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Guest Column | 27-Jul-2016 11:34:03 AM
चरैवेति-चरैवेति का चरितार्थ



 


डॉ. दिलीप अग्निहोत्री

राज्यपाल के रूप में दो वर्ष पूरे करने की पूर्व-संध्या पर रामनाईक पत्रकारों से मुखातिब थे। इसमें वार्ता का मुख्य विषय उनका कार्यवृत्त था। सुर्खियों भी इसी से संबंधित थी। लेकिन सन्दर्भ से जुड़े उनके जीवन के कई पहलू भी चर्चा में आ गए। वार्ता का यह पक्ष दिलचस्प था। इसमें स्वास्थ, सक्रियता, लेखन, दिनचर्या, बचपन आदि अनेक पहलू थे। इसके निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि राज्यपाल का चरैवेति-चरैवेति के आदर्श पर पूरा विश्वास है। बाल्यकाल से लेकर आज तक वह इसी आदर्श पर अमल कर रहे है। कभी थकान का अनुभव नहीं किया।


राम नाईक मानते हैं कि प्राचीन वाड्.मय की सूक्तियों में जीवन के लिए उपयुक्त दर्शन है। ऐतरेय की सूक्तियों में कई जगह उल्लेख है कि एक राजा को आत्मोन्नति का बोध कराने के लिए इन्द्र देव ने मनुष्य का रूप धारण किया था। अच्छे भाग्य का अधिकारी बनने के लिए सतत् चलते रहने का उपदेश देते हुए इंद्र कहते है।


आस्ते भग आसीनस्य

उध्र्वम तिष्ठति तिष्ठतः

शोते निपद्य मानस्य

चराति चरतो भगः।

चरैवेति चरैवित।।

अर्थात- बैठे हुए व्यक्ति का भाग्य भी बैठ जाता है।

खड़े हुए व्यक्ति का भाग्य

वृद्धि की ओर उन्मुख होता है।

सो रहे व्यक्ति का भाग्य भी सो जाता है

किन्तु चलने वाले का भाग्य

प्रतिदिन बढ़ता जाता है।

अतः तुम चलते रहो। चलते रहो।।

उदाहरण के रूप में इन्द्र आगे कहते हैं -

चरन्वै मधुविन्दति

चरन्स्वादुमुदुम्बरम

सूर्यस्य पश्य श्रेमाणं

यो न तन्द्रयते चरंश

चरैवेति। चरैवेति।।

अर्थात-मधुमक्खियां धूम -धूम कर

शहद जमा करती है।

पक्षी मीठे फल खाने के लिए

सदैव भ्रमण करते रहते हैं

वह सूरज कभी सोता नहीं

चलता रहता है -

इसीलिए वन्दनीय है

अतः हे मानव

तुम चलते रहो! चलते रहो।।

राम नाईक इसी से प्रभावित हुए। फिर आजीवन चरैवेति-चरैवेति को चरितार्थ करने का फैसला कर लिया। आज भी उनकी दिनचर्या इसी का प्रमाण है।


उन्होंने अपनी दिनचर्या भी बताई। कहा कि वह बहुत जल्दी नहीं उठते। वहां उपस्थित पत्रकारों को लगा कि वह सुबह उठने का समय आठ-नौ कुछ बताने वाले हैं। लेकिन रामनाईक ने तत्काल संशय का समाधान कर दिया। कहा कि वह सुबह साढ़े-पांच बजे उठ जाते है। अर्थात सूर्योदय से पहले उठ जाने को भी वह जल्दी ना उठना मानते हैं। सुनने वालों के चेहरे पर आश्चर्य भरी मुस्कुराहट तैर गई। राम नाईक ने यह भी बताया कि वह दोपहर में कभी विश्राम नहीं करते। रात में ग्यारह बजे तक सो जाते हैं। शेष पूरे समय में अपने को व्यस्त रखते हैं।


अच्छे शारीरिक मानसिक स्वास्थ पर प्रश्न हुआ। रामनाईक अपने बचपन की ओर लौट गए। कहा कि अपने गांव के जिस स्कूल से उनकी शिक्षा प्रारम्भ हुई, वहां पच्चीस सूर्य नमस्कार करने होते थे। कक्षा दस तक वह यहां पढ़े। इस प्रकार योग, सूर्यनमस्कार उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया। इसी को वह अच्छे स्वास्थ का कारण मानते है।


सतत् व्यस्त रहना और लोगों से मिलना जुलना, यथा-संभव उनकी समस्याओं के समाधान का प्रयास करना भी उन्हें अच्छा लगता है। इससे उन्हें संतुष्टि मिलती है। इस प्रवृत्ति का भी वह कारण बताते है। अध्ययन के दौरान वह ट्यूशन करते थे, अखबार भी बांटे, जबकि उनके पिता गांव के स्कूल में हेडमास्टर थे। रामनाईक को जमीन से जुड़े रहना पसन्द था। बाद में विधायक, सांसद, मंत्री बने लेकिन जमीन से जुड़ाव की जो प्रवृत्ति थी, उसे कभी नहीं छोड़ा।


महाराष्ट्र में साकाल नामक समाचार पत्र के कई-संस्करण निकलते है। मराठी के इस अखबार ने कुछ वर्ष पहले एक विशेष कालम शुरू किया था। इसमें महाराष्ट्र के चार गण्यमान राजनेताओं से लिखने का आग्रह किया गया। ये थे शरद पवार, मनोहर जोशी, सुशील कुमार शिन्दे और रामनाईक। इनमें पवार, जोशी और शिन्दे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रह चुके थे। अखबार मराठी में और महाराष्ट्र का था। कॉलम लिखवाने का एक आधार महाराष्ट्र का पूर्व मुख्यमंत्री होना भी रहा होगा। जबकि राम नाईक का अनुभव व महाराष्ट्र व राष्ट्र की राजनीति में किसी से कम महत्व नहीं था। इसलिए उनसे भी साकाल में लिखने का आग्रह किया गया था। एक क्रम के अनुसार इन चारों दिग्गजों के लेख साकाल में प्रकाशित होते थे। राम नाईक के इसमें प्रकाशित सत्ताइस लेख चरैवेति-चरैवेति शीर्षक से प्रकाशित हुए। अभी केवल यह मराठी में प्रकाशित है। हिन्दी, अंग्रेजी, उर्दू और गुजराती में इसका अनुवाद चल रहा है। कुछ समय बाद इन चारों भाषाओं के संस्करण प्रकाशित होने की उम्मीद है। चरैवेति-चरैवेति के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राम नाईक को पत्र लिखकर बधाई दी है। महाराष्ट्र और देश में उनकी राजनीति की प्रशांसा की है। वस्तुता इसमें ऐसे अनेक तथ्यों का उल्लेख है जो खासतौर पर विधार्थियों, नौजवानों को प्रेरणा देने वाले है। उन्हें इससे स्वस्थ व सक्रिय रहने के साथ देश व समाज की सेवा की प्रेरणा मिलेगी।

 

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