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दि राइजिंग न्यूज़

नई दिल्ली।

 

तेलंगाना सरकार ने साफ कहा है कि अगर अल्पसंख्यकों को सरकारी नौकरियों और शिक्षा में 12 फीसदी आरक्षण पर केंद्र की रजामंदी नहीं मिलती है तो वह सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी। राज्य के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने खुद कोर्ट जाने की बात कही है।

 

दरअसल, ये मुद्दा तेलंगाना विधानसभा में उठा, जहां सीएम ने कहा कि सरकारी नौकरियों और शिक्षा में अल्पसंख्यकों को 12 फीसदी आरक्षण दिए जाने की मांग प्रधानमंत्री के सामने रखी गई है। 

उन्होंने कहा कि वे केंद्र से गुजारिश करते हैं कि जल्द ही इस पर फैसला ले और अगर इस मांग को ठुकराया जाता है तो वे सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। साथ ही अगर उन्हें इसके लिए पीएम से मुलाकात भी करनी पड़ी तो वे यह भी करेंगे। बता दें साल 2014 में जब टीआरएस ने अपना चुनावी घोषणा पत्र जारी किया था तब उसमें मुस्लिम और बाकी अल्पसंख्यकों को सरकारी नौकरियों और शिक्षा में 12 फीसदी आरक्षण देने का वायदा किया गया था।

 

साथ ही घोषणा पत्र में अनुसूचित जनजाति के लिए भी 10 फीसदी आरक्षण की बात रखी गई थी। टीआरएस ने कहा कि ये मुद्दा संसद में भी उठेगा और अगर फिर इसे लटकाया गया तो वे इसे साल 2019 के लोकसभा चुनाव में  मुद्दा बनाएंगे।

सीएम चंद्रशेखर ने 16 घोषणाएं की जिनमें यह भी शामिल था कि राज्य में करीब 900 उर्दू टीचरों की भर्ती की जाएगी। भर्ती का जिम्मा उर्दू अकादमी को दिया जाएगा, जो करीब 60 दिनों में इस काम को पूरा करेगी। इतना ही नहीं सीएम उर्दू को राज्य की दूसरी आधिकारिक भाषा ऐलान करने का भी प्लान बना रहे हैं।

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