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दि राइजिंग न्यूज़

नई दिल्ली।

 

 

गुजरात में भाजपा से पाटीदार समुदाय की नाराजगी कम होने का नाम ही नहीं ले रही है। जबकि बीजेपी के पटेल नेता और गुजरात के डिप्टी CM के नेतृत्व में गौरव यात्रा चल रही है, जिसका आगाज बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने सरदार पटेल की जन्मभूमि से किया था। इसके बावजूद पाटीदार का गुस्सा बीजेपी के प्रति कम नहीं हो रहा है। मंगलवार को नितिन पटेल के नेतृत्व में चल रही है गौरव यात्रा जब चाणस्मा पहुंची तो पाटीदारों ने जमकर विरोध किया।

बता दें कि 1 अक्टूबर को नितिन पटेल के नेतृत्व में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने ने सरदार पटेल की जन्मभूमि से गौरव यात्रा को हरी झंडी दिखाई लेकिन बीजेपी अपने मंसूबे में अभी तक सफल होती नजर नहीं आ रही है। क्योंकि नितिन पटेल को जगह-जगह पटेल समुदाय की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है।

 

नितिन पटेल के कार्यक्रम का विरोध

 

मंगलवार को नितिन पटेल के नेतृत्व वाली गौरव यात्रा का 10वां दिन था। गुजरात के पाटन में गौरव यात्रा का बीजेपी कार्यकर्ताओं के द्वारा स्वागत कार्यक्रम रखा गया था। नितिन पटेल  इस कार्यक्रम में 3 घंटे देर से पहुंचे। नितिन पटेल को यात्रा के दौरान चाणस्मा में पाटीदारों के विरोध का सामना करना पड़ा। गुजरात पुलिस और पाटीदार समुदाय के बीच झड़प भी हुई। इसके अलावा जब नितिन पटेल जनसभा को संबोधित करने के लिए मंच पर आए तो पाटीदारों ने कुर्सियां फेंकीं और जमकर विरोध किया।

गौरव यात्रा के जरिए 149 विधानसभा पर नजर

 

नितिन पटेल और जीतू वाघाणी के नेतृत्व में निकली दोनों यात्राएं 4700 किमी से अधिक की दूरी तय करेंगी और राज्य के कुल 182 विधानसभा क्षेत्रों में ग्रामीण क्षेत्र की 149 सीटों से होकर गुजरेंगी। इसका समापन 16 अक्टूबर को होगा और पीएम नरेंद्र मोदी सभा को संबोधित करेंगे।

पटेलों पर गुजरात सरकार मेहरबान

 

विजय रुपानी के नेतृत्व वाली गुजरात की बीजेपी सरकार ने पटेल समुदाय के आरक्षण के लिए आयोग को मंजूरी दी है। इसके अलावा जिन पटेल समुदाय के लोगों पर आंदोलन की वजह से केस दर्ज हुआ था, उसे भी सरकार वापस लेने पर विचार कर रही है। बीजेपी सरकार ने पाटीदार समुदाय के प्रतिनिधियों से बातचीत की और पाटीदारों को खुश करने के लिए कई कदमों का ऐलान किया है। इसके बावजूद बीजेपी को पाटीदार समुदाय का विरोध झेलना पड़ रहा है।

 

गुजरात के किंगमेकर

 

गुजरात में पाटीदार मतदाता करीब 20 फीसदी हैं। मौजूदा सरकार में करीब 40 विधायक और 7 मंत्री पटेल समुदाय से हैं। पाटीदार समाज बीजेपी का परंपरागत वोटर रहा है।  2014 में नरेंद्र मोदी के गुजरात के सीएम से देश का पीएम बन जाने के बाद से पाटीदारों पर बीजेपी की पकड़ कमजोर हुई है।

हार्दिक पटेल के नेतृत्व में शुरू हुए पटेल आंदोलन ने बीजेपी की पकड़ को और कमजोर कर दिया है। हार्दिक पटेल बीजेपी के खिलाफ लगातार माहौल बनाने के लिए हर संभव कोशिश में लगे हैं और पिछले दिनों तो उन्होंने संकल्प यात्रा भी निकाली थी।

 

2012 में पटेलों की पहली पसंद बीजेपी

 

गुजरात में पटेलों में दो उप-समुदाय हैं। इनमें एक लेउवा पटेल और दूसरा कड़वा पटेल। हार्दिक, कड़वा पटेल हैं। केशुभाई पटेल लेउवा समुदाय से हैं।1990 के दशक से ही दो-तिहाई से ज्यादा पटेल, बीजेपी के पक्ष में वोट करते आए हैं। पाटीदार समुदाय में लेउवा का हिस्सा 60 फीसदी और कड़वा का हिस्सा 40 फीसदी है। कांग्रेस को कड़वा के मुकाबले लेउवा से ज्यादा समर्थन मिलता रहा है। पाटीदार समुदाय संगठित होकर मतदान करता है। पिछले चुनाव 2012 के आंकड़े को देखें तो लेउवा पटेल के 63 फीसदी और कड़वा पटेल के 82 फीसदी वोट बीजेपी को मिले थे

 

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