Crowd Rucuks At Sapna Chaudhary Program in Begusaray of Bihar

दि राइजिंग न्यूज़

नई दिल्ली।

 

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने बीते हफ्ते एक रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय सुरक्षाबलों के खिलाफ लड़ने के लिए नक्सली झारखंड और छत्तीसगढ़ से बच्चों की भर्ती करते हैं। रिपोर्ट पर सीआरपीएफ के जवानों का कहना है कि नक्सलियों द्वारा ऐसा किया जाना कोई नई बात नहीं है।

 

रिपोर्ट में झाखंड को किया गया हाईलाइट

“चिल्ड्रन इन आर्म्ड कॉनफ्लिक्ट” (सशस्त्र संघर्ष में बच्चे) नामक इस रिपोर्ट में दुनिया के 20 देशों में बच्चों को मारने और उनके इस्तेमाल किए जाने के बारे में बताया गया है। इन देशों में भारत के अलावा सीरिया, अफगानिस्तान, यमन, फिलीपींस और नाइजीरिया का नाम भी शामिल है। इसमें यह भी बताया गया है कि नक्सली किस प्रकार बच्चों की भर्ती के लिए लॉटरी सिस्टम का प्रयोग करते हैं, रिपोर्ट में खास तौर पर झारखंड की बात कही गई है।

8,000 बच्चों को लड़ाकों के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है

रिपोर्ट पर सीआरपीएफ चीफ राजीव राय भटनागर का कहना है कि लॉटरी सिस्टम में ड्रॉ किया जाता है। पर्चियों में बच्चों के नाम लिखे होते हैं। जिस भी बच्चे का नाम पर्ची में निकलता है उसे भर्ती कर लिया जाता है। इन बच्चों की उम्र 16-18 के बीच होती है। इनके परिवारों को कहा जाता है कि वह अपने एक बच्चे को नक्सलियों को तोहफे में दे दें। जिस कारण परिवार के दबाव में आकर बच्चों को नक्सलियों के साथ जाना पड़ता है।

 

बच्चों को ढाल के रूप किया जाता है इस्तेमाल

उन्होंने बताया कि इन बच्चों में अधिकतर लड़के होते हैं जिनकी उम्र 16 साल से अधिक होती है। इन बच्चों का इस्तेमाल नक्सली पारंपरिक तौर पर करते हैं और इन्हें बाल दस्ता तथा बाल सैनिक कहा जाता है। इनका इस्तेमाल नक्सली मुठभेड़ के दौरान ढ़ाल के रूप में किया जाता है। ये बाल सैनिक तकनीकी और मुखबिरों का काम करते हैं। उन्होंने बताया कि इन बच्चों के माता पिता अपनी जान बचाने के लिए पुलिस को इस बारे में शिकायत नहीं करते हैं।

रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया

अधिकतर लोगों का इस रिपोर्ट पर कहना है कि यह एक तरह से अफवाह जैसा है क्योंकि ना तो इस रिपोर्ट में कोई केस स्टडी दी गई है और ना ही किसी प्रकार के कोई आंकड़ें बताए गए हैं। वहीं संयुक्त राष्ट्र की इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2017 में दुनिया भर के विभिन्न देशों में जो भी संघर्ष हुए हैं उनमें करीब 10,000 बच्चों की मौत हुई है और कुछ घायल भी हुए हैं। इसके अलावा 8,000 बच्चों को लड़ाकों के तौर पर इस्तेमाल किया गया है।

 

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