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जलजलों की भविष्‍यवाणी कर देता है यह शख्‍स

Senior Citizen | 6-Jul-2016 09:31:50 PM
   -बादलों की चाल देखकर नेपाल में हुए हादसे की भविष्यवाणी की थी   


दि राइजिंग न्यूज


जमीन के अंदर की तरंगें बादलों को नियंत्रित करती हैं। वहां ऊपर बादलों में जो भी हलचल होती है पाताल के जरिए होती है...और इसी से होने वाली प्राकृति‍क आपदा का पता चल जाता है।




काशी में रहने वाला एक शख्स भूकम्प की सटीक भविष्यवाणी करता है, उनकी भविष्यवाणियां सही भी होती हैं। 




57 साल के बुज़ुर्ग बादलों की चाल देख कर भूकम्प,बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं की सटीक भविष्यवाणी करते हैं। बीते साल नेपाल में आए जलजले की उन्होंने बादलों की चाल देखकर ही भविष्यवाणी की थी।



बनारस के मिश्रित आबादी वाले क्षेत्र छित्तनपुरा के रहने वाले शकील अहमद लगभग पच्चीस वर्षों से भविष्यवाणियां करते आ रहे हैं। उनकी भविष्वाणी का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है फिर भी अधिकतर भविष्यवाणियां सही हुई हैं। चाहे 2005 में जम्मू कश्मीर में आया भूकम्प हो या गुजरात के भुज में आया जलजला। जम्मू कश्मीर और उत्तराखंड में आई बाढ़ का भी उन्होंने कुछ दिनों पहले ही प्रेडिक्शन कर दिया था। इसके पहले 1995 में जापान में और 12 मई 2008 में चीन में आये भूकम्प की भी उन्होंने भविष्यवाणी की थी।


 

भविष्यवाणी का यह है आधार


शकील अहमद बताते हैं आसमान में उभरने वाले कुछ खास किस्म के बदल और उनकी चाल से वो आने वाली प्राकृतिक आपदा की भविष्यवाणी करते हैं। 




उनका कहना है कि ज़मीन के अंदर जो भी हलचल होती है उसका प्रभाव बादलों में बनता है। ज़मीन के अंदर की तरंगें बादलों को कण्ट्रोल करती हैं। ज़मीन से आकाश तक जो प्रकाश की तरंगें जाती हैं, उससे बादलों के रंग, आकार और फैलाव में परिवर्तन होता है। यही भूकंप का कारण बनता है। यही वजह है कि बादलों से भूकम्प का प्रेडिक्शन किया जा सकता है।



बादलों के चाल तय करते हैं रिक्टर का पैमाना


उनका कहना है कि बादलों के चाल को देखकर ना सिर्फ भूकम्प बल्कि उसके अनुमानित समय, स्थान और भूकम्प किस रिक्टर पैमाने पर आएगा इसकी भी सटीक भविष्यवाणी की जा सकती है, उन्होंने ऐसा करके दिखाया भी है। शकील अहमद ने अपने इस अनूठे ज्ञान का फ़ायदा समाज तक पहुंचाने की काफी कोशिशें की, बावजूद इसके उनके ज्ञान से कोई फ़ायदा लेने को अपने देश में ही लोग तैयार नही है।


यूएसजीएस मानती है प्रेडिक्शन


हां ये ज़रूर है कि उनके प्रेडिक्शन को यूनाइटेड स्टेट्स ज्योग्राफिकल सर्वे (यूएसजीएस) ज़रूर मानती है। शकील अहमद जब भी कोई प्रेडिक्शन करते हैं, इसकी जानकारी वे मेल के ज़रिये यूएस ज्योग्राफिकल सर्वे को देने के साथ ही देश के तमाम मौसम कार्यालयों, इसरो,नासा को भी देते हैं। यूएसजीएस के अर्थक्वेक हजार्ड प्रोग्राम के को-ऑर्डिनेटर डॉ. माइकल ब्लेनपाइड उनकी मेल का ना सिर्फ रिप्लाई करते हैं बल्कि उन्हें इस बात के लिए प्रेरित भी करते हैं कि वो जब भी प्रेडिक्शन करें उसकी जानकारी उन्हें ज़रूर दें। शकील अहमद को इस बात का दुःख है कि उनकी इस जानकारी का उपयोग करने को कोई तैयार नहीं है। उनकी भविष्यवाणियां लगातार सच साबित होती आ रही हैं।

  

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