Irrfan Khan Writes an Emotional Letter About His Health

दि राइजिंग न्‍यूज

नई दिल्‍ली।

 

जेएनयू में हुए छात्र संघ चुनाव में मिली हार के बाद और दिल्‍ली विश्‍वविद्यालय में हुए छात्रसंघ चुनाव में भी एबीवीपी को बड़ा झटका लगा है। वहीं कांग्रेस की स्‍टूडेंट इकाई एनएसयूआइ को बड़ी कामयाबी मिली है। NSUI ने अध्यक्ष पद समेत दो बड़े पदों पर कब्जा जमाया है। अध्यक्ष पद की रेस में एनएसयूआइ के रॉकी तुसीद ने एबीवीपी के रजत चौधरी को हराया है।

इसके अलावा एनएसयूआइ ने उपाध्यक्ष, ज्वाइंट सेकेट्ररी पद पर भी कब्जा किया है, जबकि ABVP सिर्फ सेकेट्ररी पद पर ही कब्जा जमा पाई है। अभी कुछ दिनों पहले ही जेएनयू छात्र संघ चुनाव में भी एबीवीपी को कामयाबी नहीं मिल पाई थी।

 

 

गिनती के दौरान कड़ा मुकाबला रहा। शुरुआती राउंड में एबीवीपी ने चारों पदों पर बढ़त बनाई हुई थी, तो बाद में एनएसयूआइ ने बढ़त बनाई। पिछले साल एबीवीपी ने डूसू के सेंट्रल पैनल में चार में से तीन सीटों पर कब्ज़ा जमाया था। पिछले चार साल से एबीवीपी डूसू पर काबिज़ है।

 

 

वहीं डूसू के इस दंगल में एनएसयूआइ पिछले चार साल से हार का सामना कर रही थी। हालांकि पिछले साल जॉइंट सेक्रटरी के पोस्ट पर एनएसयूआइ के मोहित गरीड़ ने बाज़ी मारी थी। एनएसयूआइ को उम्मीद है कि इस साल डूसू जीतने में वो कामयाब होंगे, लेकिन चुनाव से ठीक पहले एनएसयूआइ के प्रेसिडेंड कैंडिडेट रॉकी तुसीद का नामांकन रद्द होने के बाद एनएसयूआइ को दूसरी उम्मीदवार अलका के लिए प्रचार करना पड़ा, लेकिन फिर रॉकी तुसीद के पक्ष में हाई कोर्ट का फैसला आने पर एनएसयूआइ का प्रेसिडेंड कैंडिडेट बदलने पर डीयू के छात्रों के बीच असमंजस की स्थिति बन गई।

हालांकि सोशल मीडिया कैंपेन के जरिये एनएसयूआइ ने प्रेसिडेंड पोस्ट के लिए जमकर प्रचार किया, लेकिन एनएसयूआइ को ये डर जरूर सता रहा है कि कहीं छात्रों का ये संशय उन्हें डूसू चुनाव में भारी न पड़े।

 

 

पिछले बार से ज्यादा वोट

चुनाव में डीयू के छात्रों ने बढ़ चढ़कर मतदान किया। पिछले साल जहां डूसू चुनाव में 36.9 फीसद वोट पड़े थे, तो वहीं इस साल मॉर्निंग कॉलेज के 32 कॉलेजों में ही कुल 44 फीसद वोट डाले गए। चुनाव समिति के मुताबिक मॉर्निंग कॉलेज के 77,379 छात्र-छात्राओं में से 34,051 छात्र-छात्राओं ने चुनाव में मतदान किया। मॉर्निंग कॉलेजों में मतदान की शुरुआत थोड़ी धीमी रही। हालांकि 11 बजे के बाद मतदान करने वाले छात्रों की भीड़ कैंपस में नज़र आयी।

 

 

डीयू के ऑफ कैंपस कॉलेज में कैंपस कॉलेज के मुकाबले ज्यादा मतदान हुआ। चुनाव को लेकर इवनिंग कॉलेज के स्टूडेंट्स ने भी बड़ी तादाद में हिस्सा लिया। डूसू चुनाव को देखते हुए डीयू को पूरी तरह छावनी में तब्दील कर दिया गया था और सभी 51 मतदान केंद्रों के बाहर पुलिस की तैनाती थी।

 

 

बोगस वोटिंग न हो इसलिए बिना आई कार्ड किसी को भी कॉलेज के अंदर जाने की अनुमति नहीं थी। डूसू चुनाव में पहली बार मतदान करने वाले छात्रों का उत्साह साफ नजर आया। एक तरफ जहां उम्मीदवार आखिरी समय तक वोट अपील करने में जुटे हुए थे तो वहीं छात्र संगठनों से जुड़ी राजनीतिक हस्तियां और पूर्व डूसू पदाधिकारी भी अपने-अपने पैनल के लिए चुनाव प्रचार करते दिखे।

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