Film on Pulwama Attack in Bollywood

दि राइजिंग न्यूज़

आउटपुट डेस्क।

मध्यप्रदेश के भोपाल से करीब ढ़ाई सौ किलोमीटर दूर धार जिला ही राजा भोज की “धारानगरी” कही जाती है। 11वीं सदी में ये शहर मालवा की राजधानी रह चुका है और जिस राजा भोज ने इस नगरी को बसाया उस राजा की प्रशंसा बड़े-बड़े विद्वान् ही नहीं राजा महाराजा और सामान्य जन भी करते आ रहे हैं। राजा भोज के प्रशंसकों की देश-विदेश में कमी नहीं है। बहुमुखी प्रतिभा के धनी राजा भोज शस्त्रों के ही नहीं बल्कि शास्त्रों के भी ज्ञाता थे। उन्होंने वास्तुशास्त्र, व्याकरण, आयुर्वेद, योग, साहित्य और धर्म पर कई ग्रंथ लिखे।

कहा जाता है कि मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल को एक जमाने में “भोजपाल” कहा जाता था और बाद में इसका “ज” गायब होकर ही इसका नाम “भोपाल” पड़ गया। वीआईपी रोड से भोपाल शहर में प्रवेश करते ही राजा भोज की एक विशाल मूर्ति के दर्शन होते हैं। अपने 40 साल के शासन काल में महाराज भोज ने कई मंदिरों और इमारतों का निर्माण करवाया उसी में से एक है भोजशाला। राजा भोज सरस्वती के उपासक थे और उन्होंने भोजशाला में सरस्वती की एक प्रतिमा भी स्थापित कराई थी जो आज लंदन में मौजूद है।

 

राजा भोज ने भोजशाला तो बनाई ही मगर वो आज भी जन जन में जाने जाते हैं एक कहावत के रूप में- “कहां राजा भोज कहां गंगू तेली”।  किन्तु इस कहावत में गंगू तेली नहीं अपितु “गांगेय तैलंग” हैं। गंगू अर्थात् गांगेय कलचुरि नरेश और तेली अर्थात् चालुका नरेश तैलय दोनों मिलकर भी राजा भोज को नहीं हरा पाए थे। ये दक्षिण के राजा थे। और इन्होंने धार नगरी पर आक्रमण किया था मगर मुंह की खानी पड़ी तो धार के लोगों ने ही हंसी उड़ाई कि “कहां राजा भोज कहां गांगेय तैलंग” । गांगेय तैलंग का ही विकृत रूप है “गंगू तेली” । जो आज “कहां राजा भोज कहां गंगू तेली“ रूप में प्रसिद्ध है।

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