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Spiritual | 11-Jan-2017 01:00:29 PM
श्रीमद्भगवद्गीता के उपेदश से बदलेगा जीवन



 दि राइजिंग न्‍यूज

गीता सभी वेदों व शास्त्रों का सार है। श्रीमद्भगवद्गीता ज्ञान का अथाह सागर है। मनुष्य को सात्विक जीवन की प्रेरणा गीता ग्रंथ से ही मिलती है। गीता समस्त पापों को नष्ट करने का माध्यम है। आज के वातावरण में भी गीता के ये उपदेश बहुत मायने रखते हैं। भगवान श्रीकृष्‍ण के मुखारविंदु से निकले ये उपदेश प्रत्‍येक व्‍यक्ति के जीवन में अप्रत्‍याशित बदलाव करने वाले हैं।

गीता में कहा गया है कि संदेह यानी शक ऐसी चीज है जिसकी वजह से कोई भी एक खुश नहीं रह सकता है। श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार कहा जाता है कि एक संदेह करने वाले इंसान को दुनिया में कभी भी शांति नहीं मिलती है।

जिंदगी में चाहे जो भी समय आए हमें खुद पर विश्वास रखना चाहिए। लाइफ में कुछ भी बना जा सकता है अगर खुद पर विश्वास रखकर काम किया जाए।

गीता में कहा गया है कि क्रोध मनुष्य का दुश्मन है। जब भी मनुष्य गुस्सा करता है तो वो सोचने समझने की शक्ति खो देता है। एक तरह से गुस्सा ही किसी भी व्यक्ति की असफलता का कारण बनता है।

मन पर नियंत्रण रखने को भगवान श्रीकृष्‍ण ने गीता में कहा है। मन पर नियंत्रण बहुत जरूरी है। जो इस पर नियंत्रण नहीं रखता है उनके वो शत्रु की तरह व्यवहार रखता है।

 

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