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दि राइजिंग न्यूज़

आउटपुट डेस्क।

 

इस दुनिया को परमाणु युद्ध से बचाने वाले स्टा निसल्व पेट्रोव अब नहीं रहे। मंगलवार को उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। आपको बता दें कि उनके एक फैसले की वजह से यूएस और सोवियत संघ के बीच परमाणु युद्ध होते-होते बचा।

दरअसल साल 1983 की 26 सितंबर की बात है। उस वक्त निसल्व सोवियत यूनियन के सीक्रेट कमांड सेंटर में ड्यूटी ऑफिसर थे। यह सीक्रेट कमांड सेंटर मॉस्को के बाहर बना हुआ था। इस सेंटर का मुख्य काम था कि यूएस की तरफ से छोड़े जाने वाली सेटलाइट्स को पहले से देख लेना। उनको इन बारे में एक अलार्म से पता लगता था। उस दिन कंप्यूटर ने चेतावनी दी कि पांच ब्लास्टिक मिसाइल अमेर के बेस से छोड़ी गई हैं।

 

यह अलार्म देखकर निसल्व चक्कर में पड़ गए। कुछ देर तक तो वे सोच ही नहीं पाए कि क्या किया जाए। कुछ देर बाद उन्होंने छानबीन शुरू की। जांच पड़ताल के बाद निसल्व तय कर पाए कि जो अलार्म आया है वह गलत है लेकिन उस वक्त कुछ भी पक्का नहीं था सिर्फ अंदाजा था।

अगर यह अंदाज़ा गलत होता तो मिसाइल्स काफी नुकसान पहुंचा सकती थीं। बाद में जब जानकार लोगों ने इस पूरी घटना का अध्यन किया तो पाया कि निसल्व की वजह से एक बड़ी विपत्ति को टाला जा सका।

 

अपनी उस सूझबूझ के बारे में बात करते निसल्व ने कहा था कि जब लोग युद्ध क्षेत्र में होते हैं तो कोई भी सिर्फ पांच मिसाइल दागकर इसकी शुरुआत नहीं करता। निसल्व का मानना था कि वह जो अलार्म आया था वह सूरज की किरणों को मिसाइल समझ बैठा था।

निसल्व के इस कारनामे के बारे में लोगों को पहले नहीं पता था लेकिन 1998 में आई एक किताब में यह सब सामने आया। उसके बाद उनको कई अवार्ड भी मिले। अमेरिका ने भी उनको सम्मानित किया था।

 

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