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दि राइजिंग न्यूज़

देहरादून।

 

अति संवेदनशील गांवों की सूची में शामिल कपकोट तहसील के कुंवारी गांव में बिना बारिश के ही जबरदस्त भूस्खलन हो गया। पहाड़ी से विशाल चट्टानें और पेड़ उखड़कर खाई में समा गए। वहीं देवाल ब्लाक का दूरस्थ गांव झलिया भूस्खलन की चपेट में आ गया। यहां पहाड़ी से शनिवार रात को भूस्खलन होने से गांव के 20 से अधिक परिवारों ने गांव छोड़ छानियों में शरण ली।

 

कपकोट तहसील के कुंवारी गांव में जबरदस्त भूस्खलन के अफरातफरी मच गई। फिलहाल किसी जनहानि की सूचना नहीं है। तहसील प्रशासन ने एसडीआरएफ की सात सदस्यीय टीम कुंवारी गांव भेज दी है। तहसील मुख्यालय से लगभग 95 किमी की दूरी पर स्थित कुंवारी गांव की पहाड़ी में शनिवार की शाम 7:30 बजे एकाएक भूस्खलन हो गया। पहाड़ी से विशालकाय बोल्डर और पेड़ों के गिरने से गांव में अफरा-तफरी मच गई। लोग घरों से बाहर निकल आए।

पूरा गांव रात भर दहशत में रहा। सुबह होने पर गांव के एक व्यक्ति ने घटना की सूचना तहसील प्रशासन को दी। गांव में भूस्खलन की सूचना पर कपकोट के उपजिलाधिकारी रवींद्र सिंह बिष्ट ने एसडीआरएफ की सात सदस्यीय टीम कुंवारी गांव भेज दी। जिस क्षेत्र में भूस्खलन हुआ है उस हिस्से के खतरे में आने के कारण वहां से पहले ही सभी परिवारों को गांव के दूसरे सुरक्षित स्थान पर पुनर्वासित किया जा चुका है।

 

अति संवेदनशील गांवों में शामिल है कुंवारी

जिले का कुंवारी गांव अतिसंवेदनशील गांवों की सूची में शामिल है। इस गांव में लगभग 64 परिवार रहते हैं। एक दशक पूर्व से इस गांव में जबरदस्त भूस्खलन हो रहा है। गांव के आगे से जमीन दरकने और पीछे की पहाड़ी से लगातार भूस्खलन के कारण वर्ष 2014 में गांव को पूरी तरह से दूसरे सुरक्षित भाग में विस्थापित कर दिया गया। इसके लिए गांव के प्रत्येक परिवार को धनराशि उपलब्ध कराई गई थी। कुंवारी गांव उत्तराखंड राज्य में पूर्ण विस्थापित होने वाला पहला गांव है।

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