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क्या सीएम पद से बर्खास्त हो जाएंगे नीतीश कुमार?

National | 11-Sep-2017 03:08:22 PM
     
  
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Supreme Court asked answer to Election Commission on the matter of Nitish Kumar

दि राइजिंग न्यूज़

पटना।

 

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अयोग्य करार दिए जाने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी करते हुए दो हफ्ते में जवाब मांगा है।

 

दरअसल सुप्रीम कोर्ट के वकील एमएल शर्मा ने नीतीश के खिलाफ दायर जनहित याचिका में आरोप लगाया कि उन्होंने अपने चुनावी हलफनामे में खुद के खिलाफ चल रहे आपराधिक मुकदमों की बात छुपाई।

इस याचिका में कहा गया है, “नीतीश कुमार ने वर्ष 2004 और 2012 के चुनाव में दाखिल शपथ पत्र में 1991 में हुई हत्या के एक मामले में उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर का जिक्र नहीं किया। नीतीश ने अपने हलफनामे में यह साक्ष्य छुपाया है और इस कारण वह इस संवैधानिक पद पर नहीं रह सकते। उन्हें विधान परिषद की सदस्यता से अयोग्य करार दिया जाए।”

 

क्या है पूरा मामला

 

बता दें कि बिहार में जेडीयू से गठबंधन टूटने पर आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद ने नीतीश कुमार पर हत्या के मामले में नामजद होने का खुलासा किया था। दरअसल हत्या का यह मामला 26 साल पुराना है, जिसमें पंडारख थानाक्षेत्र में पड़ने वाले ढीबर गांव के रहने वाले अशोक सिंह ने नीतीश कुमार सहित कुछ अन्य लोगों पर हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। अशोक सिंह ने इस बाबत दर्ज एफआईआर में आरोप लगाया था कि बाढ़ सीट पर मध्यावधि चुनाव में वह अपने भाई सीताराम सिंह के साथ वोट देने मतदान केंद्र गए थे, तभी इस सीट से जनता दल उम्मीदवार नीतीश कुमार वहां आ गए। उनके साथ मोकामा से विधायक दिलीप कुमार सिंह, दुलारचंद यादव, योगेंद्र प्रसाद और बौधु यादव भी थे। सभी लोग बंदूक, रायफल और पिस्तौल से लैस होकर आए थे।

एफआइआर में आगे कहा गया है, “फिर अचानक नीतीश कुमार मेरे भाई को जान से मारने की नीयत से फायर किया, जिससे घटनास्थल पर ही उनकी मौत हो गई।” एफआइआर के मुताबिक, इस घटना में शिकायतकर्ता के अलावा चार अन्य लोग भी घायल हो गए।

 

नीतीश के खिलाफ दर्ज इस FIR को लेकर अब यह बात सामने आ रही है कि 1991 का यह मामला वर्ष 2009 में दोबारा उछला था। तब 1 सितंबर 2009 को बाढ़ कोर्ट के तत्कालीन अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (एसीजेएम) रंजन कुमार ने इस मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ मामले में ट्रायल शुरू करने का आदेश दिया था।

इस पर फिर नीतीश कुमार ने पटना हाईकोर्ट में याचिका दर्ज कर मामले को रद्द करने की मांग की थी। इस पर हाईकोर्ट ने इस मामले में निचली अदालत के आदेश पर स्टे लगा दिया और इस हत्याकांड में नीतीश के खिलाफ चल रहे सभी मामलों को उसके पास स्थानांतरित करने को कहा था। हालांकि हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद इन 8 वर्षों के दौरान इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई।

 

 



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