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'पिता-पुत्र की लड़ाई का चुनाव पर असर ?'
समाजवादी पार्टी में पिछले ढाई महीने से वर्चस्व की लड़ाई चल रही है। अहम की लड़ाई से प्रदेश के तमाम मुद्दे बौने हो गए हैं। केवल अपना वर्चस्व साबित करने की होड़ अब ऐसे मुकाम पर पहुंच चुकी है, जहां पिता पुत्र, भाई -भाई व चाचा-भतीजा एक दूसरे के सामने हो गए हैं। इस लड़ाई में पार्टी भी दो फाड़ में दिख रही है। विधानसभा चुनाव के ठीक पहले समाजवादी पार्टी में वर्चस्व की इस लड़ाई ने मतदाताओं को भ्रमित कर दिया है। पार्टी के तमाम नेता तो दो खेमो में बंट गए हैं मगर मतदाता असमंजस में है। पुराने लोग जहां सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के साथ होने की बात कहते हैं तो युवाओं के नेता अखिलेश यादव बन गए हैं। ऐसे में सवाल यह है कि पिता-पुत्र की इस लड़ाई से चुनाव कितना प्रभावित होगा। हमने अपने सर्वे में यही बात लोगों से जानने की कोशिश की।

पदमेश यादव
दुकानदार

यूपी का चुनाव महत्व पूर्ण होगा। इस‍ बार के विधानसभा चुनाव में लोग कंफ्यूज होंगे किसको वोट दें। मुलायम और अखिलेश के बीच विवाद से पार्टी को नुकसान होगा।

अपूर्व श्रीवास्तीव
दुकानदार

इस‍ बार के विधानसभा चुनाव में मुलायम और अखिलेश के वोट बटेंगे। पहले जितने वोट अब सपा को नहीं मिलेंगे। बीजेपी और बसपा भी मैदान में है।

अनमोल श्रीवास्तरव
छात्र

यूपी का चुनाव महत्वैपूर्ण होगा। फूट पड़ती है तो किसी को बहुमत नहीं मिलेगा। अब इस बार का विधानसभा चुनाव महत्वकपूर्ण होगा।

अर्चना गुप्ताे
छात्रा

इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। पहले कभी ऐसा नहीं हुआ था। अब गौर करने वाली बात यह है कि विधानसभा चुनाव में वोट बटेंगे।

उदयवीर यादव
दूध विक्रेता

यूपी का चुनाव महत्वपपूर्ण होगा। इस‍ बार के विधानसभा चुनाव में बाप-बेटे के वोट बटेंगे। सभी असमंजस में होंगे। यहां तक कि वोटर भी।

प्रदीप कुमार
व्यापारी

इस बार के विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव फिर जीतेंगे। अखिलेश ने प्रदेश में खूब विकास करवाया है। यही नहीं, पिछली सरकारों से ज्याशदा काम किया।

बबलू कनौजिया
कर्मी

सीएम ने प्रदेश में खूब विकास करवाया है। यही नहीं, इस चुनाव में अखिलेश का फायदा होगा। इस विवाद से बीजेपी और बसपा भी फायदा लेना चाहेगी।

सुरेश पाल
दुकानदार

बाप बेटे दोनों को नुकसान होगा। यूपी का चुनाव महत्व पूर्ण होगा। फूट पड़ती है तो किसी को बहुमत नहीं मिलेगा।

गंगा सेवक मिश्र
रिटायर्ड कर्मी

जो परिवार नहीं चला सकता है वो पार्टी क्याू चलाएगा। अब समय बदल चुका है। लोग पहले से ज्याीदा समझदार हो गए हैं।

मोहम्मंद इशरार
कर्मी

आपस में लड़ने से दोनों को नुकसान होगा। वोटर पर निर्भर करेगा इस बार का चुनाव। दोनों पार्टी के जिम्मे‍दार लोग हैं।

राम सिंह यादव
प्राइवेट कर्मी

मुलायम को फायदा होगा। नेता जी पार्टी के सुप्रीमो भी है। उन्हों ने पार्टी के लिए बहुत काम किया है। इस बार का चुनाव महत्वापूर्ण होगा।

प्रमोद कुमार
कर्मी

इस‍ बार के विधानसभा चुनाव में बाप-बेटे के वोट बटेंगे। सभी असमंजस में होंगे। यहां तक कि वोटर भी। हर तरीके से चुनाव वोटर पर निर्भर करेगा।

विशाल पाल
छात्र

फूट पड़ती है तो किसी को बहुमत नहीं मिलेगा। मामले में दोनों के वोट बंटेंगे। अब समय बदल चुका है। लोग पहले से ज्यातदा समझदार हो गए हैं।

ठाकुर दिन वर्मा
नौकरी

लगातार सपा में चल रहे झगड़ से अखिलेश की छवि और भी अच्छीा हो गई है। इसका असर चुनाव पर जरूर पडे़गा।

