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  • नोटबंदी: कितना सफल कितना फेल?
  • कालेधन पर सर्जिकल स्ट्राइक यानी नोटबंदी को तीस दिसंबर को पचास दिन से दो दिन ज्यादा यानी 52 दिन हो गए। इन 52 दिनों में नोटबंदी का असर हर तरफ देखने को मिला। चौका-चूल्हा करने वाली गृहणियों से लेकर दफ्तर में काम करने वाले अधिकारी तक नोटबंद से प्रभावित हुए। अपने खाते से ही पैसा निकालने के लिए लोगों को घंटों लाइन तक लगानी पड़ी लेकिन अब स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। इतनी परेशानी झेलने के बाद अब पचास दिन के बाद हमने लोगों से यह जानने की कोशिश की कि आखिर इस नोटबंदी से वह कितना सहमत है। हमने प्रयास किया कि हर आयु वर्ग के लोगों से उनकी राय ली जा सकी कि आखिर वह नोटबंदी को सफल मानते हैं या असफल।
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  • हमने अपने सर्वे में राजधानी के कपूरथला,हजरतगंज, ठाकुरगंज, चौक, निशातगंज और इंदिरानगर आदि क्षेत्रों में लोगों की राय जानी। पचास से ज्यादा लोगों की राय ली गई। इसमें पुलिसकर्मियों से लेकर दिहाड़ी मजदूर तक शामिल किए गए। इसमें करीब दर्जन भर लोग सरकार के इस फैसले से असहमत दिखे। यानी करीब बीस फीसद लोग नोटबंदी को सही कदम नहीं मानते हैं। इसके लिए उनके अपने तर्क भी हैं। मगर तमाम परेशानी, लंबी लाइन और दिक्कतों के बाद भी अस्सी फीसद लोग प्रधानमंत्री के फैसले के साथ दिखते हैं। यानी नोटबंदी पर हमारे सर्वे में जनता सरकार के साथ ही नजर आती है।