Home News The Promise Of Modi Government In Promotion Before Elections

पिछले 70 साल के दौरान पाकिस्तान ने अपने देश और भारत में जम कर खूनी खेल खेला: इंद्रेश कुमार

आज शाम 5:00 बजे हार्दिक पटेल सोमनाथ मंदिर दर्शन के लिए जाएंगे

देश के अगले पीएम होंगे राहुल गांधी: सुधींद्र कुलकर्णी

लखनऊ: जिप्पी तिवारी के बेटे के सभी हत्यारों की हुई गिरफ्तारी

असम में महसूस किए गए भूकंप के झटके

क्‍या हुआ तेरा वादा...

Editorial | 06-Oct-2017 15:30:24 | Posted by - Admin
   
The Promise of Modi Government in Promotion before elections

दि राइजिंग न्‍यूज

आउटपुट डेस्‍क।

 

चुनाव प्रचार के दौराव वर्ष 2013 में पीएम नरेंद्र मोदी ने देश की युवा पीढ़ी से यह कहा था कि यदि उनकी पार्टी सत्‍ता में आती है तो एक करोड़ नौकरियों के अवसर पैदा होंगे। इस वादे के करीब एक साल बाद यानि 2014 में उनकी पार्टी दिल्‍ली की सत्‍ता पर काबिज हो गई।

 

क्‍या ऐसा हुआ... शायद नहीं।

 

इसी वर्ष यानि 2017 में भारत के आर्थिक सर्वे ने संकेत दिया था कि चीजें कुछ ठीक नहीं चल रही हैं और रोज़गार वृद्धि में सुस्ती है। आंकड़ों के मुताबिक बेरोज़गारी की दर 2013-14 में 4.9 प्रतिशत से बढ़कर 5 प्रतिशत हो गई है, लेकिन ये तस्वीर वास्तव में और भी चिंताजनक हो सकती है।

 

हाल ही में अर्थशास्त्री विनोज अब्राहम की एक स्‍टडी जारी की गई है, जिसमें लेबर ब्यूरो द्वारा इकट्ठा किए गए नौकरी के आंकड़ों को इस्तेमाल किया गया है।

 

रोजगार वृद्धि में बेतहाशा कमी आई

 

अध्ययन में कहा गया है कि 2012 और 2016 के बीच भारत में रोज़गार वृद्धि में बेतहाशा कमी आई है। इस अध्ययन के अनुसार, सबसे चिंताजनक बात है कि 2013-14 और 2015-16 के बीच देश में मौजूदा रोजगार में भी भारी कमी आई है। आजाद भारत में शायद पहली बार ऐसा हो रहा है।

 

कृषि का क्षेत्र

 

कृषि क्षेत्र में, जहां भारत की आधी आबादी रोजी रोज़गार के लिए इसी पर निर्भर है और बहुत सारे लोग ज़मीन के छोटे-छोटे हिस्सों पर फसल उगा रहे हैं, नौकरियां ख़त्म हो रही हैं। इस पर भी सूखे और फसल की सही क़ीमत न मिल पाने से लोग खेती किसानी से दूर जा रहे हैं और निर्माण और ग्रामीण मैन्युफ़ैक्चरिंग में रोज़गार तलाश रहे हैं।

 

नया रिकॉर्ड

 

मैककिंसे ग्लोबल इंस्टीट्यूट के एक अध्ययन के मुताबिक, 2011 से 2015 के बीच 2.6 करोड़ नौकरियां ख़त्म हो गई हैं। उधर, लगातार छह तिमाही से गिरती हुई जीडीपी वृद्धि ने बीते अप्रैल-जून की तिमाही में एक नया रिकॉर्ड बनाया है। पिछले तीन सालों में जीडीपी में सबसे कम 5.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

 

पिछले साल हुई नोटबंदी और इस साल जुलाई में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) ने आंशिक रूप से रोज़गार सृजन में गिरावट में घी का काम किया है।

 

इसके कारण सर्वाधिक रोज़गार सृजन वाले कृषि, निर्माण और निज़ी व्यापार वाले क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हुए हैं और रोज़गार को भारी झटका लगा है।

 

2.6 करोड़ लोग रोज़गार की तलाश में

 

एक अंग्रेजी अखबार के विश्‍लेषण के अनुसार, "धातु, पूंजीगत माल, खुदरा बाज़ार, ऊर्जा, निर्माण और उपभोक्ता सामान बनाने वाली 120 से अधिक कंपनियों में नियुक्तियों की संख्या गिरी है।" अख़बार को एक शीर्ष एचआर एक्ज़ीक्युटिव ने बताया, "ये कंपनियों की विस्तार योजनाएं और अल्पकालिक विकास की नाउम्मीदी को दिखाता है।"

 

2030 तक करोड़ों भारतीय नौकरी को तैयार होंगे

 

भारत का आर्थिक सर्वे कहता है कि रोज़गार सृजन भारत की “एक मुख्य चुनौती” है। साल 2030 तक हर साल 1.2 करोड़ भारतीय नौकरी पाने की क़तार में खड़े होने लगेंगे।

 

फ़िलहाल 2.6 करोड़ भारतीय नियमित रोज़गार की तलाश में बैठे हैं। ये संख्या मोटा मोटी ऑस्ट्रेलिया की आबादी के बराबर है। भारत में नौकरी की अनोखी समस्या है। पश्चिम में बेरोज़गारों की एक निश्चित समय में एक निश्चित संख्या दर्ज होती है, जोकि बेरोज़गारी का एक पैमाना होता है। इसके उलट भारत में ऐसी प्रणाली नहीं है।

 

"जो मित्र दि राइजिंग न्यूज की खबर सीधे अपने फोन पर व्हाट्सएप के जरिए पाना चाहते हैं वो हमारे ऑफिशियल व्हाट्सएप नंबर से जुडें  7080355555








TraffBoost.NET

Rising Stroke caricature
The Rising News Public Poll





Flicker News

Most read news

 


Most read news


Most read news




sex education news