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UP | 9-Jan-2017 04:25:39 PM
यूपी में उभरता नया सियासी पता, सात बंदरिया बाग

  • अखिलेश और मुलायम की जंग के बीच नया मसाला



 

दि राइजिंग न्‍यूज

09 जनवरीलखनऊ।

यूं तो हर किसी के घर का पता उसके लिए खास होता है लेकिन राजनीति में कुछ पते बड़े राजनीतिक प्रतीक बना जाते हैं। सात लोक कल्याण मार्ग (पहले रेसकोर्स रोड), 10 जनपथ और 10 डाउनिंग स्ट्रीट केवल बंगलों के पते भी नहीं हैं। ये सभी अपने-अपने संदर्भों में राजनीतिक सत्ता की पहचान बन चुके हैं। इसी तरह उत्तर प्रदेश की राजनीति में पिछले कुछ महीनों से एक नया पता राजनीतिक रसूख हासिल करता नजर आ रहा है।

सपा संस्थापक और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव के खिलाफ राजनीतिक महाभारत लड़ रहे अखिलेश यादव का रणनीतिक अड्डा बना है, सात बंदरिया बाग। एक जमाने में लखनऊ के चीफ टाउन प्लानर का दफ्तर रहा ये बंगला सपा के पारिवारिक कलह के बाद पूरे देश में चर्चा में है। मीडिया रिपोर्ट और राजनीतिक जानकारों के अनुसार यह बंगला फिलहाल अखिलेश यादव के वॉर रूमके तौर पर काम कर रहा है।

पिछले साल अक्टूबर में अखिलेश यादव ने सात बंदरिया बाग बंगले में जनेश्वर मिश्र ट्रस्ट का उद्घाटन किया। समाजवादी पार्टी के अग्रणी नेता माने जाने वाले स्वर्गीय मिश्र को सपाई छोटे लोहिया कहते थे। राम मनोहर लोहिया के समाजवादी विचारों को समावजादी पार्टी अपना विचारधार के तौर पर पेश करती रही है। साल 2013 में बनाए गए इस ट्रस्ट के वर्तमान अध्यक्ष अखिलेश यादव हैं।

इस इलाके का नाम बंदरिया बाग यहां स्थित चिड़ियाघर के कारण पड़ा। लखनऊ में 1921 में चिड़ियाघर की स्थापना की गयी थी जिसके बाद स्थानीय लोग इस इलाके को बंदरिया बागकहने लगे। जब चिड़ियाघर बनाया गया था तो इलाके में जंगल था, रिहाइश नहीं। वर्तमान में ये इलाका लखनऊ के सबसे महत्वपूर्ण इलाकों में गिना जाता है। वर्तमान मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का घर और दफ्तर भी यहीं है।

टाउन प्लानिंग विभाग ने इस बंगले को 2014 में खाली किया। 2015 में राज्य सरकार ने इस बंगले को जनेश्वर मिश्र ट्रस्ट को आवंटित कर दिया गया। इस बंगले में जनेश्वर मिश्र ट्रस्ट को उस समय स्थांतरित किया गया जब अखिलेश और उनके चाचा शिवपाल यादव के बीच तकरार खुलकर सामने आने लगी थी।

अखिलेश को हटाकर शिवपाल को सपा की यूपी इकाई का अध्यक्ष बना जा चुका था। जब शिवपाल ने अखिलेश के कुछ चार नेताओं को अनुशासनहीनता के आरोप में पार्टी से निकाला तो उन्हें सीएम द्वारा जनेश्वर मिश्र ट्रस्ट में ही नियुक्त किया गया। इन चार नेताओं सजंय लाठर, सुनील साजन, आनंद भदौरिया और उदयवीर सिंह को अखिलेश की 2012 में आयोजित रथ यात्रा का आयोजक माना जाता है।

ज्यों-ज्यों अखिलेश बनाम मुलायम-शिवपाल की लड़ाई तेज होती गयी राज्य की राजनीति में इस बंगले की चर्चा बढ़ती ही जा रही है। जब पिता मुलायम सिंह यादव ने अखिलेश द्वारा सौंपी गयी लिस्ट में से करीब एक तिहाई नामों को अंतिम मंजूरी न देकर 325 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की तो अखिलेश ने 235 उम्मीदवारों की अपनी लिस्ट जारी कर दी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ये लिस्ट अखिलेश ने इसी बंगले में अपने विश्वस्त सहयोगियों के संग बैठकर तैयार की थी। मीडिया में यहां तक कहा गया कि इस लिस्ट को अखिलेश के ही किसी करीबी ने जानबूझकर मीडिया में लीक किया।

सात, बंदरिया बाग के ठीक पीछे ही सपा का कार्यालय है। पार्टी का प्रदेश कार्यालय अभी तो अखिलेश यादव के समर्थकों के कब्जे में है। अखिलेश और रामगोपाल यादव ने अपनी तरफ से पार्टी का राष्ट्रीय अधिवेशन बुलाकर शिवपाल को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा दिया। अखिलेश ने शिवपाल की जगह नरेश उत्तम को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। वहीं मुलायम सिंह यादव ने साफ किया है कि वो अभी भी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और शिवपाल प्रदेश अध्यक्ष। मुलायम परिवार की राजनीतिक कलह किस अंजाम को पहुंचेगी ये तो वक्त बताएगा लेकिन इतना तय है कि प्रदेश में फरवरी-मार्च में होने वाले चुनाव और उसके बाद भी 7 बंदरिया बाग का अहम भूमिका निभाने वाला है।

 

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