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दि राइजिंग न्‍यूज

आउटपुट डेस्‍क।

 

दूर्वा घास सिर्फ पूजा के लिए ही उपयोगी नहीं है, बल्कि यह और भी चीजों के लिए उपयोगी है। प्राचीन मान्यतानुसार, समुद्र मंथन के दौरान जब देवतागण अमृत कलश लेकर जा रहे थे, तो उस अमृत कलश से छलककर अमृत की कुछ बूंदें पृथ्वी पर मौजूद दूर्वा पर गिरी थीं, इसलिए दुर्वा घास अमर होती है।

 

 

भगवान श्रीकृष्ण ने गीता के (9-26) अध्याय में कहा है, जो भी भक्ति के साथ दूर्वा की एक पत्ती, एक फूल, एक फल या पानी के साथ मेरी पूजा करता है, मैं उससे प्रसन्न हो जाता हूं।

पौराणिक संदर्भों से ज्ञात होता है कि क्षीर सागर से उत्पन्न होने के कारण भगवान विष्णु को यह अत्यंत प्रिय रही है।

 

 

तुलसीदास ने इसे अन्य मांगलिक पदार्थों के समकक्ष माना है। वाल्मीकि ऋषि ने भी भगवान राम के वर्ण की तुलना दूर्वा से करके इसको सम्मान दिया है- “रामदूर्वा दल श्यामे, पद्याक्षं पीतवाससा।” कहा जाता है कि इसकी जड़ें पाताल लोक तक जाती हैं और अमृत खींचती हैं। इस घास में अमृत के गुण होने और देवप्रिय होने के कारण हर धार्मिक आयोजन में इसका प्रयोग किया जाता है।

 

 

ब्‍लड शुगर को नियंत्रित करती है दूर्वा

दूर्वा धार्मिक दृष्टि से तो महत्वपूर्ण है ही, साथ ही इसमें औषधीय गुण भी पाए जाते हैं। यह कैल्शियम, फॉस्फोरस, फाइबर, पोटैशियम और प्रोटीन का अच्छा स्रोत है। दूर्वा ब्लड शुगर के लेवल को नियंत्रित करने में मदद करती है। इसका प्रयोग आयुर्वेदिक दवा बनाने में भी किया जाता है। कई शोधों से यह पता चला है कि दूर्वा में ग्लाइसेमिक गुण होता है, जो रक्त में ग्लूकोज के स्तर को कम कर सकता है। यह मधुमेह रोग से लड़ने में मदद करती है।

 

किसी भी बीमारी से लड़ने की क्षमता बढ़ाती है

आयुर्वेद के अनुसार, इसका सेवन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यून सिस्टम) को उन्नत करने में भी सहायता करता है। एंटीवायरल और एंटीमाइक्रोबियल (रोगाणुरोधी-बीमारी को रोकने की क्षमता) गुण होने के कारण यह शरीर की किसी भी बीमारी से लड़ने की क्षमता को बढ़ाती है।

अनियोजित जीवनशैली के कारण पेट संबंधी रोग तेजी से बढ़ रहे हैं। दूर्वा के लगातार सेवन से, पेट की बीमारी का खतरा कम हो जाता है और पाचन शक्ति उत्तम हो जाती है। यह कब्ज से राहत दिलाने में भी मदद करती है। दूर्वा फ्लैवनॉइड का प्रधान स्रोत होती है, जिसके कारण यह अल्सर रोकने में भी मददगार होती है। औषधि के रूप में इसका सेवन करने से सर्दी-खांसी की समस्या भी दूर हो जाती है।

 

 

मसूड़ों-त्‍वचा संबंधी रोगों के लिए कारगर औषधि

यह मसूड़ों से रक्त बहने और मुंह से आने वाली दुर्गंध को रोकने के लिए एक कारगर औषधि है। त्वचा संबंधी समस्याओं से यह निजात दिलाती है। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी (सूजन और जलन को कम करता है), एंटी-सेप्टिक (रोगाणु को रोकने की क्षमता) गुण होने के कारण त्वचा संबंधी कई समस्याओं, जैसे- खुजली, त्वचा पर चकत्ते और एक्जिमा आदि समस्याओं से राहत मिलती है।

दूर्वा घास को हल्दी के साथ पीसकर पेस्ट बनाकर त्वचा के ऊपर लगाने से त्वचा संबंधी समस्याओं से कुछ हद तक राहत मिल सकती है।

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