ओ पी सिंह
नौकरी

सपा की दो फाड़ से कोई लाभ नहीं होगा। जब तक ये दोनों पार्टी एक नहीं होंगी तब तक ये चुनाव नहीं जीत सकते हैं।

राजेश कुमार
नौकरी

अगर सपा का सीएम का चेहरा अखिलेश रहे तो चुनाव ठीक होगा और अगर मुलायम का चहरा रहा तो ये चुनाव हार जाएंगे।

फूल चन्द्रस यादव
नौकरी

चुनाव में साइकिल किसका निशान है ये अब तक पता नहीं है। इसकी वजस से चुनाव पर बुरा असर जरूर पड़ने वाला है।

योगेन्द्र भारती
व्यापारी

सपा के झगड़े में अगर मुलायम के पक्ष में साइकिल चिन्हइ रहा तो सपा की हार निश्चित है।

अशोक कुमार
नौकरी

बाप-बेटे की लड़ाई में चुनाव पर असर तो पड़ेगा साथ ही जनता को भी ये सोचना पड़ेगा की वो किसको वोट दें।

रामावध प्रसाद
किसान

जनता काफी समझदार है वो इन विवादों में नहीं पड़ना चाहती है। वो अपना बहुमत चुनाव में ही दिखा देगी।

अशफाक
नौ‍करी

नोट बन्दी के चलते सपा को ज्यादा फायदा मिलेगा पर जो बाप-बेटे में विवाद चल रहा वो सपा की हार का कारण बन सकता है।

महेन्द्र
नौकरी

सबसे ज्यादा तो इस वक्त चुनाव आयोग को परेशानी हो रही है जिसको यह तय करना है कि साइकिल किसकी है।

पंकज
छात्र

सीएम का अबतक का कार्य प्रदेश के लिए उचित रहा है। अगर वो आगे भी सीएम रहे तो ही सपा के जीतने के चांस हैं।

मुन्ना
व्यापारी

जब सपा पार्टी अपने घर के झगड़े ही नहीं निपटा पा रही है तो प्रदेश क्या चलाएगी।

ब्रज किशोर पाण्डेय
पार्षद

सपा में चाहे जितने झगड़ें हो जाए पर आज का युवा सीएम अखिलेश यादव को ही मुख्य मंत्री के पद पर देखना चाहता है किसी ओर को नहीं।

नदीम अहमद
व्यापारी

सपा में हो रहे घमासन से मुस्लिम मतदाता बहुत उधेड़बुन में हैं कि किस ओर जाएं। इस घरेलू कलह से पार्टी को नुकसान होने की संभावना है।

मुहम्‍मद अफसर
अध्यापक

इस बवाल का असर मुस्लिम मतदाता को भ्रमित कर रहा है। जाहिर है वोट का ध्रुवीकरण होगा। जिससे सपा को नुकसान होना तय है।

मुहम्मद यूनुस
रिटायर्ड कर्मचारी

नेता जी मुलायम सिंह का दांव है ये। सीएम अखिलेश के लिए लोगों में सहानुभूति बनाकर चुनाव जीतने की रणनीति है। कामयाब नहीं होंगे।

मुहम्मद अनीस
कर्मी

इस प्रकरण से उत्त र प्रदेश के मुख्यंमंत्री अखिलेश यादव मजबूत हुए हैं। प्रदेश की जनता विकासकार्यों के नाम पर उन्हेंक दोबारा मुख्यशमंत्री बनाएगी।

जाहिद अली
व्यापारी

नेता जी को पार्टी की कमान अखिलेश यादव को दे देनी चाहिए। वो अब अनुभवी नेता हो गए हैं। जनता को विकास दिखा है। वोट तो अखिलेश को मिलेगा।

मकसूद
ड्राइवर

अखिलेश खेमा मुलायम और शिवपाल पर भारी पड़ेगा। वोटर काम देखता है। अब देखना है कि पार्टी में आगे की रणनीति क्या होगी।

अजहर खान
नौकरी

मुलायम सिंह का दांव है। ये अखिलेश शिवपाल की कुश्तीव कराकर अखिलेश को विजेता बनाना चाहते हैं मुलायम। ताकि सांप भी मरे और लाठी भी न टूटे।

मुहम्‍मद यासीन
व्यापारी

इस मामले के चलते अब मुसलमान वोटर बहुत ज्याादा भ्रमित हैं। बसपा के साथ जाएं कि कांग्रेस के साथ जाएं। अगर ऐसा ही चला तो पूरा फायदा भाजपा को ही होगा।

अंसार अली
कारीगर

इस पूरे प्रकरण से सपा को नुकसान ही होगा। एक कहावत है- दो बिल्लियों के झगड़े में फायदा बंदर का ही होता है।

वकील अहमद,
व्यापारी

अखिलेश यादव ने अच्छेर काम किए हैं। इसका फायदा उन्हें मिलेगा। अब जनता दोबारा अखिलेश के चेहरे पर मतदान करेगी।

