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ट्रांसजेंडर्स, युवा, महिलाएं हैं एड्स की गिरफ्त में, पढ़िए एचआइवी पर पूरी रिसर्च

National | 01-Dec-2017 16:45:15 | Posted by - Admin
   
World Aids Day Celebrated across the Globe

 

दि राइजिंग न्यूज़

आउटपुट डेस्क।

“एड्स”, एक ऐसा शब्द जिसको सुनकर लोगों के मन में अजीब-अजीब ख्याल आने शुरू हो जाते हैं। हालांकि एड्स होने के कई कारण होते हैं किन्तु हमारा समाज, जागरुकता की कमी के कारण एड्स से पीड़ित व्यक्ति को घृणित दृष्टि से देखता है। लोगों के मन में एचआइवी संक्रमण प्रति जागरुकता बढ़ाने के उद्देश्य से हर वर्ष एक दिसंबर विश्व एड्स दिवस मनाया जाता है।

भारतीय महिलाएं सबसे ज्यादा पीड़ित

भारत में करोड़ों लोग इस बीमारी से जूझ रहे हैं जिसमें से अधिकतर महिलाएं हैं। राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (NACO) की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2015 तक भारतीय महिलाओं में एचआईवी का प्रसार 0.22 प्रतिशत है। एचआईवी/एड्स से ग्रस्त 25 लाख लोगों में से करीब 10 लाख महिलाएं हैं। भारत में एक एचआईवी पॉजिटिव महिला होने का मतलब है, समाज का कलंक और नर्क सी जिंदगी।

ट्रांसजेंडर्स हुए सबसे ज्यादा AIDS के शिकार

Worldbank.org के मुताबिक, 2012 के सर्वे में 2.61 प्रतिशत महिला सेक्स वर्कर्स को एड्स हुआ, वहीं पुरुष के साथ सेक्स करने वाले 5.01 प्रतिशत पुरुषों को एड्स हुआ। 5.91 प्रतिशत नशीली दवाओं के इंजेक्शन लगाने वालों को और सबसे ज्यादा 18.80 प्रतिशत ट्रांसजेंडर्स को एड्स हुआ।

युवा वर्ग भी नहीं है अछूता

दुनिया में एड्स संक्रमित व्यक्तियों में भारत का तीसरा स्थान है। यह एक ऐसी बीमारी है जो संक्रमित व्यक्ति की आर्थिक, सामजिक और शारीरिक तीनों तरह से नुकसान पहुंचती है। चिंता की बात है कि यह युवाओं को तेजी से अपनी चपेट में ले रहा है। चौंकाने वाला तथ्य यह भी है कि दुनिया में एचआइवी से पीड़ित होने वालों में सबसे अधिक संख्या किशोरों की है। यह संख्या 20 लाख से ऊपर है। यूनिसेफ की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2000 से अब तक एड्स से पीड़ित होने के मामलों में तीन गुना इजाफा हुआ है।

एड्स से पीड़ित दस लाख से अधिक किशोर सिर्फ छह देशों में रह रहे हैं और भारत उनमें एक है। शेष पांच देश दक्षिण अफ्रीका, नाइजीरिया, केन्या, मोजांबिक और तंजानिया हैं।

सामने आए जो 1997 में दर्ज 35 लाख मामलों के मुकाबले लगभग आधे हैं। पुरी दुनिया में कुल 7.61 करोड़ लोग एचआइवी से संक्रमित थे। इसी विषाणु से एड्स होता है। 1980 में इस महामारी के शुरू होने के बाद से अब तक इससे करीब 3.5 करोड़ लोगों की मौत हो चुकी है।

HIV पॉजिटिव होना जरूरी नहीं एड्स है

एचआईवी पॉजिटिव होने का मतलब लोग एड्स समझते हैं। लेकिन ऐसा नहीं है। जो एचआईवी पोजिटिव हैं उन्हें एड्स नहीं हुआ है। HIV (ह्यूमन इम्यूनो डिफिशिएंसी वायरस) ऐसा वायरस है जिसकी वजह से एड्स होता है। जिस इंसान में इस वायरस की मौजूदगी होती है, उसे एचआईवी पॉजिटिव कहते हैं।

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