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खड़ाऊ पहनिए, तेज होगा दिमाग

Gyan Ganga | 22-Sep-2017

Khadaau or Wooden Slippers Are Beneficial For The Mind

दि राइजिंग न्यूज़

आउटपुट डेस्क।

हमारे देश की संस्कृति और सभ्यता बहुत पुरानी है और इसे पूरी दुनिया ने माना है। लेकिन आज के समय में हमारे ही देश के लोग अपनी संस्कृति को भूलते जा रहे हैं। भारत की आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति सैकड़ों साल पुरानी है और आज भी इसके जरिए असाध्य रोगों का इलाज किया जाता है। पुराने जमाने की बात करें तो उस समय लोग खड़ाऊ पहनते थे। खड़ाऊ यानि लकड़ी की चप्पल। बता दें कि खड़ाऊ एक्यूप्रेशर ही नहीं बल्कि दिमाग के साथ शरीर की कई दूसरी बीमारियों में भी लाभ पहुंचाता है।

भारत में पादुका या खड़ाऊ का चलन प्राचीन काल से होता आ रहा है। टीवी में भी हमने रामायण और महाभारत में ऋषि को पैरों में खड़ाऊ ही पहने देखा है। हम आपको बताते हैं इसके पीछे का विज्ञान, अगर आप भारत के भौगोलिक संरचना को देखें तो आपको पता चलेगा कि यहां की जमीन पर चलना आसान नहीं। लकड़ी के खड़ाऊ न सिर्फ चलने में मददगार होते थे, बल्कि ये काफी आरामदेह भी थे।

डॉक्टर्स की माने तो खड़ाऊ पहनने से आपके पैरों को काफी आराम मिलता है। खड़ाऊ आपके पैरों में मौजूद कई एक्यूप्रेशर पॉइंट्स  को टारगेट  करता है, जिससे आपके शरीर और दिमाग को आराम मिलता है। वैसे तो खड़ाऊ लकड़ी की बनाई जाती है, लेकिन लड़की के साथ-साथ हाथी दांत या चांदी के भी खड़ाऊ बनाए जाते थे।

1. खड़ाऊ पहनने से आपकी रीढ़ की हड्डी सीधी रहती है और आपका शरीरिक आकार (body posture) भी संतुलित रहता है।

2. खड़ाऊ पैर के कुछ एक्यूप्रेशर पॉइंट्स पर प्रेशर बनाते हैं, जिससे शरीर में सुचारू रूप से रक्त का संचार होता है।

3. खड़ाऊ बनाने में किसी भी जानवर की हत्या नहीं की जाती।

4. खड़ाऊ पहनने से पांव को सर्दी भी नहीं लगती और उबड़-खाबड़ रास्तों पर चलना आसान हो जाता है।

5. खड़ाऊ भारतीय सभ्यता का हिस्सा हैं, इसे पहनने में शर्म महसूस नहीं होनी चाहिए।

6. खड़ाऊ पहनने से आपके पैरों की मांसपेशियों को आराम मिलता है, जिससे आपका शरीर और दिमाग, दोनों तनावमुक्त होते हैं।

7. खड़ाऊ सस्ते, सुंदर, टिकाऊ होते हैं और इन्हें बनाने में भी अधिक लागत नहीं आती।

 

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