परंपरा है कि मलेशिया की तिडोंग संप्रदाय के लोग नव दंपत्ति को ना तो पीने के लिए पानी देते हैं और ना ही पर्याप्त खाना। यहां तक कि वे उन्हें शादी के तीन दिन और तीन रात बाद तक शौच के लिए नहीं जाने देते।

ये होता दुर्भाग्य का आगमन

अगर नव दंपत्ति में से कोई भी एक शौच चला जाता है तो इसके पीछे उनकी मान्यता है कि ऐसा करने से उनके विवाहित जीवन में दुर्भाग्य दस्तक देता है।

पैसे देने की परंपरा

पोलैंड के लोगों की विवाह से जुड़ी ये परंपरा थोड़ी अजीबोगरीब है जहां दुल्हन के साथ नाचने के लिए शादी में आए पुरुष मेहमान पैसे देते हैं। इस रस्म की समाप्ति के बाद ही नवदंपत्ति हनीमून के लिए निकल जाते हैं।

दुल्हन को अगवा करने की परंपरा

वैसे तो भारत के पौराणिक इतिहास में भी महिला को अगवा कर उसे अपनी दुल्हन बनाने की परंपरा विद्यमान रही है लेकिन ऐसा माना जाता है आज भी रोम में ऐसे संप्रदाय हैं, जिन्हें जिप्सी कहा जाता है, जिनमें उस स्त्री को अगवा कर अपनी पत्नी बनाया जाता है जो उन्हें पसंद होती है।

प्रेत आत्माओं की नफरत

यह थोड़ा अजीब है लेकिन भारत के बहुत से क्षेत्रों में लोगों की यह मान्यता है कि अगर किसी लड़की का दांत उसके ऊपर वाले मसूड़े से निकलता है तो इसका अर्थ है कि प्रेत आत्माएं और शैतानी रूहें उसे पसंद नहीं करतीं। इसलिए बहुत हद तक संभव है वह भविष्य में किसी जानवर का शिकार बन जाए।

इससे बचने का उपाय- प्रेत आत्माओं की इस नफरत से बचने के लिए उस लड़की का विवाह जानवर से करवाया जाता है। यह मात्र प्रतीकात्मक विवाह होता है, लड़की के आगामी जीवन में इसका कोई दखल नहीं होता।

अंडे मारने की परंपरा

स्कॉटलैंड के बहुत से क्षेत्रों में आज भी नव दंपत्ति पर अलग-अलग तरह की सॉस, अंडे, काला रंग, आदि डालकर उन्हें विदा करने की परंपरा मौजूद है।

बुरी आत्माओं से बचाव- इसके पीछे की मान्यता यह है कि काले रंग से ढके रहने से शैतानी ताकतों को नव दंपत्ति नजर नहीं आते और वो उनकी बुरी नजर से बच जाते हैं।

झाड़ू पर पैर रखने की परंपरा

पश्चिम के बहुत से देशों में विवाह के पश्चात झाड़ू पर पैर रखकर भागने की परंपरा है। झाड़ू अतीत का प्रतीक है और उस पर पैर रखकर आगे बढ़ने का अर्थ है खुशी-खुशी अतीत को भूलकर भविष्य की तरफ बढ़ना।

दूल्हे के पैरों पर सूखी मछली मारना

दक्षिण कोरिया में यह प्रथा आज भी पूरी शिद्दत के साथ निभाई जाती है, जिसमें दूल्हे के दोस्त सुहागरात से पहले उसके पैरों पर कॉर्निया नाम की मछली को को सुखाकर उससे वार करते हैं ताकि वो अपनी सुहागरात के लिए तैयार हो सके।

 

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