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Spiritual | 29-Nov-2016 11:32:31 AM
गरुड़ पुराण से जीना सीखें



 


दि राइजिंग न्‍यूज

गरुड़ पुराण में भगवान विष्णु अपने मुखारविंद से कहते हैं, जो धरतीवासी इस तरह के कर्म करता है उसके लिए नर्क के दरवाजे खुले रहते हैं। देखिए, जानें अनजाने कई आप तो नहीं कर रहे ऐसे कर्म। ब्राह्मण, भ्रूण, नवजात और धर्म-कर्म करने वाले की हत्या करने वाला नरकगामी होता है। महिलाओं का मान-सम्मान करें। उनके प्रति गलत भाव रखने वाला लोक और परलोक में दुख भोगता है। 

 

पुराण में कहा गया है कि गर्भवती स्त्री को मृत्यु के घाट उतारने वाला भी महापापी होता है। उसे कभी जन्नत का सुख नसीब नहीं होता। विश्वास एक ऐसी नींव है, जिसके सहारे दुनिया चलती है। कभी भी किसी से विश्वासघात न करें। किसी भी धार्मिक स्थान, वेद और पुराणों के प्रति मन में बुरे भाव लाना अथवा स्वयं के धर्म को बड़ा और दूसरे को छोटा समझना नर्क का अधिकारी बनाता है। धोखाधड़ी, गालीगलौज और अहसानफरामोशी करने वाला नर्क की कठोर यातनाएं झेलता है।

 

क्षमता होने पर भी जो व्यक्ति किसी की मदद नहीं करता और कमजोर पर अपनी ताकत आजमाता है। वह घोर नर्क भोगता है। शास्त्र कहते हैं अतिथि देवो भव: अर्थात घर आया मेहमान देव तुल्य है। घर आए मेहमान का उचित आदर-सम्मान न करना, उसे जल-पान करवाए बिना भेजना अपराध है। अपने निजी स्वार्थ के लिए दुसरों को दुख देने वाला, नर्क में कड़ी यातनाएं भोगता है। भगवान के भक्त शराब और मांस का न तो व्यापार करते हैं और न सेवन। जीवन और मरण ईश्वर के बनाए हैं, इन्हें लेने और देने का हक सिर्फ और सिर्फ परमात्मा को है।


अपने निजी स्वार्थ के लिए जानवरों की बली देना पापों का भागी बनाता है। प्रकृति से ही जीवन है, उसके साथ खिलवाड़ करने वाला नरकवासी बनता है। परिवार का निर्माण तभी करें जब आप उनकी जिम्मेदारियां उठाने के लायक हों। जो व्यक्ति घर-परिवार की अवश्यकताओं का ध्यान न रखकर स्वयं के हित के बारे में सोचता है, ऐसा पापी नरक में स्थान पाता है।

 

 

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