Box Office Collection of Dhadak and Student of The Year

दि राइजिंग न्‍यूज

आउटपुट डेस्‍क।

 

हमारे जीवन में धातु का अत्‍यंत महत्व रखता है। इसकी भूमिका ग्रहों की दिशा बदलने में अहम होती है। ज्योतिष के अनुसार ग्रहों का धातु के साथ प्रगाढ़ सम्बंद बतया जाता है। इसी कारण की वजह से पुराने समय में धातु का लाभ लेने के लिए राजा महाराजा धातु के बर्तन जैसे लोहे, तांबे, चांदी, सोने, आदि चीजों में खान-पान का सेवन किया करते थे।

 

 

  • जिन जातकों को ह्दय रोग से संबंधित परेशानी रहती हो या किसी के मान-सम्मान में कमी आ रही हो तो अनामिका उंगली में सोने या तांबे का छल्ला धारण करना चाहिए।

  • जिन लोगों को गुस्सा अधिक आता है। उनको अपने किसी भी पाव में चांदी से बनी धातु का आभूषण धारण करना चाहिए।

  • जो लोग अपने हाथ में लोहे व काले घोड़े की नाल से बना छल्ला धारण करते हैं, उनको कभी रोग जैसे नज़र लगना, तांत्रिक क्रिया, रात को डरना आदि रोगों से निजात मिलता है।

  • जिन जातकों का वजन अधिक बढ़ रहा हो या मोटापे से परेशान हो रहे हों तो उनको मध्‍यमा उंगली में रांगे की अंगूठी या छल्ला धारण करना चाहिए।

  • जिन लोगों को हमेशा हाथ या पाव में दर्द रहता है। उनको हमेशा अपने किसी भी हाथ में सोने या चांदी का कड़ा धारण करना चाहिए, लाभ जरूर होगा।

  • जिन जातकों को रक्तचाप जैसी परेशानी रहती हो उनको। अपने हाथ की किसी भी भुजा में तांबे से बने जेवर का इस्तेमाल करना चाहिए।

  • जिन लोगों को पेट और कमर में दर्द रहता हो। उनको हमेशा सोने, तांबे, या चांदी से बना छल्ला धारण करना चाहिए।

  • धातु घर की कलह को भी दूर करता है। घर की कलह से बचने के लिए हाथ में चांदी का छल्ला धारण करना चाहिए।

  • यदि किसी जातक को खासी, फेफड़े से सम्बंधित रोग है, तो उनको नाक में चांदी धारण करनी चाहिए।

  • जिन लोगों के दांत आसानी से नहीं निकलते तो उनके हाथ या पाव में लोहे व तांबे का छल्ला या कड़ा धारण कराना चाहिए।

  • अगर स्त्री में स्नायु, कंठ, गले सम्बंधी परेशानी हो रही हो तो हाथ के अंगूठे में किसी भी धातु का छल्ला पहनने से जल्द ही आराम मिलता है।

  • जो व्यक्ति बार-बार बीमार होता है उसके सीधे हाथ के नाप का कड़ा बनवाना है। कड़ा अष्टधातु का रहेगा। इसके लिए किसी भी मंगलवार को अष्टधातु का कड़ा बनवाएं। इसके बाद शनिवार को वह कड़ा लेकर आएं, और उसी दिन किसी भी हनुमान मंदिर में जाकर बजरंग बली के चरणों में रख दें। अब हनुमान चालिसा का पाठ करें। इसके बाद कड़े में हनुमानजी का थोड़ा सिंदूर लगाकर बीमार व्यक्ति स्वयं सीधे हाथ में पहन लें।

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