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दि राइजिंग न्यूज़

आउटपुट डेस्क।

यूपीएससी की IAS की परीक्षा में शामिल होने वाले आवेदकों की संख्या को देखकर लगता है कि भारतीय युवाओं के बीच इसका क्रेज बढ़ता जा रहा है। हर साल इस परीक्षा के लिए करीब 5 लाख युवा आवेदन करते हैं और हिस्सा लेते हैं। इससे कहीं ज्यादा आवेदन राज्य पीसीएस परीक्षाओं के लिए किए जाते हैं।

आज हम आपको यहां पर बता रहे हैं कि PCS और IAS में क्या अंतर होता है?

IPS और IAS अधिकारियों के सेवा कोड में अंतर

चयन प्रक्रिया और प्रशासन

IAS

इनकी बहाली संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित अखिल भारतीय सिविल सर्विसेस परीक्षा के माध्यम से होती है। केंद्र सरकार द्वारा स्थापित केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण लोक सेवकों की भर्ती और सेवा संबंधित सभी मामलों का फैसला करता है

PCS

ये राज्य लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित की जाने वाली राज्य सिविल सेवा परीक्षा द्वारा भर्ती किए जाते हैं। संबंधित राज्य सरकार के विशेष अनुरोध पर केंद्र सरकार द्वारा स्थापित राज्य प्रशासनिक न्यायाधिकरण राज्य सरकार के कर्मचारियों की भर्ती और सेवा संबधित सभी मामलों का फैसला करता है।

परीक्षा का पैटर्न और पाठ्यक्रम

IAS परीक्षा तीन चरणों में होती है- प्रारंभिक, मुख्य और साक्षात्कार। प्रश्न तथ्यात्मक की तुलना में अधिक अवधारणात्मक होते हैं। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में अनिवार्य योग्यता एप्टीट्यूड परीक्षा होती है, जो उम्मीदवारों की तर्क कौशल का आसानी से परीक्षण करता है। इसमें एकमात्र क्वालिफाइंग क्षेत्रीय भाषा का पेपर होता है।

PCS  भी तीन चरणों में होती है, लेकिन इसमें अवधारणात्मक प्रश्नों का बजाय तथ्यात्मक प्रश्नों पर जोर दिया जाता है। राज्य लोक सेवा परीक्षा में सीसैट का पेपर हो भी सकता है और नहीं भी हो सकता है। कुछ राज्यों में अनिवार्य रूप से क्षेत्रीय भाषा का पेपर या सांख्यिकी का पेपर होता है।

कैसे होती है नियुक्ति

IAS अधिकारियों की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, लेकिन ये उन्हें आवंटित किए गये कैडर में राज्य सरकार के आधीन कार्य करते हैं।

IPS अधिकारियों की नियुक्ति राज्य के राज्यपाल द्वारा किया जाता है, इसीलिए ये पूरी तरह से राज्य सरकार के नियंत्रण में होते हैं।

कैसे होता है इनका निष्कासन

एक IAS अधिकारी को सेवा से निष्कासित करने का अधिकार केंद्र सरकार (विशेषतौर पर राष्ट्रपति) के पास होता है। राज्य सरकार के पास इन अधिकारियों के स्थानांतरण, निलंबन और निष्कासन का पूरा अधिकार होता है।

वेतन और वेतनमान

IAS का वेतन और पेंशन कैडर राज्य देता है। ये चाहे किसी भी राज्य में सेवा दे रहे हों, पूरे देश में इनका वेतनमान एक जैसा ही होता है। कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के तहत कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग भारत में केंद्रीय कार्मिक एजेंसी है, जो लोक सेवकों की नौकरी, वेतन, कैडर प्रबंधन और प्रशिक्षण के वर्गीकरण से संबंधित है।

PCS का वेतन और पेंशन पूरी तरह से राज्य सरकार के हाथों में होता है। ये जिन राज्यों में सेवा दे रहे होते हैं, उनके अनुसार इनका वेतनमान तय किया जाता है। कार्मिक विभाग या आम प्रशासनिक विभाग राज्य की केंद्रीय एजेंसी होती है औऱ यही एजेंसी इनकी नौकरी, वेतन, कैडर प्रबंधन और प्रशिक्षण के वर्गीकरण से संबंधित होती है।

पदोन्नति और पद

एक IAS अधिकारी अपना करियर एसडीएम (स्वतंत्र कार्यालय) से शुरू कर सकता है और भारत सरकार में सचिव पद तक पहुंच सकता है। नौकरी शुरू करने के बाद एक IAS अधिकारी को जिला का कलक्टर बनने में करीब 5 से 7 साल तक का समय लगता है। इनकी कार्यप्रणाली सभी जानते हैं और सभी पदोन्नतियां समय पर होती हैं।

एक PCS अधिकारी अपने राज्य सेवा के नियमों के अनुसार करियर की शुरुआत करता है। PCS अधिकारियों की पदोन्नति की प्रक्रिया जिन IAS अधिकारियों के साथ काम कर रहे होते हैं, उनकी तुलना में धीमी होती है। राज्य सेवा में काम करने वाले व्यक्ति को आईएएस अधिकारी के पद जितना प्रगति करने में 15-17 सालों का समय लग सकता है और संभव है, उस ऊंचाई तक पहुंचने से पहले ही सेवानिवृत्त भी हो जाते हैं। हालांकि अखिल भारतीय सेवा अधिनियम, 1951 के वरिष्ठ पदों पर तैतीस सालों से अधिक नहीं होना चाहिए और आईएएस, आईपीएस और आईएफएस सेवाओं के पदोन्नति द्वारा भरी जाने की जरूरत है।

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