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दि राइजिंग न्यूज़

नई दिल्ली।

 

ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित और नई कविता आंदोलन के पुरजोर हिमायती कवि कुंवर नारायण का बुधवार को निधन हो गया। नारायण, दिल्ली में अपनी पत्नी और बेटे के साथ रहते थे। कुंवर की पहचान एक ऐसे शख्स के तौर पर थी जिन्होंने अपसनी रचनाशीलता में इतिहास और मिथक को जरिए वर्तमान को देखा।

 

 

कुंवर का जन्म फैजाबाद में हुआ और उनका साहित्यिक सफर करीब 51 साल का रहा। उन्होंने कला और सिनेमा पर कई उल्लेखनीय लेख लिखे। वह, उन चंद कवियों में से थे, जिन्हें बहुत प्यार और सम्मान मिला और विवादों से दूर ही रहे। हालांकि एक बार उन्हें धमकी मिली जब उन्होंने “अयोध्या 1992” कविता लिखी।

 

 

उनकी पहली किताब साल 1956 में “चक्रव्यूह” आई थी। इसके अलावा आकारों के आसपास, अपने सामने बी उनकी प्रमुख रचनाएं हैं। कुंवर नारायण को 1995 में साहित्य अकादमी और 2009 में पद्मभूषण से सम्मानित किया गया। इसके अलावा कुंवर को साहित्य जगत के सर्वोच्च सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार से साल 2005 में सम्मानित किया गया।

 

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