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दि राइजिंग न्यूज़

आउटपुट डेस्क।

जब भी हम सड़क मार्ग से यात्रा करते हैं या फिर नेशनल हाइवे या राष्ट्रीय राजमार्ग से होकर गुजरते हैं तो देखते हैं कि जगहों पर हाइवे का नाम भी बदल जाता है। राष्ट्रीय राजमार्गों के नामों को रखने का एक निश्चित तरीका होता है।

भारत का रोड नेटवर्क दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा

भारत का सड़कजाल या रोड नेटवर्क दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सड़क नेटवर्क है। भारत के पूरे सड़कजाल में राष्ट्रीय राजमार्गों या नेशनल हाइवे का हिस्सा लगभग 1.7 प्रतिशत है जो कि कुल रोड ट्रैफिक का लगभग 40 प्रतिशत से अधिक हिस्सा लेता है।

अब तक भारत में रोड नेटवर्क या सड़कजाल का विस्तार लगभग 7,451,155 किलोमीटर से अधिक का हो चुका है जो कि रोज बढ़ता जा रहा है। कुल रोड नेटवर्क के हिस्से में लगभग 1 लाख किलोमीटर हिस्सा राष्ट्रीय राजमार्गों का है।

भारत में राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास, देखभाल और प्रबंधन के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) का गठन साल 1988 में संसद में एक अधिनियम द्वारा किया गया। एनएचएआई ने अपने सदस्यों और अध्यक्ष की सहायता से फरवरी साल 1995 से राष्ट्रीय राजमार्गों की देखभाल और विकास के लिए कार्य कर रहा है।

राजमार्गों के नाम रखे जाने का तरीका

  • सभी उत्तर से दक्षिण दिशा वाले राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए सम संख्या का प्रयोग किया जाता है। इसमें पूर्व से पश्चिम की ओर बढ़ते हुए क्रम में लिया जाता है। पूर्वोत्तर राज्यों में NH-2 है जबकि राजस्थान और गुजरात में NH-68 का प्रयोग होता है। उदाहरण- दिल्ली से मुंबई के लिए NH-8
  • सभी पूर्व से पश्चिम दिशा की ओर जाने वाले राजमार्गों के लिए विषम संख्या का प्रयोग किया जाता है इसके साथ ही यह उत्तर से दक्षिण की ओर बढ़ते हुए क्रम में होता है। उदाहरण-NH 11- आगरा-जयपुर-बीकानेर
  • तीन अंकों की संख्या वाले राजमार्ग मुख्य राजमार्गों के सहायक मार्ग या शाखाएं होती हैं। NH-144,244 या 344 आदि मुख्य राष्ट्रीय राजमार्ग 44 की शाखाएं हैं।
  • शाखा राजमार्ग के तीन अंकों में यदि पहला अंक विषम है तो ऐसा माना जाता है कि वह सड़क पूर्व से पश्चिम दिशा की ओर जा रही है और यदि पहला अंक सम संख्या है तो इसका मतलब है कि वह सड़क उत्तर से दक्षिण दिशा की ओर बढ़ती हुई जा रही है।

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