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दि राइजिंग न्यूज़

आउटपुट डेस्क।

होलाष्टक को ज्योतिष की दृष्टि से एक होलाष्टक दोष माना जाता है, जिसमें विवाह, गर्भाधान, गृह प्रवेश, निर्माण आदि शुभ कार्य वर्जित होते हैं। भारतीय मुहूर्त विज्ञान व ज्योतिष शास्त्र प्रत्येक कार्य के लिए शुभ मुहूर्तों का शोधन कर उसे करने की अनुमति देता है। वर्ष 2019 में 13 मार्च 2019 बुधवार से शुरू होकर 20 मार्च 2019 बुधवार तक का समय होलाष्‍टक का रहेगा। 20 मार्च को होलिका दहन के साथ इसकी समाप्ति होगी।

इन दिनों में सभी तरह के शुभ कार्य वर्जित होते हैं। कोई भी कार्य यदि शुभ मुहूर्त में किया जाता है, तो वह उत्तम फल प्रदान करने वाला होता है। इस धर्म धुरी से भारतीय भूमि में प्रत्येक कार्य को सुसंस्कृत समय में किया जाता है, अर्थात ऐसा समय जो उस कार्य की पूर्णता के लिए उपयुक्त हो।

कैसे मनाएं होलाष्टक?

  • होलिका पूजन करने हेतु होलिका दहन वाले स्थान को गंगा जल से शुद्ध किया जाता है।

  • इसके बाद मोहल्ले के चौराहे पर होलिका पूजन के लिए डंडा स्थापित किया जाता है। उसमें उपले, लकड़ी एवं घास डालकर ढेर लगाया जाता है।

  • होलिका दहन के लिए पेड़ों से टूट कर गिरी हुई लकड़ियां उपयोग में ली जाती हैं तथा हर दिन इस ढेर में कुछ-कुछ लकड़ियां डाली जाती हैं।

  • होलाष्टक के दिन होलिका दहन के लिए 2 डंडे स्थापित किए जाते हैं, जिनमें एक को होलिका तथा दूसरे को प्रहलाद माना जाता है।

  • पौराणिक शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार, जिस क्षेत्र में होलिका दहन के लिए डंडा स्थापित हो जाता है, उस क्षेत्र में होलिका दहन तक कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है। इन दिनों शुभ कार्य करने पर अपशकुन होता है।

  • इस वर्ष होलाष्टक 13 मार्च से शुरू होकर 20 मार्च तक रहेगा। इस आठ दिनों के दौरान सभी शुभ कार्य वर्जित माने गए हैं। इसके अंतर्गत होलिका दहन और धुलेंडी खेली जाएगी।

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