मुहम्मकद शमीम
व्यापारी

घरेलू कलह और सत्ताद का लालच समाजवादी पार्टी को नुकसान पहुंचाएगा। नेताजी को चाहिए अखिलेश को आगे बढाएं।

इकबाल अहमद
व्यापारी

इस सारे प्रकरण से विपक्षी दलों की ताकत बढ़ेगी और मुलायम अखिलेश दोनों को नुकसान होगा। बीजेपी-कांग्रेस-बसपा भी मैदान में है।

शोएब
दवा व्यापारी

यूपी के अखिलेश बेदाग छवि के व्यतक्तित्व वाले हैं। प्रदेश में विकास किया है। जनता का समर्थन उन्हें मिलेगा। इस बार का चुनाव महत्वपूर्ण होगा।

जुबैर
जुबैर, व्यापारी

जनता इस बार के चुनाव में अखिलेश के काम पर उन्हें वोट देगी। उत्तर प्रदेश को उनके कार्यकाल में विकास को गति मिली है ।

मुहर्रम अली
दुकानदार

जिसके पास साइकिल का निशान होगा वही भारी पड़ेगा। चुनाव आयोग को चाहिए दोनों को अलग अलग निशान दे दें। पता चल जाएगा कौन कितना पानी में है।

अनिल कुमार

युवा सीएम अखिलेश यादव ने अपनी सरकार में प्रदेश की बेहतरी के लिए काम किया है। ईमानदारी छवि से लोगों के बीच वे लोकप्रिय हैं।

राजेश

अखिलेश यादव को दोबारा मौका मिलना चाहिए। युवाओं-गरीबों-महिलाओं के कल्याोण के लिए काफी काम किया है।

गौतम सिंह

अखिलेश के प्रति सहानुभूति है। सपा में जिस तरह से खींचतान चल रही है, उससे अखिलेश यादव और मजबूत हुए हैं।

सिद्धार्थ

शुरुआती दौर में हर क्षेत्र में अखिलेश सरकार हर क्षेत्र में विफल दिखती थी। जनता को उन्हें एक बार फिर मौका देना चाहिए।

अरुण कुमार मिश्र

2017 में बीजेपी की सरकार बनेगी। मोदी सरकार के सराहनीय कार्यों से गरीबों को लाभ पहुंचा है। यूपी में अबकी बार बीजेपी की सरकार।

रोहित शुक्ला

सपा में जिस तरह का माहौल चल रहा है। उससे अखिलेश यादव की छवि लगातार खराब होती जा रही है। इसका लाभ भाजपा को मिलेगा।

राजू गौतम

यूपी में इस बार किसी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिलेगा। इस बार गठबंधन सरकार बनने की संभावना ज्यादा है।

राम बली

यह कह पाना मुश्किल है कि किसको पूर्ण बहुमत मिलेगा। लहर इस समय भाजपा के पक्ष में चल रही है।

तमन्ना अंसारी

देश की कमान संभाल रहे मोदी के फैसलों से देश विश्विस्तर पर चर्चा में है। इस बार भाजपा की सरकार बनेगी और हालात ज्यादा सुधरेंगे।

रविंद्र पटेल

इस विवाद को देखकर नकारात्माक सोच बढ़ती जा रही है। माहौल से ऐसा लग रहा है कि प्रदेश में भाजपा की सरकार बनेगी।

पंकज कुमार

चुनावी समर में सभी पार्टियां अपना माहौल बना रही हैं। ऐसे में सपा का आपसी टकराव माहौल खराब कर रहा है।

समाजवादी पार्टी में चल रही पारिवारिक कलह और वर्चस्व की होड़ में हुए विभाजन का असर विधानसभा चुनाव में दिखना तय है। इससे सबसे ज्यादा प्रभावित समाजवादी पार्टी ही होगी। लोगों का भी मानना है कि पार्टी एक होती तो नतीजे भी अच्छे दिखते लेकिन अब परिवार के साथ पार्टी भी दो हिस्से में दिख रही है। यही नहीं, इस पूरे घटनाक्रम से यह भी साफ हो गया है कि किसी को जनता की समस्या और जनता से ज्यादा मतलब नहीं है। लक्ष्य सिर्फ सत्ता हासिल करना है। इस कारण से लोग मतदान के वक्त इस बात पर जरूर सोचेंगे। इससे सपा को नुकसान होना तय है।
एंटी रोमियो स्क्वायड सही या गलत ?
सियासी दलों की जुमलेबाजी कितनी जायज
आप अपने विधायक से कब मिले...
पार्टियों की कथनी-करनी में कितना अंतर
जनता दागियों को करेगी माफ या साफ
क्‍या मुस्लिम विरोधी हैं अखिलेश यादव
साइकिल बिन कितनी दूर जायेगी सपा ?
इस बार किसकी सरकार ?
नोटबंदी: कितना सफल कितना फेल?

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