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दि राइजिंग न्यूज़

नई दिल्ली।

 

भारत में 2015 में 1.56 करोड़ गर्भपात हुए। ज्यादातर महिलाओं ने डॉक्टर्स से बिना सलाह लिए घर में ही दवा खाकर गर्भपात कर लिया। लैंसेट ग्लोबल हेल्थ में प्रकाशित रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। शोधकर्ताओं के मुताबिक देश में 2015 में कुल 4.81 करोड़ गर्भधारण हुए, जिसमें से आधे गर्भ अनचाहे थे।

 

81 फीसदी महिलाएं घर में ही दवा खाकर गर्भ गिरा लेती हैं। सिर्फ 14 फीसदी गर्भपात स्वास्थ्य केंद्रों पर होते हैं। पांच फीसदी गर्भपात अस्पताल से बाहर बेहद असुरक्षित तरीकों से होते हैं। दूसरे देशों से तुलना करें, तो भारत में 15 से 49 साल की एक हजार महिलाओं में से 47 गर्भपात कराती हैं। जबकि पाकिस्तान में यह आंकड़ा 50, नेपाल में 42 और बांग्लादेश में 39 है।

न्यूयॉर्क के गटमैचर इंस्टीट्यूट की उपाध्यक्ष डॉ. सुशीला सिंह के मुताबिक गर्भपात की कम सुविधाओं के चलते भारत में महिलाएं चुनौतियों का सामना कर रही हैं। देश में गर्भपात के लिए प्रशिक्षित नर्स और उपकरणों की काफी कमी है।

 

मुंबई के अंतरराष्ट्रीय जनसंख्या अध्ययन संस्थान के प्रोफेसर चंद्रशेखर के मुताबिक सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2015 में स्वास्थ्य केंद्रों पर सात लाख गर्भपात हुए, लेकिन निजी संगठनों और एनजीओ के आंकड़ों के मुताबिक देश में सार्वजनिक सुविधा आधारित उस साल 35 लाख गर्भपात हुए। वहीं चूंकि देश में चार में एक महिला सुरक्षित गर्भपात के लिए सार्वजनिक सुविधाओं का चयन कर रही है। इसलिए इसमें सुधार की उम्मीद है।

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