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UP | 9-Jan-2017 12:50:12 PM
बीजेपी को उसके सहयोगियों से डर

  • सहयोगी दलों के साथ सीटों पर दिख रही रार
  • अपना दल में आंत्रिक कलह परेशानी का सबब



 


दि राइजिंग न्‍यूज ब्‍यूरो

09 जनवरी, लखनऊ।

यूपी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर टिकट बंटवारे के मसले पर बीजेपी के सहयोगी दल उसके लिए परेशानी का सबब बन सकते हैं। दरअसल सूत्रों के मुताबिक राज्‍य में बीजेपी की सहयोगी अपना दल और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (एसबीएसपी) ने पांच दर्जन से अधिक सीटों पर लड़ने की दावेदारी की है। इसी बात ने बीजेपी की परेशानी में डाल दिया है।

दरअसल हालिया दौर में बिहार चुनाव में झटका झेलने और वहां पर सहयोगी दलों का हश्र देखने के बाद बीजेपी इस बार घटक दलों के लिहाज से कोई बड़ा रिस्‍क लेने के मूड में नहीं दिखती। इसलिए भाजपा एक दर्जन से अधिक सीटें देने के मूड में नहीं है। अपना दल के एक नेता का कहना है कि लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी को दो सीटें दी गईं और वह दोनों सीटों पर जीते। ऐसे में उसको एक दर्जन सीटें ही क्‍यों। सीटों की डिमांड के अलावा अपना दल में आंत्रिक कलह भी भाजपा के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है।

 

अपना दल में कलह ठीक नहीं 
एनडीए गठबंधन के एक प्रमुख सहयोगी अपना दल में लंबे वक्‍त से मां और बेटी के बीच वर्चस्‍व की जंग छिड़ी हुई है। अपना दल के यूपी में दो सांसद हैं और इसकी नेता अनुप्रिया पटेल मोदी सरकार में मंत्री हैं। हालांकि उनकी मां कृष्‍णा पटेल और उनके बीच अनबन की स्थिति है।

माना जा रहा है कि कृष्‍णा पटेल मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव के संपर्क में भी हैं और जदयू के साथ भी उनकी बातचीत चल रही है। भाजपा यह कतई नहीं चाहेगी कि अपना दल के संस्‍थापक सोनेलाल पटेल की पत्‍नी और केन्‍द्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल की मां कृष्‍णा पटेल गठबंधन से अलग रहें। इसका खामियाजा अपना दल को तो भुगतना पड़ेगा ही, भाजपा के लिए भी फायदेमंद नहीं है।

 

कुर्मी वोटों पर भाजपा की नजर

बीजेपी के पूर्वांचल में कुर्मी और इसके समकक्ष जातियों को साधने के लिहाज से भी अपना दल में फूट परेशानी की बात है। पिछड़ी जातियों के वोटबैंक साधने की गरज से ही भाजपा ने केशव प्रसाद मौर्य को यूपी की कमान सौंपी है। उधर अपना दल के दो धड़े में बंटने से बीजेपी को बहुत लाभ नहीं दिखता।

इन वजहों से वह अपना दल को बहुत ज्‍यादा सीटें देने के मूड में फिलहाल नहीं दिखती। भाजपा चाहती है कि पहले इन मां-बेटी का झगड़ा शांत हो जाए पिफर सीटें बांटी जाएं। सूत्रों के मुताबिक भाजपा के दबाव में ही अनुप्रिया पटेल ने अपनी मां कृष्‍णा पटेल के पास समझौते का एक प्रस्‍ताव भेजा है। प्रस्‍ताव का परिणाम अभी तक सामने नहीं आया है।

दूसरी तरफ एसबीएसपी के अध्‍यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने भी बीजेपी के साथ कुछ समय पहले गठबंधन किया था और पार्टी पूर्वी उत्‍तर प्रदेश में 20 सीटें लड़ने की इच्‍छुक है। वह दावा भी करते रहे हैं कि बीजेपी ने उनको डेढ़ दर्जन से अधिक सीटों का आश्‍वासन दिया है।

बीजेपी के लिए राहत की बात यह है कि पूवी उत्‍तर प्रदेश में अंतिम चरणों में वोट डालेंगे। ऐसे में पूर्वांचल में प्रभाव रखने वाली इन पार्टियों के साथ सीटों को तय करने के मामले में बीजेपी के पास अभी पर्याप्‍त वक्‍त है। इस संबंध में जब यूपी भाजपा अध्‍यक्ष केशव प्रसाद मौर्य से पूछा गया तो उन्‍होंने कहा कि सीटों को लेकर कोई झगड़ा नहीं है। यह हमारा आपसी मामला है। मौर्य ने दावा किया कि बिना किसी रार के मिल बैठकर समांजस्‍य बिठा लिया जाएगा।

 

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